हाईकोर्ट ने लगाई एसबीआई को लताड़
अदालत बोली- पति के लोन की वसूली के लिए विधवा पत्नी की एफडी नहीं तोड़ सकता बैंक,

पत्नी को एक लाख रुपये का मुआवजा भी देने का आदेश
एसबीआई की ये कार्रवाई बैंकिंग नियमों का घोर उल्लंंघन
वरिष्ठ अधिवक्ता हैदर ने किया निर्णय का स्वागत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि बैंक मृतक पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए विधवा पत्नी की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को नहीं तोड़ सकता। कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की इस कार्रवाई को बैंकिंग नियमों का घोर उल्लंघन और चोरी-छिपे किया गया काम बताया है।
उधर इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के वकील सैयद मोहम्मद हैदर ने बढिय़ा फै सला बताया है। उन्होंने कहा कि इससे निराश्रित महिला को संरक्षण मिलेगा। बता दें लखनऊ बेंच ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा मृतक पति के व्यक्तिगत ऋण की वसूली के लिए उसकी विधवा पत्नी की फिक्स डिपाजिट (एफडी) से 19.9 लाख रुपये डेबिट करने की कार्रवाई को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने बैंक को पूरी रकम एफडी की लागू ब्याज दर के साथ चार सप्ताह में वापस करने का आदेश एसबीआई को दिया है। इसके साथ ही पत्नी को एक लाख रुपये का मुआवजा भी देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने बैंक के खिलाफ गंभीर टिप्पणी भी की और इस कार्रवाई को बैंकिंग प्रक्रिया का घृणित उल्लंघन करार दिया है। न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश नेहा मिश्रा की याचिका स्वीकार को करते हुए दिया। उनके पति लखनऊ के रिंग रोड स्थित मेडिसिन अस्पताल में सहायक प्रोफेसर थे। उन्होंने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया था। कोर्ट ने पाया कि नेहा मिश्रा न तो ऋण की सह-आवेदक थीं और न ही गारंटर अथवा क्षतिपूर्तिकर्ता या नामिनी। ऋण लेनदेन में उनका बैंक के साथ कोई संविदात्मक संबंध भी नहीं था।

कोर्ट ने गुपचुप की गई कार्रवाई बताया
न्यायालय ने यह भी उल्लेेख किया कि ऋण बीमा पॉलिसी से कवर था, जिसके लिए मृतक ने कथित तौर पर 8,803 रुपये प्रीमियम का भुगतान भी किया था। खंडपीठ ने इस पूरी प्रक्रिया को गुपचुप तरीके से की गई कार्रवाई बताते हुए कहा कि एसबीआई यह बताने में विफल रहा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत वह पति के कर्ज की वसूली के लिए उसकी पत्नी के खाते से सीधे रकम काट सकता है।
कोविड से हुई थी पति की मौत
दरअसल याची के पति की मई 2०21 में कोविड से मृत्यु के बाद एसबीआई ने सितंबर 2०25 में नेहा मिश्रा को कानूनी नोटिस भेजकर 13.87 लाख रुपये के बकाया ऋण का भुगतान करने को कहा। इसके बाद बैंक ने उनका वेतन खाता भी रोक दिया। आरबीआई लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद ही खाते पर लगी रोक हटाई गई।
बैंक ग्राहकों के धन के संरक्षक
हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों के धन के संरक्षक होते हैं और उसे ट्रस्ट के रूप में रखते हैं। यदि एसबीआई कानूनन मृतक के कर्ज की वसूली उसकी पत्नी से उत्तराधिकारी के रूप में करने का हकदार था, तब भी इसके लिए विधि सम्मत प्रक्रिया अपनानी जरूरी थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी वसूली मनमाने, स्वेच्छाचारी और अनियमित तरीके से नहीं की जा सकती।
दीया जलाना हिन्दू धर्म का अपमान : सौरव दास
सीजेपी के नेताने भाजपा पर किया प्रहार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आशीर्वाद का दीया जलाने की अपील पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने एक और बयान जारी है। दास ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह हिन्दू धर्म का अपमान था।
दास ने यह भी दावा किया कि लोगों ने इसे खारिज कर दिया है। दास ने लिखा कि कल दीया जलाने के कैंपेन को भारत के लोगों ने बुरी तरह नकार दिया। और सही भी किया! उन्होंने लिखा कि लोगों को बेरोजगारी, नौकरी पैदा करने, पेपर लीक, शिक्षा में सुधार, खाने और पेट्रोल में मिलावट, वायु प्रदूषण, भ्रष्ट जजों वगैरह पर जवाब चाहिए। न कि किसी नेता के जन्मदिन पर सनकी लोगों की तरह दीये जलाना! दास ने लिखा कि यह न भूलें कि यह हिन्दू धर्म का अपमान भी था।
किसी भी हिन्दू या किसी भी धर्म को मानने वाले व्यक्ति को ऐसे पवित्र दीये और आरती किसी इंसान को नहीं, बल्कि सिर्फ़ अपने भगवान को अर्पित करनी चाहिए। सीजेपी नेता ने लिखा कि हमेशा सत्ता में बने रहने की चाहत में, इस सरकार और इसके अंधभक्तों ने एक आम इंसान को अमर बनाने की कोशिश की है। दूसरे शब्दों में कहें तो, उन्हें भगवान के बराबर बताने की कोशिश की है।
बता दें केवल दिल्ली में पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान के तहत बृहस्पतिवार को यहां कर्तव्य पथ पर दीपक जलाए गए। अधिकारियों ने बताया कि कर्तव्य पथ मिट्टी के लगभग 1.25 लाख दीयों से जगमगा उठा। वहां मिट्टी के कई दीयों का इस्तेमाल करके ‘आशीर्वाद का दीया’ शब्द बनाए गए था।
निठारी कांड में बरी हुए सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश स्थित गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला है। आरोपी का शव हरिद्वार में मिला है। घटना उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर के सामने की बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, कोली पिछले कुछ दिनों से यहां चाय की दुकान चला रहा था। इसी चाय की दुकान में रस्सी के सहारे उसका शव लटका मिला। सूचना मिलते ही सप्तऋषि पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के ग्राम मंगरुखाल निवासी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। सुरेंद्र कोली दिसंबर 2025 में जेल से रिहा हुआ था।
न्यायाधीश संग अन्याय हो तो वह कहां जाए : रवि कुमार दिवाकर
23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने बृहस्पतिवार को एनडीपीएस एक्ट के 1० साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए न्याय व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए।
अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी अशोक भारत को दोषमुक्त करार दिया। फैसले में न्यायाधीश ने लिखा कि न्यायाधीश का काम न्याय करना होता है। यदि उसी के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाला न्यायाधीश क्या जिला जज के ऐसे आदेशों को मानने के लिए बाध्य है, जो विधि के विपरीत हों। बृहस्पतिवार को अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के 10 साल पुराने मामले में अशोक भारत को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। फैसले में अदालत ने फिल्म दामिनी के तारीख पर तारीख वाले संवाद का भी उदाहरण् ा दिया। न्यायाधीश ने कहा कि एक बेकसूर व्यक्ति को न्याय हासिल करने में लंबा समय लगा। इसी फैसले में उन्होंने अपनी अदालत से 18 अगस्त को ट्रांसफर की गई हत्या के मामलों की 97 पत्रावलियों को लेकर भी सवाल उठाए। फैसले में कहा गया कि तत्कालीन जनपद न्यायाधीश ने 18 अगस्त को एक ही तरह के कुल नौ आदेश पारित किए थे। इन आदेशों के माध्यम से अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी कोर्ट संख्या-3, मुजफ्फरनगर में विचाराधीन पत्रावलियों को विधि के अनुसार निस्तारण के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुजफ्फरनगर की अदालत में रिकॉल किया गया।
रिटायरमेंट से 13 दिन पहले रिकॉल पर सवाल
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि इन 97 पत्रावलियों को तत्कालीन जनपद न्यायाधीश ने अपने न्यायालय में अपने रिटायरमेंट से मात्र 13 दिन पहले रिकॉल किया था। फैसले में यह भी कहा गया कि पत्रावलियों को रिकॉल करने का कोई कारण नहीं बताया गया।
सफाई व्यवस्था को लेकर एलएसए कंपनी पर लापरवाही का आरोप
मुख्यमंत्री के रूट पर दिखी अंधेरगर्दी, 1090 चौराहे से डालीगंज रेलवे पुल तक मुख्य मार्गों पर सफाई व्यवस्था को लेकर उठे सवाल, नगर निगम के सरकारी कर्मचारियों को संभालनी पड़ी जिम्मेदारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित रूट पर सफाई व्यवस्था को लेकर एलएसए कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि 1090 चौराहे से लेकर डालीगंज रेलवे पुल तक मुख्य मार्गों पर अपेक्षित सफाई व्यवस्था नहीं कराई गई। स्थिति यह रही कि सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए नगर निगम को अपने सरकारी कर्मचारियों को मौके पर उतारकर सडक़ों की सफाई करानी पड़ी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और सफाई व्यवस्था की निगरानी की। उनके साथ जोन-1 के जोनल अधिकारी ओम प्रकाश सिंह, जोनल सेनेट्री ऑफिसर कुलदीपक, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक संजीव कुमार, राहुल वाल्मीकि समेत नगर निगम के सुपरवाइजर भी मौके पर पहुंचे और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी संभाली।बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का जिम्मा एलएसए कंपनी के पास है। ऐसे में नगर निगम के सरकारी कर्मचारियों को मुख्य मार्गों की सफाई के लिए मौके पर उतरना पड़ा, जिससे कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम से संबंधित कंपनी को किए जाने वाले भुगतान और उसके एवज में अपेक्षित सफाई व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नगर आयुक्त गौरव कुमार की नाराजगी के बाद कंपनी के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई तेज किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के मद्देनजर जिस मार्ग से आवागमन प्रस्तावित था, वहां समय रहते सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने पर नगर निगम को तत्काल अपने कर्मचारियों की मदद लेनी पड़ी। मौके पर अपर नगर आयुक्त समेत अधिकारियों की मौजूदगी में सफाई कराई गई। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि जब मुख्य मार्गों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी को दी गई है, तो मुख्यमंत्री के रूट पर नगर निगम के सरकारी कर्मचारियों को सफाई के लिए क्यों उतरना पड़ा। अब देखना होगा कि नगर निगम इस मामले में संबंधित कंपनी की जवाबदेही तय करने के लिए क्या कार्रवाई करता है।
नीतीश की बैठक में नहीं पहुंचे ललन सिंह
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। नीतीश कुमार की आज (18 सितंबर) की बैठक में जेडीयू में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले ललन सिंह शामिल नहीं हुए। ललन सिंह की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ललन सिंह की अनुपस्थिति पर विधायकों ने सवाल उठाए। जब जेडीयू विधायक विनय चौधरी से इसको लेकर सवाल पूछा गया तो वह खुलकर कुछ नहीं बोले। बस इतना कहा कि अपने मंत्रालय के काम में व्यस्त होंगे। ललन सिंह की गैरमौजूदगी पर आरजेडी ने बड़ा दावा कर दिया। आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि जेडीयू में सब कुछ ठीक नहीं है। पार्टी में नूरा कुश्ती चल रही है। उन्होंने कहा कि ये विस्फोटक रूप लेगा और पार्टी में बड़ी टूट होगी।



