ड्रोन के जरिए पाकिस्तान की घुसपैठ की कोशिश नाकाम, सेना ने 237 ड्रोन किए तबाह

भारत की पश्चिमी सीमा पर साल 2025 में कुल 863 घुसपैठ दर्ज हुईं, जिनमें से भारतीय सेना ने 237 ड्रोन मार गिराए. ये ड्रोन जासूसी, हथियार और ड्रग्स तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रहे थे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत की पश्चिमी सीमा पर साल 2025 में कुल 863 घुसपैठ दर्ज हुईं, जिनमें से भारतीय सेना ने 237 ड्रोन मार गिराए. ये ड्रोन जासूसी, हथियार और ड्रग्स तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रहे थे.

भारत की पश्चिमी सीमा पर बढ़ते ड्रोन खतरे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन घुसपैठ की कुल 863 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें जम्मू-कश्मीर के इंटरनेशनल बॉर्डर पर 9 और पंजाब-राजस्थान सेक्टर में 854 घटनाएं शामिल हैं. भारतीय सेना ने काउंटर-ड्रोन सिस्टम, स्पूफर और जैमर का प्रभावी इस्तेमाल कर इस चुनौती का सामना किया. इस दौरान भारतीय सेना ने कुल 237 ड्रोन मार गिराए. ये ड्रोन जासूसी, हथियार और ड्रग्स तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रहे थे.

5 ड्रोन पर युद्ध जैसे सामान, 72 पर नशीले पदार्थ
रिपोर्ट के मुताबिक, गिराए गए 237 ड्रोनों में 5 ड्रोन पर युद्ध जैसे सामान (War-like Stores) थे. 72 ड्रोन से नशीले पदार्थ बरामद हुए जबकि बचे 161 ड्रोन बिना किसी पेलोड के थे. सीमा के आसपास ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने की कोशिश थी. सुरक्षा बलों ने इंटरनेशनल बॉर्डर के पास 2 AK-47 राइफल, 75 पिस्तौल और 281.41 किलोग्राम प्रतिबंधित सामान बरामद किया.

आशंका है कि इन सामानों को ड्रोन की मदद से सीमा पार से पहुंचाया गया था. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दुश्मन की ओर से जासूसी, हथियारों, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे अवैध कामों के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की कोशिशें बढ़ी हैं. खासकर पंजाब सेक्टर में ड्रोन का इस्तेमाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 233 UXO नष्ट
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की Counter Explosives Device Units (CEDU) की टीमों ने भी अहम भूमिका निभाई. उत्तरी कमान के ऑपरेशनल क्षेत्र में 220 Unexploded Ordnances (UXOs) यानी ऐसे बम/गोला-बारूद जो फट नहीं पाए थे, उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया. वहीं पश्चिमी कमान के क्षेत्र में 13 UXOs को सफलतापूर्वक डिस्पोज किया गया. इसके अलावा, उत्तरी कमान की टीमों ने 3 ड्रोन के मलबे को सुरक्षित तरीके से सैनिटाइज किया और आगे की तकनीकी जांच के लिए सौंपा. इन ड्रोन के वारहेड को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया.

तुर्किये में निर्मित एक ड्रोन की पहचान
इनमें से एक ड्रोन की पहचान तुर्किये में निर्मित Baykar YIHA III के रूप में हुई.पश्चिमी कमान की CEDU टीम ने तुर्की के Bayraktar TB-2 ड्रोन से गिराए गए MAM (Mini Akıllı Mühimmat) हथियारों को सुरक्षित तरीके से डिस्पोज किया. इसके अलावा टीम ने दो PL-15 मिसाइलों को भी सैनिटाइज किया.

चिल्लम फील्ड फायरिंग रेंज को किया सैनिटाइज
भारतीय सेना ने 2025 में चिल्लम फील्ड फायरिंग रेंज की सफाई और सैनिटाइजेशन का काम भी पूरा किया. करीब 1,27,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह अभियान चलाया गया. इस दौरान 29 UXOs और बड़ी संख्या में धातु के टुकड़े (splinters) बरामद किए गए. इन्हें नियंत्रित विस्फोट (Controlled Explosion) तकनीक के जरिए सुरक्षित तरीके से नष्ट किया गया.

पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशनल तैयारी मजबूत
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पश्चिमी मोर्चे पर तैनात भारतीय सेना की फॉर्मेशन ने अपनी ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रशिक्षण किया.इसके अलावा 5 से 7 फरवरी 2025 के बीच जयपुर में ऑपरेशनल चर्चाएं आयोजित की गईं.

इनमें भारतीय सेना के अलावा अन्य सेनाओं, Integrated Defence Staff (IDS), रक्षा विभाग (DoD), सैन्य मामलों के विभाग (DMA), केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और सेना के वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों ने हिस्सा लिया.इन बैठकों में पश्चिमी सीमा पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों और ऑपरेशनल तैयारियों को लेकर व्यापक चर्चा की गई.

ड्रोन वॉरफेयर बनी बड़ी चुनौती
रक्षा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पश्चिमी सीमा पर ड्रोन अब सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं. इनका इस्तेमाल केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के लिए भी किया जा रहा है.

हालांकि, भारतीय सेना के काउंटर-ड्रोन सिस्टम, जैमर और स्पूफर ने इस खतरे का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया है. 237 ड्रोन को मार गिराना इस बात का संकेत है कि पश्चिमी सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलों ने ड्रोन खतरे से निपटने के लिए अपनी क्षमता और तैयारियों को काफी मजबूत किया है.

Related Articles

Back to top button