देश में अघोषित आपातकाल!

जल,थल,नभ सभी जगह पुलिस का पहरा

  • सीजेपी नेताओं को पुलिस ने विमान में ही दबोचा, जंतर मंतर पर प्रर्दशनकारी गिरफ्तार
  • ध्रुव राठी भी पुलिस के घेरे में, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर रद्र करने की मांग पर आर पार
  • वोट का हिसाब मांगा तो मिला पुलिस का पहरा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नयी तस्वीर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कभी देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने के लिए जनता सड़क पर उतरी जेल गयी लाठियां खायी और फांसी के फंदे चूम लिए उसी देश में आज युवा अपने वोटों का हिसाब मांगने निकलें तो उनका रास्ता रोक लिया गया।
चुनाव आयोग से सवाल पूछें तो पुलिस पीछे पड़ गयी। दिल्ली पहुंचने के लिए हवाई जहाज में बैठें तो मंजिल पर उतरने से पहले ही डिटेन कर लिये गये। जंतर मंतर पर अपनी बात रखने के लिए पहुंचे तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

भाजपा चुनाव आयोग का इस्तेमाल गरीबों के अधिकार छीनने कर रही : हरपाल सिंह चीमा

पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने गरीबों को वोट देने का अधिकार दिलाने के लिए एक बड़ा संघर्ष किया था। आज मेरा मानना है कि भाजपा चुनाव आयोग का इस्तेमाल गरीबों के अधिकार छीनने और उन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित करने के लिए कर रही है। अब यह पूरा मामला जनता के सामने आ गया है। सीजेपी पूरे देश में प्रदर्शन कर रही है। उनकी मांग है कि सीईसी को तुरंत हटाया जाए और उन पर मुकदमा दर्ज किया जाए।

आज की सुबह अजब नजारा

आज की सुबह देश की राजधानी से जो तस्वीरें सामने आयी है उसने इस सवाल को और बड़ा कर दिया है कि क्या देश अघोषित आपतकाल की तरफ आगे बड़ गया है। क्या देश में आंदोलन करना और सवाल पूछना गुनहा है। क्या इस तरह का आंदोलन पहली बार हो रहा है सवाल अनगित है और सबके उत्तर एक है कि हां इस महौल को देखकर तो यही लग रहा हैकि सरकार से सवाल पूछना अब टेढ़ी खीर बन चुका है। क्योंकि आज के आंदोलन के लिए जैसे ही कॉकरोच जनता पार्टी नेता अभिजीत दिपके और उनके साथी सौरव दास और आशुतोष रांका फलाइट से दिल्ली पहुंचते हैं तो उन्हें फ्लाइट के भीतर ही डिटेन कर लिया जाता है। जैसे ही सीजेपी के कार्यकर्ता जंतर मंतर पहुंचते हैं उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। जरा सोचिए अभी आंदोलन शुरू भी नहीं हुआ था नारे गूंजे भी नहीं थे मंच सजा भी नहीं और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को रास्ते में ही रोकने की नौबत आ गई। दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली। राजधानी में भारी पुलिस बल तैनात हुआ। मेट्रो के 47 स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद किए गये। रेल यातायात पर रोक और आवाजाही में बाधाओं ने आम लोगों को घरों के भीतर रहने के लिए मजबूर कर दिया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए देश के अलग अलग हिस्सों में पुलिस ने कार्रवाई की। सवाल सिर्फ दिल्ली का नहीं है मुंबई में भी महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने अगस्त क्रांति मैदान पर आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन का आह्वान किया था। वहां भी पुलिस की अनुमति को लेकर विवाद खड़ा हुआ। अलग अलग शहरों में एक ही सवाल गूंज रहा है क्या सरकार को अपने खिलाफ उठने वाली आवाज से इतना डर लगने लगा है कि आंदोलनकारियों को दिल्ली पहुंचने से पहले ही रोकना जरूरी हो गया?

प्रदर्शन करना हमारा अधिकार : आराधना मिश्रा

उत्तर प्रदेश कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने जंतर मंतर पर कॉकरोच पार्टी के विरोध प्रदर्शन और राहुल गांधी के छात्रों की गूंज अभियान समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि हमारा संविधान हर राजनीतिक दल और संगठन को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार देता है। राजनीतिक दलों और संगठनों की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपनी राय रखें और सरकार को उसकी गलत नीतियों के लिए जवाबदेह ठहराएं। यदि कोई शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन कर रहा है उसको रोकना लोकतंत्र के खिलाफ है। हालांकि आज ट्रेन रद्द कर दी गई हैं टोल पर गाडय़िां रोकी जा रही हैं और लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। आराधना मिश्रा ने कहा चेन्नई में राहुल गांधी का छात्रों की गूंज कार्यक्रम है। पहले से तय कार्यक्रम में हमारे सभी वरिष्ठ नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इंडी गठबंधन के राष्ट्रपति से मुलाकात पर आराधना ने कहा मैं इंडी गठबंधन के उस प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों को बधाई देती हूं जो कल राष्ट्रपति से मिलने गए थे। जिस तरह से बातचीत सकारात्मक रही और जैसा कि मल्लिकार्जुन खडग़े, राहुल गांधी और अन्य सांसदों ने बाहर आकर बताया।

मुददा आंदोलन का नहीं मुद्दा वोट का है

यहां मुद्दा किसी एक पार्टी किसी एक नेता या किसी एक आंदोलन का नहीं है। मुद्दा उस वोट का है जिसके दम पर सरकारें बनती हैं एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने जोडऩे और जांच की प्रक्रिया पर गंभीर राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्ष और आंदोलनकारी चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से इस पूरी प्रक्रिया को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। लेकिन सवाल पूछने का अधिकार तो खत्म नहीं हो सकता। आप नेता इसे अघोषित आपातकाल बता रहे हैं। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर रद्द करने की मांग का जवाब देने के बजाय सरकार आंदोलन को रोकने में जुट गई है। और यही इस कहानी का सबसे बड़ा विस्फोट है अगर सब कुछ ठीक है तो सवालों से इतनी बेचैनी क्यों अगर चुनावी व्यवस्था पर भरोसा है तो नौजवानों को अपनी बात कहने देने में परेशानी क्या है?

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