AIIMS Gorakhpur का गेट नंबर 3 क्यों बंद? मरीजों की परेशानी को लेकर उठी आवाज, आंदोलन की चेतावनी
गोरखपुर एम्स का गेट नंबर तीन खोलने की मांग को लेकर प्रताप वाहिनी संस्था ने सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। संस्था ने मांग पूरी न होने पर जनआंदोलन की चेतावनी दी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गोरखपुर एम्स में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों की राह आसान करने की मांग उठी है। एम्स के बंद पड़े गेट नंबर तीन को जनहित में खोलने की मांग को लेकर प्रताप वाहिनी सामाजिक संस्था के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। संस्था ने जल्द मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
गेट नंबर तीन बंद होने से बढ़ रही परेशानी
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद प्रतिनिधि राघवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एम्स में प्रवेश के लिए मुख्य रूप से गेट नंबर दो का इस्तेमाल हो रहा है, जबकि कूड़ाघाट पेट्रोल पंप के सामने स्थित गेट नंबर तीन लंबे समय से बंद है।
उनके मुताबिक गेट नंबर तीन बंद होने से गोरखपुर-देवरिया मार्ग से आने वाले मरीजों और तीमारदारों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय के साथ यातायात का दबाव भी बढ़ता है।
गेट नंबर दो पर भीड़ से जाम का हवाला
राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि सुबह के समय गेट नंबर दो पर मरीजों और वाहनों की भीड़ बढ़ने से जाम की स्थिति बनती है। इसका असर ओपीडी, आईपीडी और ट्रामा-इमरजेंसी सेंटर पहुंचने वाले मरीजों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कूड़ाघाट, सिंघड़िया, रानीडीहा, एमएमएमयूटी, झंगहा, चौरी चौरा, देवरिया, सलेमपुर, भटनी, बलिया और बिहार के सीवान सहित कई क्षेत्रों से आने वाले लोगों को गेट नंबर तीन खुलने से सीधी सुविधा मिल सकती है।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
संस्था के अनुसार एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता को ई-मेल के जरिए भी गेट खोलने का अनुरोध किया जा चुका है। संस्था का कहना है कि अभी तक इस दिशा में पहल नहीं हुई है।
राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि एयरपोर्ट वीआईपी मार्ग पर स्थित गेट नंबर दो पर वीआईपी आवागमन के दौरान भी मरीजों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में गेट नंबर तीन का संचालन उपयोगी होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संस्था जनआंदोलन करेगी।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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