इंजीनियर्स डे पर जानें सर विश्वेश्वरैया की कहानी, किस ब्रांच से बने इंजीनियर और क्या थे 5 बड़े काम
हर साल 15 सितंबर को नेशनल इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. यह दिन भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर मनाया जाता है. जानें उनकी इंजीनियरिंग ब्रांच और 5 बड़े काम.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: हर साल 15 सितंबर को नेशनल इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. यह दिन भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया की जयंती पर मनाया जाता है. जानें उनकी इंजीनियरिंग ब्रांच और 5 बड़े काम.
हर साल 15 सितंबर को देश में नेशनल इंजीनियर्स डे मनाया जाता है. यह दिन महान इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती के तौर पर मनाया जाता है. उन्होंने भारत में इंजीनियरिंग, सिंचाई, वाटर मैनेजमेंट और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
विश्वेश्वरैया ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और अपनी टेक्निकल नॉलेज का इस्तेमाल देश के विकास के लिए किया. उनके बनाए और सुझाए गए कई प्रोजेक्ट आज भी मिसाल माने जाते हैं. आइए जानते हैं सर एमवी कौन थे, उन्होंने किस ब्रांच से इंजीनियरिंग की और उनके पांच प्रमुख काम कौन से थे.
सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की
सर एम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर 1861 को कर्नाटक के कोलार जिले में हुआ था. बचपन से ही उनका इंटरेस्ट साइंस और तकनीकी विषयों में था. उन्होंने 1883 में पूना के साइंस कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने सरकारी सेवा में सहायक इंजीनियर के तौर पर करियर शुरू किया.
मैसूर के विकास में अहम भूमिका
विश्वेश्वरैया 1912 से 1918 तक मैसूर के दीवान रहे. इस दौरान उन्होंने एजुकेशन, इंडस्ट्री और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर जोर दिया. उनके प्रयासों के कारण मैसूर में कई महत्वपूर्ण संस्थानों और उद्योगों की स्थापना हुई. इसी वजह से उन्हें ‘मॉडर्न मैसूर का पिता’ भी कहा जाता है.
ये रहे उनके 5 बड़े काम
1. कृष्णराज सागर बांध: कावेरी नदी पर बने कृष्णराज सागर बांध के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. इससे सिंचाई और जल आपूर्ति में मदद मिली.
2. खडकवासला जलाशय: पुणे के पास खडकवासला जलाशय में उन्होंने स्वचालित वाटर फ्लडगेट्स से जुड़ी सिंचाई व्यवस्था विकसित की.
3. हैदराबाद की बाढ़ व्यवस्था: उन्होंने हैदराबाद को बाढ़ से बचाने के लिए वाटर मैनेजमेंट और ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
4. औद्योगिक विकास: उनके प्रयासों से भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क्स, मैसूर संदल ऑयल एंड सोप फैक्टरी जैसे उद्योगों को बढ़ावा मिला.
5. शिक्षा को बढ़ावा: 1917 में उन्होंने कर्नाटक में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना में अहम भूमिका निभाई, जिसे आज यूनिवर्सिटी विश्वेश्वरैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के नाम से जाना जाता है.
1955 में मिला भारत रत्न
देश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए 1955 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. ब्रिटिश सरकार ने भी उन्हें नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द इंडियन एम्पायर की उपाधि दी थी. 1962 में 102 वर्ष की उम्र में उनका निधन हुआ. उनके सम्मान में हर साल 15 सितंबर को इंजीनियर्स डे मनाया जाता है.



