गुजरात को दिल्ली बनाने की बड़ी साजिश, मोदी-शाह का प्लान एक्सपोज
गुजरात की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है... गुजरात को लेकर विपक्ष ने मोदी-शाह पर गंभीर सवाल...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः देश के प्रतिष्ठित नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का 72वां समारोह इस बार राजधानी दिल्ली में नहीं.. बल्कि गुजरात के केवड़िया में आयोजित होने जा रहा है.. सरकार की ओर से समारोह का स्थान बदलने को लेकर यह तर्क दिया गया है कि.. राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों को केवल राजधानी दिल्ली तक सीमित रखने की परंपरा को अब बदला जाना चाहिए.. सरकार का कहना है कि देश के अलग-अलग राज्यों.. और क्षेत्रों को भी ऐसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी का अवसर मिलना चाहिए.. इसी सोच के तहत इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के लिए केवड़िया को चुना गया है.. हालांकि, समारोह की जगह बदलने का फैसला सामने आते ही राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है.. विपक्ष ने इसे महज आयोजन स्थल बदलने का फैसला मानने के बजाय इसके पीछे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं..
नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स भारतीय सिनेमा के सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल हैं.. हर साल देशभर में अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों में बनने वाली फिल्मों, कलाकारों, निर्देशकों.. और तकनीकी विशेषज्ञों के उत्कृष्ट काम को इन पुरस्कारों के जरिए सम्मानित किया जाता है.. इसलिए इस समारोह का आयोजन केवल एक सामान्य सरकारी कार्यक्रम नहीं माना जाता.. बल्कि इसे भारतीय सिनेमा की विविधता.. और देश की सांस्कृतिक एकता से जोड़कर देखा जाता है.. वहीं अब जब 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को दिल्ली की जगह गुजरात के केवड़िया में आयोजित करने का फैसला किया गया है.. तो इसके राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों पहलुओं पर चर्चा तेज हो गई है.. सरकार इसे राष्ट्रीय आयोजनों के विकेंद्रीकरण की दिशा में कदम बता रही है.. जबकि विपक्ष इस फैसले को गुजरात को मिल रही कथित प्राथमिकता के संदर्भ में देख रहा है..
सरकार की दलील को समझें तो उसका कहना है कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों का आयोजन देश के अलग-अलग हिस्सों में होना चाहिए.. इससे केवल राजधानी या कुछ चुनिंदा शहरों को ही राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी का अवसर नहीं मिलेगा.. बल्कि दूसरे राज्यों और क्षेत्रों को भी देश के सामने अपनी संस्कृति, विरासत.. और पहचान को प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा.. केवड़िया को चुनने के पीछे भी इसी तरह की सोच बताई जा रही है.. गुजरात का यह क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर बड़े आयोजनों.. और पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने आया है.. सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों को अलग-अलग राज्यों में ले जाने से लोगों की भागीदारी बढ़ेगी.. और राष्ट्रीय कार्यक्रमों का दायरा भी व्यापक होगा.. लेकिन राजनीतिक विवाद यहीं से शुरू होता है.. क्योंकि विपक्ष इस फैसले को एक बड़े राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देख रहा है..
महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े उद्धव ठाकरे.. और संजय राउत ने गुजरात को लगातार मिल रही प्राथमिकता को लेकर सवाल खड़े किए हैं.. उनका तर्क है कि अगर राष्ट्रीय स्तर के आयोजन अलग-अलग राज्यों में कराने की नीति बनाई जा रही है.. तो फिर बार-बार गुजरात को ही ऐसे बड़े आयोजनों के लिए क्यों चुना जा रहा है.. विपक्ष की ओर से यह सवाल उस व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है.. जिसमें गुजरात को केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में विशेष स्थान मिलने के आरोप लगाए जाते रहे हैं.. उद्धव ठाकरे और संजय राउत की आपत्तियों के बाद नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन स्थल भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया.. अब बहस केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि पुरस्कार समारोह कहां आयोजित होगा.. बल्कि सवाल यह उठ रहा है कि राष्ट्रीय आयोजनों के लिए राज्यों का चयन किन आधारों पर किया जा रहा है..
वहीं, अभिनेता और राजनेता परेश रावल ने इस फैसले का बचाव किया है.. उनका कहना है कि गुजरात भी भारत का ही हिस्सा है.. और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का आयोजन देश के अलग-अलग राज्यों में होना चाहिए.. इस तर्क के जरिए परेश रावल ने समारोह को गुजरात में आयोजित किए जाने को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों का जवाब देने की कोशिश की है.. उनके मुताबिक अगर कोई राष्ट्रीय कार्यक्रम दिल्ली के बाहर आयोजित किया जाता है.. तो उसे केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.. भारत की पहचान सिर्फ राजधानी दिल्ली तक सीमित नहीं है.. देश के अलग-अलग राज्यों की अपनी सांस्कृतिक विरासत, कला, भाषा और परंपराएं हैं.. ऐसे में राष्ट्रीय समारोहों को अलग-अलग हिस्सों तक ले जाना देश की विविधता को सामने लाने का एक माध्यम भी हो सकता है..



