SIR विवाद पर पूर्व जस्टिस का बड़ा बयान, बोले- सुप्रीम कोर्ट वापस ले अपना फैसला

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कानूनी बहस एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गोपाल गौड़ा ने SIR को बरकरार रखने वाले फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कानूनी बहस एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गोपाल गौड़ा ने SIR को बरकरार रखने वाले फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उनके आरोपों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने मामले में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया, जिससे अदालत के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। उन्होंने सुझाव दिया है कि ऐसी परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट को खुद संज्ञान लेकर अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

पूर्व न्यायाधीश ने SIR संबंधी फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में ‘अवैधता और असंवैधानिकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. जस्टिस गौड़ा के मुताबिक, यदि यह सामने आता है कि SIR का फैसला चुनाव आयोग के पूर्ण गठन की सहमति और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं लिया गया था, तो सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने पूर्व फैसले की समीक्षा या उसे वापस लेने का गंभीर आधार बन सकता है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला रद्द होना चाहिए

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने गुरुवार को कहा कि चुनाव आयोग के एसआईआर की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए, क्योंकि यह गैर-कानूनी, गैर-संवैधानिक और अलोकतांत्रिक है. पूर्व न्यायाधीश ने यह भी कहा कि शीर्ष अदालत को चुनाव आयोग से सभी दस्तावेज मंगाने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एसआईआर का निर्णय दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति और मंजूरी से लिया गया था या नहीं.

पूर्व न्यायाधीशों के एक समूह ने SIR का किया बचाव

उनकी यह टिप्पणी उसी दिन आई, जब 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक समूह ने एसआईआर का बचाव करते हुए इसे कानूनी प्रक्रिया बताया था.न्यायमूर्ति गौड़ा ने बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में कहा, एसआईआर की संवैधानिक वैधता को सही ठहराने वाला सुप्रीम कोर्ट का 27 मई का फैसला गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणी का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने के खिलाफ आवाज उठाकर उन्होंने कोई न्यायिक मर्यादा नहीं तोड़ी है. न्यायमूर्ति भुइयां ने रविवार को कहा था कि लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है.

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