अजीत भारती के वीडियो पर कोर्ट सख्त, ‘ऊंची’ जातियों की श्रेष्ठता वाली भाषा पर सवाल
कोर्ट ने कहा है कि उन्होंने अपने वीडियो में ऐसी भाषा इस्तेमाल की है जो जाति व्यवस्था को दिखाती है. इसमें जाति की शुद्धता की बातें हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कोर्ट ने यूट्यूबर अजीत भारती के वीडियो में जाति व्यवस्था, ऊंची-नीची जातियों से संबंधित टिप्पणियों को SC/ST एक्ट के तहत पहली नजर में अपराध माना और उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है.
दिल्ली की एक अदालत ने यूट्यूबर अजीत भारती से जुड़े SC/ST केस में एक बड़ी बात कही है. कोर्ट ने कहा है कि उन्होंने अपने वीडियो में ऐसी भाषा इस्तेमाल की है जो जाति व्यवस्था को दिखाती है. इसमें जाति की शुद्धता की बातें हैं. इसके साथ ही उसमें शादी-विवाह और खानदान के मामलों में ऊंची जातियों को नीची जातियों से बेहतर बताया गया है.
पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में SC/ST एक्ट के तहत अपराध लगता है. एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने यह भी कहा कि अगर एससी/एसटी एक्ट का मामला न होता, तो वे भारती को अग्रिम जमानत देने के बारे में सोच सकते थे. कोर्ट ने सात सितंबर को अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की थी.
जस्टिस लालेर ने साफ कहा कि आदेश में जो बातें कही गई हैं, वे सिर्फ अग्रिम जमानत की याचिका पर फैसला देने तक सीमित हैं. इसमें अजीत भारती के दोषी या निर्दोष होने, आरोप सही हैं या नहीं… फिर रिकॉर्डिंग… इन पर कोई अंतिम राय नहीं दी गई है.
क्या है पूरा मामला?
यूट्यूबर अजीत भारती के खिलाफ 23 अगस्त को FIR दर्ज हुई. इसमें SC/ST एक्ट, आईटी एक्ट की धारा 67, और भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(सी) व 351(3) लगाई गई हैं.
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भारती ने जातिवादी और अपमानजनक भाषा इस्तेमाल की. नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद और बाबा साहेब भीव राव आंबेडकर अंबेडकर के बारे में आपत्तिजनक बातें कहीं. इसके साथ ही महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे और धमकियां दीं.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
FIR के मुताबिक, भारती के वीडियो पोस्ट पर किसी ने कमेंट कर कहा कि अजीत भारती अपनी बहन की शादी चंद्रशेखर आजाद से करवा दें, तो जाति आधारित आरक्षण खत्म हो जाएगा.
इस पर भारती ने भी पलटवार किया और कहा, ”अगर वह (कमेंट करने वाला) अपनी बहन या मां की शादी ‘डोम’ या ‘चमार’ जाति में करता, तो यह तुलना ठीक होती. सिर्फ ‘चमार और सांसद’ होना शादी के लिए काफी नहीं है. आजाद को पहले यह साबित करना होगा कि वह किसी ‘सवर्ण’ महिला से शादी करने लायक है?”
अजीत भारती के वकील ने क्या कहा?
अजीत भारती के वकील जय अनंत देहादराय ने कहा कि SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) यहां लागू नहीं होतीं, क्योंकि शिकायतकर्ता मौके पर मौजूद नहीं थी और व्यक्तिगत रूप से अपमानित या डरी हुई नहीं थी.
किसी पहचाने गए एससी/एसटी व्यक्ति का सार्वजनिक रूप से अपमान भी नहीं हुआ. ये बातें सिर्फ उदाहरण या काल्पनिक थीं, किसी असली महिला के बारे में नहीं कही गईं. भारती के वकील ने आगे कहा कि आरोपों का सही फैसला तभी हो सकता है जब पूरी रॉ रिकॉर्डिंग और उसका पूरा संदर्भ देखा जाए.



