अब और तेज होगा मराठा आरक्षण का आंदोलन, फडणवीस के लिए नई चुनौती खड़ी

कुनबी समुदाय ओबीसी श्रेणी में आता है, इसलिए इन प्रमाण पत्रों से मराठा युवा शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का फायदा उठा सकें।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र का सियासी पारा सातवें पर है। दरअसल महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर मांग तेज हो गई है। इसे लेकर सरकार सवालों के घेरे में है।

29 अगस्त 2026 से वे जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। यह उनका ग्यारहवां बड़ा अनशन है। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड्स के आधार पर पात्र मराठा लोगों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करे। कुनबी समुदाय ओबीसी श्रेणी में आता है, इसलिए इन प्रमाण पत्रों से मराठा युवा शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का फायदा उठा सकें।

साथ ही हैदराबाद और सतारा गजट के रिकॉर्ड्स को लागू करने, जाति जांच समितियों को खत्म करने और पुराने आंदोलनों में दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने की भी मांग है।जरांगे पाटिल ने साफ कहा है कि अगर 11 सितंबर तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तो 12 सितंबर को मुंबई की ओर कूच करेंगे। समर्थकों को उन्होंने पहले से ही धीरे-धीरे मुंबई पहुंचने का निर्देश दिया है, ताकि पुलिस को पता न चले।

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के महापर्व से पहले मराठा आंदोलन एक बार फिर से फडणवीस सरकार के लिए मुश्किल बनता दिखा है। शुक्रवार को जालना में आमरण अनशन के 14वें दिन मराठा क्रांति मोर्चा के लीडर मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई प्लान का ऐलान किया।

जरांगे ने कहा कि हम मुंबई जाएंगे। जरांगे ने कहा कि मुंबई कूच की तारीफ का ऐलान 12 सितंबर यानी शनिवार को किया जाएगा। मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि हम सरकार के डेलीगेशन के उनके प्रोटेस्ट साइट पर आने का इंतज़ार नहीं कर रहे हैं, बल्कि सपोर्टर्स के इकट्ठा होने और फिर अगला कदम तय करने का इंतज़ार कर रहे हैं।

हालांकि इस बीच लोगों का सपोर्ट उन्हें मिल रहा है। और लोग महाराष्ट्र सरकार को घेर रहे है। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के चीफ अभिजीत दिपके ने भी मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात की। दिपके ने मुलाकात की तस्वीरें एक्स पर साझा की हैं। वहीं इसी बीच सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने लिखा है कि मैं आज मनोज जरांगे पाटिल साहेब से मिला, जो पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, और उनकी सेहत के बारे में पूछा। दिपके ने लिखा है कि महाराष्ट्र को उनकी ज़रूरत है।

इसलिए, मैंने उनसे दिल से रिक्वेस्ट की कि वे अपनी भूख हड़ताल वापस लें और अपनी सेहत का ध्यान रखें। दिपके ने कहा है कि अगर सरकार ने गांव के युवाओं को अच्छी शिक्षा और रोज़गार के काफ़ी मौके दिए होते, तो मनोज जरांगे पाटिल साहेब आज भूख हड़ताल पर नहीं बैठते। उनका अनशन खुद दिखाता है कि लोगों का अब सरकार पर कोई भरोसा नहीं बचा है।

वहीं इस मामले को लेकर देवेंद्र फडणवीस सरकार की। महायुति सरकार के मुख्यमंत्री फडणवीस और उनके सहयोगी बार-बार कहते हैं कि संविधान और अदालत की सीमा के अंदर मराठा समाज को न्याय देंगे। वे ओबीसी समुदाय का हिस्सा नहीं छीनेंगे। सरकार ने कुछ कदम भी उठाए हैं जैसे कुनबी प्रमाण पत्र जारी करना, शिक्षा में कुछ सुविधाएं देना, छात्रवृत्ति बढ़ाना और कुछ नौकरी ट्रेनिंग कार्यक्रम।

मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उदय सामंत जैसी टीम जरांगे से मिल चुकी है। फडणवीस कहते हैं कि बातचीत का दरवाजा खुला है और कानूनी रूप से जो संभव है वो करेंगे। लेकिन जरांगे और मराठा समाज का आरोप है कि ये सब सिर्फ दिखावा है। तीन साल से बार-बार आश्वासन दिए जा रहे हैं, कमेटियां बनाई जा रही हैं, समय बढ़ाया जा रहा है, लेकिन जमीन पर असली फायदा नहीं मिल रहा। कई प्रमाण पत्र रद्द हो जाते हैं या प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग परेशान हैं।

गजट रिकॉर्ड्स को पूरी तरह लागू करने का वादा अधूरा है। सरकार कहती है कि लाखों प्रमाण पत्र दिए गए, लेकिन जरांगे का कहना है कि 58 लाख रिकॉर्ड्स के हिसाब से काम नहीं हो रहा। फडणवीस सरकार पर आरोप है कि वे ओबीसी वोट बैंक बचाने के चक्कर में मराठा मांगों को टाल रहे हैं। एक तरफ मराठा समाज को खुश करने के लिए छोटे-मोटे फैसले, दूसरी तरफ कानूनी अड़चनें और अन्य समुदायों का विरोध बताकर देरी।

फडणवीस सरकार की यह नीति मराठा युवाओं को निराश कर रही है। कई परिवार आर्थिक तंगी में हैं, खेती पर निर्भर हैं, नौकरी और शिक्षा में पिछड़ रहे हैं। आरक्षण की मांग इसलिए जोर पकड़ रही है क्योंकि मराठा समाज को लगता है कि दूसरे समुदायों को फायदा मिल रहा है जबकि वे हाशिए पर धकेले जा रहे हैं। जरांगे बार-बार फडणवीस और एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हैं कि तीन साल में सिर्फ बातें हुईं, असली काम नहीं।

विखे पाटिल पर भी आरोप लगा कि वादे पूरे नहीं किए। सरकार प्रतिनिधिमंडल भेजने से भी हिचकिचा रही है या फिर सिर्फ फोन पर बात करके काम चला रही है। इससे लगता है कि सरकार आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है बजाय समस्या हल करने के।

हालांकि जारंगे भले ही फडणवीस को घेर रहे हों लेकिन सीएम फडणवीस की पत्नी उन्हें लेकर सॉफ्ट बयान देती हुई नजर आ चुकी हैं। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल को अपना भाई बताते हुए उन्हें घर पर खाना खाने के लिए आमंत्रित किया है.

अमृता फडणवीस ने यह बात नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान. मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन और उनकी मांगों को लेकर सवाल पूछे जाने पर अमृता फडणवीस ने कहा, “जरांगे पाटिल जी मेरे भाई हैं और मैं उन्हें हमारे घर खाने के लिए आमंत्रित करती हूं.” उनके इस बयान को मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच एक भावनात्मक अपील के तौर पर देखा जा रहा है.

मराठा आरक्षण आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की भी एंट्री हो गई है. इस आंदोलन पर अन्ना हजारे ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. साथ ही हजारे ने जरांगे को एक अहम सलाह भी दी है. उन्होंने कहा कि अनशन समाज और देश के लिए होना चाहिए.

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अन्ना हजारे ने मराठा आरक्षण आंदोलन और मनोज जरांगे पाटिल पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “मैंने जीवन में 22 अनशन किए हैं. अनशन से सेहत दुरुस्त रहती है. अनशन समाज और देश के लिए होना चाहिए. मैंने अपने पूरे जीवन में अनशन करके 10 कानून पास करवाए हैं.”

इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने महायुति गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार उन्हें मारना चाहती है। उन्होंने राजनीतिक फायदे के लिए मनोज जरांगे पाटिल का इस्तेमाल किया। जालना जिले के अंतरवाली सरती में मीडिया वालों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम देखेंगे कि कुनबी सर्टिफिकेट जारी करने के लिए लगाए गए कैंप चल रहे आंदोलन की वजह से हैं या जारी किए गए सर्टिफिकेट कैंसिल करने के लिए।

महाराष्ट्र में मनोज जरांगे पाटिल ने सरकार से मांग कर रहे हैं कि वह हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड में कुनबी एंट्री के आधार पर मराठा समुदाया के एलिजिबल मेंबर्स को सर्टिफिकेट जारी करे और सर्टिफिकेट को कैंसल करने के बजाय वैलिडेट करे।

महायुति सरकार में मंत्री उदय सामंत का कहना है कि हम 12 सितंबर से पहले इस मामले को सुलझाने के लिए हर कदम उठा रहे हैं। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि सरकार ने सर्टिफिकेट जारी करने के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए कैंप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के SOPs के आधार पर ओबीसी कैटेगरी के तहत आरक्षण देने के लिए ये कदम उठाए गए हैं।

ऐसे में दोस्तों 12 सितंबर का दिन अहम है। अगर तब तक ठोस सरकारी प्रस्ताव नहीं आता जिसमें सभी मांगें शामिल हों तो मुंबई में बड़ा आंदोलन शुरू हो सकता है। मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है, वहां प्रदर्शन से पूरा राज्य प्रभावित होगा। पहले भी जरांगे मुंबई पहुंचे हैं और सरकार को झुकना पड़ा।

इस बार भी वही दबाव बनने वाला है। फडणवीस सरकार को समझना चाहिए कि मराठा समाज राजनीतिक रूप से बहुत प्रभावशाली है। बार-बार अनशन और कूच से न सिर्फ स्वास्थ्य का खतरा है बल्कि सामाजिक तनाव भी बढ़ रहा है। ओबीसी समुदाय भी चिंतित है कि उनका हिस्सा न कटे, इसलिए सरकार दोनों तरफ से घिरी हुई है।

सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द स्पष्ट और कानूनी रूप से मजबूत फैसला ले। सिर्फ शिविर लगाने या आंकड़े बताने से काम नहीं चलेगा। प्रमाण पत्र जल्दी और बिना अड़चन के मिलने चाहिए। पुराने मामले वापस लेने चाहिए ताकि युवा निश्चिंत रहें। फडणवीस खुद कहते हैं कि संविधान के अंदर न्याय देंगे तो फिर देरी क्यों?

अगर कानूनी रास्ता है तो उसे अपनाना चाहिए, नहीं तो नए कानून या संशोधन पर काम करना चाहिए। टालमटोल से आंदोलन और तेज होगा।मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र बन चुका है। जरांगे पाटिल एक साधारण कार्यकर्ता से बड़े नेता बन गए क्योंकि उन्होंने समाज की पीड़ा को आवाज दी। उनकी हड़ताल सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, पूरे समुदाय की लड़ाई है।

फडणवीस सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि समर्थक सड़कों पर उतर रहे हैं। अगर 12 सितंबर को मुंबई कूच होता है तो गड़बड़ी बढ़ सकती है। सरकार को अभी भी मौका है कि बातचीत करके समाधान निकाले। आश्वासन नहीं, अमल चाहिए। मराठा समाज इंतजार कर रहा है कि फडणवीस सरकार वाकई उनके हक में काम करे या फिर सिर्फ वोट के लिए बातें करती रहे।

अभी तक स्थिति यह है कि अनशन जारी है, मांगें अधूरी हैं और मुंबई कूच की तैयारी चल रही है। फडणवीस सरकार को जल्दी फैसला लेना होगा वरना आंदोलन और तेज होकर पूरे महाराष्ट्र को प्रभावित कर सकता है। कुल मिलाकर दोस्तों मराठा समाज ने फडणवीस सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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