पैलेट गन विवाद: साकेत गोखले बोले- मामला सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाऊंगा
TMC नेता ने कहा, "पहले मोदी-शाह सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था. फिर, जब सच्चाई सामने आई, तो उन्होंने पीड़ितों की कुल संख्या का विवरण देने से इनकार कर दिया."

4पीएम न्यूज नेटवर्क: TMC नेता ने कहा, “पहले मोदी-शाह सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था. फिर, जब सच्चाई सामने आई, तो उन्होंने पीड़ितों की कुल संख्या का विवरण देने से इनकार कर दिया.”
दिल्ली में पिछले महीने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है. राहुल गांधी के पिछले दिनों करीब 7 घंटे के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए एक युवक के मामले में एफआईआर दर्ज की.
अब एक अन्य नेता का कहना है कि CRPF ने बताया कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वह अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे.
तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने पैलेट गन को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने लंबे पोस्ट में कहा, “यह चौंकाने वाला है. CRPF का कहना है कि राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है.”
CRPF ने जानकारी देने से मना किया
उन्होंने आगे कहा, “रैपिड एक्शन फोर्स (जो CRPF का हिस्सा है) के पास एक RTI फाइल की गई थी. इसमें मैंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी मांगी थी.” उन्होंने कहा, “हालांकि, कानून के तहत, CRPF को RTI एक्ट से छूट मिली हुई है, सिवाय उन मामलों के जो भ्रष्टाचार या मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े हों.”
टीएमसी नेता ने आगे बताया कि मेरी RTI के जवाब में, CRPF ने पैलेट गन से जुड़ी जानकारी देने से मना कर दिया और यह दावा भी किया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है. फिर जब इस जवाब के खिलाफ अपील की गई, तो अपीलीय अधिकारी ने भी वही बहाना बनाया और किसी तरह की जानकारी देने से फिर इनकार कर दिया.
पैलेट गन पर केंद्र की दलील चौंकाने वालीः गोखले
उन्होंने कहा, “पहले मोदी-शाह सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया था. फिर, जब सच्चाई सामने आई, तो उन्होंने पीड़ितों की कुल संख्या का विवरण देने से इनकार कर दिया. और अब, यह हैरान करने वाली बात है कि देश की राजधानी में निहत्थे युवाओं पर पैलेट गन (जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबंधित है) के इस्तेमाल को अमित शाह की CRPF मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं मानती है.”
पैलेट गन के इस्तेमाल की बात पर साकेत गोखले ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “किसी भी सभ्य लोकतंत्र में, इस तरह की दलीलें देना चौंकाने वाला है. अब मैं इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखूंगा और इस पर कोर्ट की राय जानने का अनुरोध करूंगा.”
पैलेट गन से एक युवक हो गया था घायल
इससे पहले जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च प्रदर्शन दौरान पुलिस की ओर से पैलेट गन चलाने की घटना भी हुई. हालांकि पुलिस या सरकार इससे इनकार करती रही है, जबकि विपक्ष इस पर लगातार हमलावर है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 21 अगस्त को कथित पैलेट गन फायरिंग से घायल हुए युवक की एफआईआर को लेकर पुलिस थाने के बाहर धरने पर बैठ गए थे. कई घंटे के धरने प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की.
साहिल लोचब और उनके परिवार की ओर से यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई में पैलेट गन के छर्रे लगने से साहिल घायल हुए थे. फिर राहुल गांधी ने जुलाई में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में साहिल को मीडिया के सामने पेश किया था. साहिल की दाईं आंख में गंभीर चोटें आई हैं और उनके परिवार की ओर से दावा किया गया कि चोट के कारण उनकी आंख की रोशनी जाने का खतरा है.



