IIT कानपुर-ISKCON समझौते को लेकर विवाद, छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम पर पूछे सवाल

स्टूडेंट को तनाव से दूर करने के लिए और उनकी मेंटल हेल्थ सही बनाए रखने के लिए IIT कानपुर ने बीते दिनों ISKCON के साथ करार किया था. इस करार को लेकर विवाद बढ़ गया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: स्टूडेंट को तनाव से दूर करने के लिए और उनकी मेंटल हेल्थ सही बनाए रखने के लिए IIT कानपुर ने बीते दिनों ISKCON के साथ करार किया था. इस करार को लेकर विवाद बढ़ गया है.

देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शामिल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) कानपुर का ISKCON के साथ हुआ समझौता विवादों में घिर गया है. IIT कानपुर और ISKCON के बीच स्टूडेंट वेलफेयर और मेंटल हेल्थ प्रोग्राम को लेकर करार हुआ है. इस करार पर स्टूडेंट्स, एलुमनाई और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाए हैं. विवाद बढ़ने के बाद IIT कानपुर प्रशासन ने करार की घोषणा से संबंधित अपनी कुछ पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मX से हटा दीं हैं.

दो साल का करार, जानें इसमें क्या है खास?

IIT कानपुर और ISKCON के बीच दो साल के लिए समझौता हुआ है. इसका उद्देश्य स्टूडेंट्स के समग्र विकास, मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास और व्यक्तिगत विकास से जुड़े कार्यक्रम चलाना है. इसमें कुछ प्रमाणित पाठ्यक्रम और गतिविधियां भी शामिल हैं.IIT कानपुर की तरफ से कहा गया है कि इन प्रोग्राम में स्टूडेंट्स की भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक होगी। यानी किसी भी स्टूडेंट पर इनमें शामिल होने की बाध्यता नहीं होगी.

धार्मिक संस्था की कैंपस में भूमिका पर सवाल

MoU यानी करार की शर्तें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस शुरू हो गई. स्टूडेंट्स और एलुमनाई स्टूडेंट वेलफेयर से जुड़े प्रोग्राम के लिए IIT जैसे तकनीकी और वैज्ञानिक संस्थान के किसी धार्मिक संगठन के साथ करार पर सवाल उठा रहे हैं. इसे IIT जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अकादमिक वातावरण के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. ये वजह भी है कि ये मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया.

IIT कानपुर ने पोस्ट क्यों हटाई?

विवाद बढ़ने के बाद IIT कानपुर ने X पर MoU की घोषणा से जुड़ी पोस्ट हटा दीं. हालांकि, सोशल मीडिया पर पोस्ट हटाए जाने के बाद विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया. संस्थान के निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने करार का बचाव किया है. उनका कहना है कि पहल स्टूडेंट्स की ओर से ही आई थी और संस्थान स्टूडेंट वेलफेयर के लिए बाहरी सहयोग लेने के लिए खुला है. उन्होंने प्रोग्राम्स के स्वैच्छिक होने पर भी जोर दिया.

स्टूडेंट मेंटल हेल्थ बना बड़ा मुद्दा

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश के IITs समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में स्टूडेंट्स मेंटल हेल्थ और तनाव को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है. IIT कानपुर में पहले से ही Center for Mental Health and Wellbeing काम कर रहा है, जहां छात्रों के लिए काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध हैं.

इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.छात्रों के मानसक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास के लिए बाहरी संस्थाओं की मदद किस सीमा तक ली जानी चाहिए और IIT जैसे वैज्ञानिक संस्थानों में ऐसे कार्यक्रमों का स्वरूप क्या होना चाहिए?

Related Articles

Back to top button