सऊदी अरब में काम करने का नियम बदला, 27 लाख भारतीयों पर बड़ा असर

सऊदी अरब में गर्मी और धूप में काम करने को लेकर लागू नियमों में बदलाव की खबर सामने आई है... इस फैसले का असर वहां काम... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सऊदी अरब में गर्मियों के मौसम में खुले आसमान के नीचे दोपहर के समय काम कराने पर लगाया गया.. मौसमी प्रतिबंध अब खत्म होने जा रहा है.. मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय यानी MHRSD और राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य परिषद के निर्देशों के अनुसार.. यह प्रतिबंध 15 सितंबर 2026 तक सख्ती से लागू है.. वहीं आज यानी 16 सितंबर से दोपहर में खुले स्थान पर काम करने की पाबंदी आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएगी.. इस बदलाव का सीधा असर सऊदी अरब में काम कर रहे लाखों प्रवासी कामगारों पर पड़ेगा.. इनमें बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है, जो निर्माण, रखरखाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक और अन्य क्षेत्रों में रोजगार कर रहे हैं..

रियाद स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक.. सऊदी अरब में करीब 2.74 मिलियन यानी 27.4 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं.. इनमें से बड़ी संख्या ऐसे कामगारों की है.. जो निर्माण, मेंटेनेंस, लॉजिस्टिक्स, फैसिलिटी मैनेजमेंट, डिलीवरी सपोर्ट.. और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं.. गर्मियों के दौरान तेज धूप और अत्यधिक गर्मी से कामगारों को सुरक्षित रखने के लिए दोपहर के समय खुले स्थानों पर काम करने पर रोक लगाई जाती है.. इस दौरान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक सीधे धूप में काम कराने की अनुमति नहीं होती.. वहीं अब यह पाबंदी खत्म होने के बाद कंपनियां अपने काम के शेड्यूल में बदलाव कर सकती हैं.. और कामगारों को नए समय के अनुसार अपनी ड्यूटी करनी पड़ सकती है..

16 सितंबर से दोपहर के समय खुले आसमान के नीचे काम करने पर लगी मौसमी पाबंदी हट जाएगी.. इसका मतलब है कि निर्माण स्थलों, सड़कों, रखरखाव और अन्य आउटडोर कार्यों में लगे कर्मचारियों की ड्यूटी का समय पहले की तरह निर्धारित किया जा सकता है.. हालांकि, कंपनियों को कामगारों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा.. प्रतिबंध खत्म होने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है.. कि नियोक्ता कामगारों को असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर कर सकते हैं.. अत्यधिक गर्मी की स्थिति में सुरक्षा उपायों को लागू करना.. और कर्मचारियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना नियोक्ताओं की जिम्मेदारी बनी रहेगी..

वहीं इस बदलाव के बाद भारतीय कामगारों को अपनी ड्यूटी के नए शेड्यूल पर खास ध्यान देना होगा.. जिन कर्मचारियों की ड्यूटी अब दोपहर के समय निर्धारित की जाएगी.. और उन्हें अपने आने-जाने के समय और काम के घंटों की सही जानकारी रखनी चाहिए.. इसके अलावा ओवरटाइम से जुड़े नियमों को भी समझना जरूरी होगा.. किसी कर्मचारी से अतिरिक्त समय तक काम कराया जाता है.. तो उसके लिए लागू श्रम कानूनों और रोजगार अनुबंध के प्रावधानों का पालन करना होगा.. केवल मौसमी प्रतिबंध हटने के आधार पर किसी कंपनी को कर्मचारी की निर्धारित सैलरी.. या अन्य कानूनी अधिकारों में मनमाने तरीके से कटौती करने की अनुमति नहीं मिल जाती.. कामगारों को अपने रोजगार अनुबंध और कंपनी की नीतियों की जानकारी रखनी चाहिए..

मंत्रालय की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि.. मौसमी प्रतिबंध समाप्त होने के बाद भी कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. सभी नियोक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण बनाए रखें.. खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां कामगारों को लंबे समय तक खुले स्थान पर काम करना पड़ता है.. वहां गर्मी से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम किए जाने चाहिए.. साफ और पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध होना चाहिए.. कामगारों को आराम करने के लिए उचित छांव वाली जगह मिलनी चाहिए.. इसके साथ ही, काम की प्रकृति के अनुसार आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण यानी PPE किट उपलब्ध कराना भी नियोक्ता की जिम्मेदारी है..

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं पर होने वाला खर्च कामगारों की सैलरी से नहीं काटा जा सकता.. यानी अगर किसी कर्मचारी को उसके काम के लिए हेलमेट, सुरक्षा जूते, दस्ताने, मास्क, सुरक्षा जैकेट या अन्य जरूरी PPE की आवश्यकता है.. तो कंपनी को कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था के तहत इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी.. कामगारों की सुरक्षा किसी भी स्थिति में केवल कर्मचारी की निजी जिम्मेदारी नहीं है.. नियोक्ता को भी यह सुनिश्चित करना होता है कि.. काम के दौरान कर्मचारियों को संभावित जोखिमों की जानकारी हो.. और उनसे बचने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए..

सऊदी अरब जैसे गर्म जलवायु वाले देश में हीट स्ट्रेस यानी अत्यधिक गर्मी से होने वाली परेशानी कामगारों के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है.. खासकर वे कर्मचारी जो लगातार कई घंटे धूप में या गर्म वातावरण में काम करते हैं.. और उन्हें अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है.. अगर किसी भारतीय कामगार को काम के दौरान चक्कर आने लगें, असामान्य कमजोरी महसूस हो, अत्यधिक थकान हो, मांसपेशियों में ऐंठन हो या शरीर गर्मी से परेशान महसूस करे.. तो उसे इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.. ऐसे लक्षण महसूस होने पर तुरंत अपने सुपरवाइजर को जानकारी देनी चाहिए.. और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सहायता लेनी चाहिए.. समय पर मदद मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है..

 

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