भारत के विमानन क्षेत्र को रूस का बड़ा सपोर्ट, 105 विमानों की डील से कनेक्टिविटी होगी मजबूत
भारत-रूस एविएशन डील के तहत भारतीय एयरलाइंस को 105 IL-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमानों की सप्लाई की तैयारी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत-रूस एविएशन डील के तहत भारतीय एयरलाइंस को 105 IL-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमानों की सप्लाई की तैयारी है. इससे छोटे शहरों के बीच हवाई कनेक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है.
भारत और रूस के बीच विमानन क्षेत्र में सहयोग का दायरा अब बढ़ता नजर आ रहा है. रूस की United Aircraft Corporation (UAC) ने भारतीय एयरलाइंस के साथ IL-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमानों की सप्लाई को लेकर समझौते किए हैं. इन समझौतों के तहत भारत में कुल 105 विमानों की सप्लाई की योजना सामने आई है.
इन समझौतों के तहत Pinnacle Air को 50 विमान देने की बात कही गई है. वहीं Air Kerala को 20 तक IL-114-300 विमान दिए जाने की योजना है. इसके अलावा Sleek Aviation के साथ 35 विमानों की सप्लाई को लेकर MoU हुआ है.
छोटे शहरों के बीच एयर कनेक्टिविटी पर फोकस
IL-114-300 को क्षेत्रीय एयर रूट्स के लिए डिजाइन किया गया है. ऐसे विमानों का इस्तेमाल छोटे और मध्यम दूरी के रूट्स पर किया जा सकता है. भारत में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिहाज से इस सौदे को अहम माना जा रहा है.
भारत लगातार छोटे शहरों और क्षेत्रीय हवाई अड्डों को बड़े एयर नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रहा है. ऐसे में क्षेत्रीय विमानों की उपलब्धता घरेलू एविएशन सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.
रूस का बड़ा दावा ‘Sanctions-proof’ विमान
रूस की ओर से इन विमानों को ‘Fully Sanctions-proof’ बताया गया है. यानी पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भी इनके उत्पादन और सप्लाई को बनाए रखने की क्षमता पर जोर दिया जा रहा है.
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर उसके एविएशन सेक्टर पर भी पड़ा है. ऐसे में भारत को IL-114-300 की प्रस्तावित सप्लाई रूस के लिए भी अपने विमान उद्योग और अंतरराष्ट्रीय बाजार को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है.
भारत-रूस विमानन सहयोग का नया अध्याय
भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है. अब नागरिक विमानन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिश दोनों देशों के रिश्तों में एक नया आयाम जोड़ सकती है.
IL-114-300 की प्रस्तावित सप्लाई ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत अपने घरेलू विमानन बाजार का तेजी से विस्तार कर रहा है और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए विकल्प तलाश रहा है.
हालांकि, इन विमानों की वास्तविक डिलीवरी, प्रमाणन, कॉन्फिगरेशन और भारतीय एयरलाइंस के साथ अंतिम वाणिज्यिक शर्तों की स्थिति आगे स्पष्ट होगी.



