देवबंद में भाजपा के खिलाफ महाविस्फोट-इस बार बदलाव
मुस्लिम बोले- मौत को गले लगाते हैं, 75 साल के आरएसएस वाले बोले- विधायक ने हम पर 3०7 लगवाई

किसान बोला- गन्ने का 45० वाला वादा झूठा है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
देवबंद विधानसभा/ सहारनपुर। देवबंद में विस 27 चुनाव से पहले ही सियासी भूचाल आ गया है। देवबंद में तानाशाही, टैक्स, पेपर लीक पर लाठीचार्ज, वुड कार्विंग बर्बाद, राम मंदिर का चंदा तक चोरी केमामले में देवबंद के 5 लोगों ने भाजपा की पोल खोल दी है।
लोग बोले- इस बार सत्ता परिवर्तन तय। मुस्लिम, किसान, छात्र, कारीगर और खुद आरएसएस तक भाजपा के खिलाफ एक सुर में बोल रहे हैं – इस बार बदलाव होगा।
देवबंद विस पर एक नजर
देवबंद अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, यहाँ प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद स्थित है। राजनीतिक रूप से यह सीट काफी संवेदनशील और चर्चा में रहती है। देवबंद विधानसभा क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश विधानसभा के 4०3 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है । यह सहारनपुर जिले का हिस्सा है और सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। 2००8 से, यह विधानसभा क्षेत्र 4०3 निर्वाचन क्षेत्रों में 5वें नंबर पर है। 2००8 से पहले, जब संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आदेश, 8 लागू हुआ, तब यह निर्वाचन क्षेत्र 4०० वें नंबर पर था। 16 मार्च 17 को, नव निर्वाचित विधायक बृजेश सिंह ने घोषणा की कि उनका इरादा निर्वाचन क्षेत्र का नाम बदलकर देव-वरंद रखने का है।

मुस्लिम समाज का ऐलान-ए-जंग
हम मुस्लिम समुदाय से ताल्लुुक रखते हैं, हम मौत को गले लगाते हैं और डरते किसी से नहीं हैं। इस बार हम 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता का परिवर्तन करके रहेंगे।
टैक्स, तानाशाही और लाठीचार्ज का आरोप
लोग भाजपा से दुखी हो गए हैं, इतना टैक्स लगा दिया, पूरी तानाशाही है, भय का माहौल है। किसान की दुर्गति कर दी, आय दोगुनी नहीं हुई। कांवडिय़ों पर फूल बरसाते हैं और बच्चे रोजगार, पढ़ाई, पेपर लीक की मांग करें तो लाठीचार्ज कर देते हैं। वुड कार्विंग वालों पर कोई रहम नहीं, बारिश में दुकानों में पानी भर जाता है, भारी नुकसान होता है।
जुमलों से पीडि़त जनता
जनता इस सरकार की छुट्टी चाह रही है, झूठे जुमलों से बहुत पीडि़त है। उत्तर प्रदेश में बदलाव होगा। देवबंद में जो जनप्रतिनिधि हैं, उनके जुल्म, अत्याचार और अहंकार से लोग पीडि़त हैं। उनके व्यक्तित्व में जुमले और डराना शामिल है। इस बार बदलाव होकर रहेगा।
गन्ना किसान का सबसे बड़ा हमला
2014 में प्रधानमंत्री कह रहे थे 450 का भाव लेना है कि नहीं, आज तक 450 नहीं मिला। चीनी 65 रुपये किलो है, गन्ना 400 रुपये। किसान दुखी है, जनता दुखी है, नौजवान दुखी है। सहारनपुर में भाजपा के गड़े झंडे उखड़ेंगे। नितिन नवीन अपनी सीट नहीं जिता पाए तो सहारनपुर क्या जिताएंगे? इनकी सरकार में राम मंदिर का चंदा भी चोरी हो गया। बैलेट पेपर से चुनाव हो जाए तो भाजपा जीत ही नहीं सकती, इनको ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री बनवा रहे हैं। 2 करोड़ नौकरी का दावा किया, नौकरी दी नहीं, ऊपर से लाठी मार रहे हैं। जनता छुट्टी कर देगी।
75 साल के आरएसएस कार्यकर्ता ने विधायक पर फोड़ा बम
मैं 75 साल का हूं, मैं संघ का हूं, मैंने बचपन से अपने खून से भाजपा को सींचा है, संघ की शाखाएं लगाई हैं। जो मौजूदा भाजपा विधायक हैं, उन्होंने भाजपा, संघ, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के लोगों पर अत्याचार कर 3०7, 3०8 के मुकदमे लगवाए। मेरी 75 साल की उम्र में मुझ पर मुकदमा कराया, सब कार्यकर्ता जेल गए। इसीलिए सब भाजपा से दूर हैं। यह विधायक दोबारा राजनीति में उठ नहीं पाएगा। हमारा एक-एक कार्यकर्ता इसके 5 से 10 वोट कटवाएगा। इस बार हम समाजवादी पार्टी को लाएंगे।
प्राचीन एवं पौराणिक इतिहास
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का नगर है, जो महाभारत काल से जुड़ा हुआ है और विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण केंद्र दारुल उलूम देवबंद के लिए जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवबंद का प्राचीन नाम देववृंद था, जिसे महाभारत कालीन माना जाता है।
धार्मिक महत्व
ऐसा माना जाता है कि यहाँ पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय बिताया था और यहाँ देवी दुर्गा का प्राचीन मंदिर (त्रिपुरमालिनी देवी मंदिर) भी स्थित है।
देवबंद आंदोलन और दारुल उलूम का इतिहास
स्थापना (1866-1867) ब्रिटिश शासनकाल और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद देश में मुसलमानों के धार्मिक व सांस्कृतिक पतन को रोकने के लिए। इसकी शुरुआत मौलाना मुहम्मद कासिम नानोत्वी, राशीद अहमद गंगोही और मुहम्मद आबिद हुसैन द्वारा की गई थी। दारुल उलूम देवबन्द की स्थापना का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार करना, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ वैचारिक प्रतिरोध तैयार करना और मुस्लिम समुदाय में धार्मिक मूल्यों को बचाए रखना था। देवबंद के उलेमा (धार्मिक विद्वानों) ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद का कड़ा विरोध किया।वर्ष 1919 में स्थापित जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में मिश्रित राष्ट्रवाद और हिंदू-मुस्लिम एकता के सिद्धांत का समर्थन किया था। आज देवबंद पूरी दुनिया में सुन्नी हनफी इस्लाम के प्रमुख पुनरुद्धारवादी और शैक्षणिक केंद्र देवबंदी आंदोलन के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है।
यूपी में धांय धांय…सरकार के भयमुक्त यूपी के दावे पर सवाल
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने हालिया घटनाओं को लेकर सरकार पर हल्ला बोला
हत्या, रेप और एनकाउंटर के जाल में उलझा यूपी का भविष्य
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकार कहती है कि यूपी में अपराधी कानून से डरते हैं और यहां कानून का राज है और आम आदमी भयमुक्त होकर जी रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंच से लगातार यह दावा कर रहे हैं कि यूपी में कानून व्यवस्था ऐसी है कि अपराध करने से पहले अपराधी सौ बार सोचता है। लेकिन सवाल यह है कि अगर अपराधी सचमुच डर रहे हैं तो फिर राजधानी लखनऊ में धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या कैसे हो जाती है?
अगर यूपी सचमुच भयमुक्त है तो शामली में हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की हत्या क्यों होती है? और अगर कानून का खौफ अपराधियों के दिल में बैठ चुका है तो ग्रेटर नोएडा में छह साल की मासूम को अगवा कर उसके साथ दरिंदगी और फिर हत्या जैसी वारदात आखिर किस भरोसे पर होती है?
यहां सवाल किसी एक अपराध का नहीं है यहां सवाल उस भरोसे का है जिसके नाम पर सरकार जनता से कहती है कि डरने की जरूरत नहीं है कानून आपके साथ है। लेकिन जब एक परिवार का सदस्य घर से निकलकर वापस नहीं लौटता जब किसी कलाकार की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है जब एक मासूम बच्ची सुरक्षित नहीं रह पाती तब सरकारी दावे और जमीन की सच्चाई आमने सामने खड़ी दिखाई देती है। लखनऊ में धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या का मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह राजधानी का मामला है। उधर शामली में अंकित बालियान की हत्या के बाद मामला और गर्म हुआ और पुलिस ने हत्याकांड से जुड़े दो शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराने की जानकारी दी।
एनकाउंटर के बाद जश्न नहीं अपराध से पहले रोकथाम चाहिए
यूपी की कानून-व्यवस्था की बहस में एनकाउंटर हमेशा से बड़ा राजनीतिक विषय रहा है। समर्थकों के लिए यह अपराधियों में भय पैदा करने का प्रतीक है। आलोचकों के लिए यह सवाल उठाने का विषय है कि क्या पुलिस कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प बन सकती है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल है कि अगर पुलिस को अपराधी तक पहुंचने में सफलता मिलती है तो क्या उसी क्षमता का इस्तेमाल अपराध होने से पहले रोकने में नहीं किया जा सकता? क्योंकि उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति जैसे जैसे तेज होगी कानून व्यवस्था का मुद्दा फिर केंद्र में आएगा।
भयमुक्त यूपी के दावे की खुली पोल : अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अंकित बालियान हत्याकांड से लेकर ग्रेटर नोएडा की छह साल की मासूम की रेप के बाद हत्या को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री भले ही माफिया और अपराधियों के यूपी छोडऩे का दावा कर रहे हों लेकिन जमीन पर तस्वीर इसके उलट दिखाई दे रही है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों के गैंग यूपी में आकर बेखौफ वारदात कर रहे हैं और पुलिस-प्रशासन अपराधियों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। अखिलेश का हमला यहीं नहीं रुका। अंकित बालियान की शामली में सरेआम हत्या का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जिस वारदात में 18 राउंड गोलियां चलीं वह आखिर किस तरह के कानून के राज की तस्वीर है?
तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम सुहाना है!
इसके बाद बात करते हैं ग्रेटर नोएडा की छह साल की उस मासूम बच्ची का जिसके साथ रेप और हत्या की घटना ने एक बार फिर उस सवाल को सामने ला दिया है जिसे कोई सरकार सिर्फ आंकड़ों से नहीं दबा सकती क्या हमारे बच्चे सचमुच सुरक्षित हैं? आरोपी के एनकाउंटर के बाद पुलिस कार्रवाई पर चर्चा हो सकती है लेकिन उस परिवार से पूछिए जिसने अपनी बच्ची खो दी। उसके लिए कानून का राज उस वक्त कहां था जब अपराधी बच्ची को उठा ले गया था? सरकार के पास आंकड़े हैं। पुलिस के पास कार्रवाई की रिपोर्ट है। अदालत के पास कानून है। लेकिन जनता के पास एक सवाल है सुरक्षा का मतलब अपराधी को अपराध के बाद पकडऩा है या अपराध होने से पहले नागरिक को सुरक्षित रखना?चुनावी मंच पर भयमुक्त यूपी का नारा जितना बड़ा होगा जमीन पर किसी मां की चीख किसी परिवार का मातम और किसी बच्ची की असुरक्षा का सवाल उतना ही बड़ा होकर सामने आएगा।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने मोहित और सुमित प्रकरण में दर्ज किया केस
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने की थी शिकायत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) ने शामली में अंकित बालियान हत्याकांड के कथित आरोपियों मोहित एवं सुमित की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु के संबंध में पूर्व एसएचआरसी अधिकारी एवं आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वाराकी गयी शिकायत पर औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है। आयोग द्वारा इस शिकायत को पंजीकृत किया गया है।
अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा कि अंकित बालियान की हत्या अत्यंत जघन्य थी और उसके हत्यारों को कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए। लेकिन कथित हत्यारों की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंनेविशेष रूप से 3० अगस्त की रात 8:19 बजे पत्रकार अरुण (आज़ाद) चहल द्वारा एक्स अकाउंट पर की गयी पोस्ट का उल्लेख किया, जिसमें दो आरोपियों के पुलिस के हाथ लगने, दो के भारत से बाहर भागने तथा उसी रात एनकाउंटर होने की बात कही गयी थी।
इसके लगभग आठ घंटे बाद दो कथित शूटर पुलिस मुठभेड़ में मारे गये। अमिताभ ठाकुर ने इस असाधारण घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मणिपुर में फिर भडक़ी हिंसा
पुलिस पर पथराव के बाद आंसू गैस के गोले छोड़े
एनआरसी-जनगणना को लेकर हो रहा था विरोध
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
इंफाल। मणिपुर के काकचिंग जिले में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अपडेट करने की मांग को लेकर निकाला गया मशाल जुलूस हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कई आंसू गैस के गोले छोड़े।
घटना में कुछ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आई हैं। वाबागाई, हियांगलाम और आसपास के इलाकों के सैकड़ों ग्रामीणों ने रविवार रात करीब तीन किलोमीटर लंबा मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी ‘नो एनआरसी, नो सेंसस’ के नारे लगा रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि राज्य में जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने से पहले एनआरसी को अपडेट किया जाए। साथ ही उन्होंने आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के पुनर्वास से पहले जनगणना कराने का विरोध किया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी जब काकचिंग जिला मुख्यालय की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने कीराक बांध इलाके के पास उन्हें रोक दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वापस लौटने को कहा। इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और प्रदर्शनकारियों में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।



