वोट-सरकार के बाद अब पार्टी चोरी’, राहुल गांधी ने BJP-EC को जमकर घेरा!

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न- BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में जो हो जाए वही कम है। इस सरकार में ये चलन चल रहा है कि खुद के विकास के नाम पर सिर्फ जुलमलेबाजी करनी है लेकिन जो विपक्षी दल जनता के विकास की बात करते हैं सरकार से सवाल करते हैं उन्हें ये सत्ताधारी लोग कमजोर कर देते हैं।

कभी विपक्षी दल के नेताओं को अपने दल में मिलाकर तो कभी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर। खैर ऐसा ही कुछ चल रहा है इन दिनों बंगाल की सियासत में। दरअसल भाजपा सरकार बंगाल से पूर्व सीएम ममता का अस्तित्व खत्म करना चाहती है।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश पर अपना जवाब भेज दिया है। ममता बनर्जी पार्टी की संस्थापक और अध्यक्ष हैं। निर्वाचन आयोग ने छह अक्तूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल के उपचुनावों के लिए अस्थायी तौर पर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस नाम और उसके ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को हटा दिया था।

पार्टी ने बीते रोज रात 11:36 बजे निर्वाचन आयोग को ईमेल किया। इसमें आगामी चुनाव के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प भेजे गए। जिसके बाद पार्टी ने यह जवाब ‘कड़े विरोध के साथ’ दिया। बता दें कि निर्वाचन आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया था। इसमें एआईटीसी को लेकर चल रहे विवाद में दोनों पक्षों को पार्टी का नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था। दोनों पक्षों से आज सुबह तक अपने पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न बताने को कहा गया था।

वहीं इस मामले को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। भले ही सरकार चाल चल रही हो लेकिन विपक्ष पूरी तरह से ममता बनर्जी के साथ है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर निर्वाचन आयोग की अंतरिम रोक को लेकर भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में विपक्षी राजनीतिक दलों को कमजोर करने का एक पैटर्न दिखाई दे रहा है और हर बार भाजपा तथा चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठते हैं।

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न- BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों से पहले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिन्ह ‘फूल और घास’ के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयोग ने पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्ह चुनने का निर्देश दिया है।

इसके साथ ही राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने लिखा, “जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी- ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।”

कांग्रेस नेता ने निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग का काम जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन दुर्भाग्य से वह उन ताकतों की मदद करता दिखाई दे रहा है, जो जनता के फैसले को पलटने का काम कर रही हैं।

उन्होंने यह बात स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की नहीं है। उन्होंने कहा कि यह देश के प्रत्येक राजनीतिक दल और मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। उन्होंने लिखा, “यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।”

राहुल गांधी का यह बयान विपक्षी दलों के बीच चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर जारी बहस के बीच आया है। कांग्रेस और बाकी विपक्षी दल पहले भी निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग का कहना है कि टीएमसी के मामले में कार्रवाई पार्टी के भीतर विवाद और दो गुटों द्वारा पार्टी के नाम तथा चुनाव चिन्ह पर दावा किए जाने के कारण की गई है।

साथ ही राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में महाराष्ट्र की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले इन दोनों दलों में विभाजन के बाद पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद सामने आया था। अब इसी तरह की स्थिति तृणमूल कांग्रेस में पैदा हुई है। राहुल गांधी ने साफ़ तौर पर आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक ही रणनीति के तहत राजनीतिक दलों को कमजोर कर रहे हैं।

वहीँ चुनाव आयोग के फैसले पर बागी गुट खुश है. चुनाव आयोग के फैसलों के बाद टीएमसी की बागी सांसद और अभिनेत्री सायोनी घोष ने भी इशारों में वार किया है. उन्होंने एक्स पोस्ट में शहाब जाफ़री के शेर की आधी लाइन शेयर की. उन्होंने लिखा, ”तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि क़ाफ़िला क्यूँ लुटा …..”

वहीं इसके साथ ही मंत्री दिलीप घोष ने ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को लेकर जमकर निशाना साधा. उन्होंने पार्टी के आपसी मतभेदों को लेकर तंज कसा और कहा कि अब ममता बनर्जी पूरी तरह से अकेली पड़ चुकी हैं. दिलीप घोष ने कहा कि टीएमसी के नेता आपस में ही लड़ाई करके खत्म हो जाएंगे. जनता उनको पहले ही नकार चुकी है. उन्होंने कहा कि उनका का अकाउंट फ्रीज हो चुका है. टीएमसी दफ्तर को लेकर घोष ने कहा कि उन्होंने किसी के घर पर कब्जा करके उसे ऑफिस बना रखा था अब उसे भी तोड़ दिया गया है.

आपको बता दें कि आयोग का एक आदेश मई में विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल में शुरू हुई बगावत की पृष्ठभूमि में आया है। बाद में यह बगावत संसद तक पहुंच गई। जून में 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष चुन लिया। ममता खेमे ने सोवनदेव चट्टोपाध्याय को अपना उम्मीदवार बनाया था।

विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतब्रत को मान्यता भी दे दी। यह पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुआ, जब पार्टी दो हिस्सों में बंटी। पांच दिन बाद बगावत संसद तक पहुंच गई। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लोकसभा के 20 सांसद एक कम चर्चित दल एनसीपीआई के साथ चले गए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा। इसमें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को ‘अलग गुट’ के तौर पर समर्थन देने की बात कही गई। इससे पार्टी के संसदीय दल में दरार और गहरी हो गई।

ऐसे में यह कदम ममता बनर्जी के लिए झटका माना जा रहा है। पार्टी के गठन के बाद से ही उनका हाथ से बनाया हुआ चुनाव चिह्न टीएमसी की राजनीतिक यात्रा का अहम हिस्सा रहा है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की गई थी। इसके बाद ‘फूल और घास’ का चुनाव चिह्न पिछले 28 वर्षों से पार्टी की जमीनी पहचान का एक मजबूत प्रतीक रहा है।

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