रोजाना 5-7KM दौड़ना,फिर भी दिल में स्टेंट की पड़ी जरूरत…जानिए विस्तार सें
वर्कआउट कर रहे हैं, बैलेंस डाइट लेते है. खुद को पूरी तरह से फिट महसूस कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी दिल से जुड़ी दिक्कत हो रही है. इसके पीछे खराब नींद वजह हो सकती है. एक ऐसा ही केस डॉक्टर ने बताया है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: वर्कआउट कर रहे हैं, बैलेंस डाइट लेते है. खुद को पूरी तरह से फिट महसूस कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी दिल से जुड़ी दिक्कत हो रही है. इसके पीछे खराब नींद वजह हो सकती है. एक ऐसा ही केस डॉक्टर ने बताया है.
खानपान अच्छा होने के साथ ही रोज कई किलोमीटर की दौड़ करने के बावजूद किसी को अगर हार्ट से जुड़ी समस्या हो और वो भी दो बार स्टेंट पड़वाना पड़े तो सवाल आता है कि ऐसा क्यों? दरअसल एक ऐसा ही केस है जिसमें एक व्यक्ति को 45 साल की उम्र में दो बार हार्ट में स्टैंट की जरूरत पड़ी, जबकि वो रोजाना 5 से 7 किलोमीटर दौड़ करता था और डाइट भी अच्छी ले रहा था. आज के समय में ऐसे बहुत सारे मामले देखने में आते हैं जहां पर लोग वर्कआउट से लेकर बैलेंस मील ले रहे होते हैं, फिर भी उनको दिल से जुड़ी दिक्कतें हो जाती हैं. दरअसल इन सबके बावजूद एक ऐसी चीज है जो जिसे हम सब नजरअंदाज करते हैं. इससे हमारे हार्ट पर असर पड़ सकता है।
हेल्दी खानपान और डेली वर्कआउट के अलावा भी हमें अपने रुटीन में छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि यही चीजें कई बार हमारी सेहत पर भारी पड़ती हैं. बहुत सारे लोग मॉर्निंग रूटीन का तो ध्यान रखते हैं, लेकिन नाइट रूटीन को इग्नोर कर देते हैं. जबकि दिनभर की थकान, टूटफूट को रीसेट करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप पर्याप्त आराम करें.
डॉक्टर ने साझा किया केस
एमबीबीएस, डीएनबी रेडियोडायग्नोसिस डॉ. हर्ष व्यास, ने एक 45 साल के व्यक्ति का केस बताया है जिसमें उसे दो कोरोनरी स्टेंट डालने की जरूरत पड़ी. उन्होंने वीडियो में बताया कि वो व्यक्ति रोज 5-6 किलोमीटर दौड़ करने के साथ ही बैलेंस डाइट भी ले रहा था, लेकिन उसने एक चीज पर ध्यान नहीं दिया और वो था उसका स्लीप पैटर्न, वो रोजाना महज 5 से 6 घंटे की नींद ही लेता था और उसकी जॉब भी बहुत स्ट्रेस फुल थी.
अच्छा खानपान और एक्सरसाइज काफी नहीं
डॉ. हर्ष व्यास ने इस मामले को बताते हुए ये भी कहा कि कितनी भी अच्छी डाइट ले लीजिए, कितनी भी अच्छी एक्सरसाइज कर लीजिए, पर दिनभर आपकी बॉडी पर जो स्ट्रेस पड़ा है, जो मॉलिक्यूलर लेवल पर डैमेज हुए है, उसको रिपेयर करने के काम तभी होता है जब आप गहरी नींद में सो रहे होते हैं. तो अगर आप ओवरऑल स्लीप कम लेते हैं तो हमारे शरीर का रिपेयर मैकेनिज्म रिस्टम है वो उतना सही से काम नहीं कर पाता है. इस वजह से ये डैमेज एक्यूम्यूलेट होता रहता है और यही किसी बीमारी के रूप में बाहर आता है, इसलिए अच्छा खाना या एक्सरसाइज पर जितना फोकस कर रहे हैं उतना ही अपनी नींद पर भी करना चाहिए.
नींद की टाइमिंग का भी रखें ध्यान
डॉक्टर व्यास ये भी कहते हैं कि रोजाना कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी ही चाहिए और इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए कि आप रोजाना जिस समय सो रहे हैं उसे सही रखें. कुछ मिनट या आधे घंटे का गैप हो सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा फर्क होता है तो सेहत को नुकसान पहुंचता है. जैसे मान लीजिए आप आज 10 बजे सोते हैं कल 12 बजे अगले दिन 1 बजे तो ऐसे बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए.
नींद पर कई रिसर्च भी हैं
अच्छी नींद और सेहत से इसके कनेक्शन को लेकर कई स्टडी भी की जा चुकी हैं. एनआईएच के सहयोग से हुए एक शोध में अपर्याप्त नींद को हृदय गति (हार्ट बीट रेट) में परिवर्तन और नॉरपेनेफ्रिन के उच्च स्तर से जोड़ा गया है, नॉरपेनेफ्रिन एक स्ट्रेस हार्मोन है जो रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को बढ़ा सकता है. एनआईएच की एक और स्टडी है जिसमें पाया गया कि नींद के बहुत ज्यादा अनियमित होने पर हृदय संबंधी रोगों के अधिक जोखिम से जुड़े थे.



