जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल जारी, इतने हजार स्टाइपेंड की मांग
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चौथे दिन भी जारी है. इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चौथे दिन भी जारी है. इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं.
जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज चौथा दिन है. प्रदेशभर में करीब 1500 से 1600 इंटर्न डॉक्टरों के हड़ताल पर रहने से स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है. खासकर अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं. इंटर्न डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनके मासिक स्टाइपेंड को मौजूदा 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए.
डॉक्टरों का कहना है कि पिछले करीब सात वर्षों से स्टाइपेंड में कोई उचित बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि वो ओपीडी, इमरजेंसी, वॉर्ड और नाइट शिफ्ट सहित कई महत्वपूर्ण सेवाओं में अपनी ड्यूटी निभाते हैं. हड़ताल के चलते अस्पतालों में इंटर्न डॉक्टरों का काम अब रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को संभालना पड़ रहा है. जम्मू के GMC में भी इसका असर ओपीडी पर देखने को मिला.
सरकार की ओर से नहीं की गई कोई पहल
हड़ताल के तीसरे दिन यानी बीते कल बुधवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या मंगलवार के मुकाबले 292 कम रही. इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की ओर से उनकी मांग पर अभी तक कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया है. सरकार ने उनकी मांगों और उनकी हड़ताल खत्म करने को लेकर किसी तरीके की कोई पहल नहीं की है.
जब तक मांगे नहीं मानी जाती, हड़ताल रहेगी जारी
डॉक्टरों ने कहा कि वह लिखित आदेश चाहते हैं तभी वह अपना हड़ताल खत्म करेंगे. डॉक्टरों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगे नहीं मान ली जाएंगी, तब तक उनकी ये अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी. बता दें कि जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने भी डॉक्टरों की इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया है. जेकेएसए कहा कि इंटर्न डॉक्टरों की मांग सच्ची, उचित और पूरी तरह से जायज है.
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में सोमवार (31 अगस्त) को 1500 से 1600 डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए. डॉक्टरों की हड़ताल से जम्मू कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.



