गुजरात के भुज में सड़क हादसे में गई थी पांच मजदूरों की जान, शव पहुंचते ही परिवारों में मचा कोहराम

बिंद्रा पुरवा निवासी संदीप परिवार का इकलौता बेटा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह परिवार का पेट पालने के लिए गुजरात में मजदूरी करता था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जिन घरों में अपनों की वापसी का इंतजार था, रविवार की सुबह वहां पांच अर्थियां पहुंचीं तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई। सुबह करीब चार बजे गुजरात के भुज में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले पांच मजदूरों के शव एंबुलेंस से गांव पहुंचे। अपनों के शव देखते ही परिजन बिलख पड़े।

किसी के सिर से पिता का साया उठ गया, तो किसी की नई-नवेली जिंदगी शुरू होने से पहले ही उजड़ गई। किसी पिता का बेटी की शादी कराने का सपना अधूरा रह गया, तो कहीं तीन मासूम बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए। पांच परिवारों का सहारा छिनने से पूरे इलाके में मातम पसरा है।

गुरुवार देर रात गुजरात के कच्छ जिले के भुज में हुए सड़क हादसे में रामपुर मथुरा थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत खनेवा मितौरा के खनेवा निवासी देशराज (40) पुत्र सर्वजीत, बिंद्रा पुरवा निवासी संदीप (35) पुत्र होलीराम और कुलदीप (22) पुत्र रामकुमार की मौत हो गई थी। इनके अलावा ग्राम पंचायत दहला धौरहरा निवासी वीरेश (35) पुत्र जगदेव और अनिल (26) पुत्र रामपाल ने भी हादसे में जान गंवा दी थी।

शवों को गांव पहुंचाने के लिए सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने मुख्य सचिव संजय प्रसाद और जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. से भी बातचीत कर पार्थिव शरीर गांव पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कराने का अनुरोध किया था। रविवार सुबह शव गांव पहुंचे तो परिवारों का दर्द देखकर हर आंख नम हो गई।

तीन मासूम बेटों के सिर से उठा संदीप का साया

बिंद्रा पुरवा निवासी संदीप परिवार का इकलौता बेटा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह परिवार का पेट पालने के लिए गुजरात में मजदूरी करता था। उसका घर भी कच्चा है। पीछे तीन बेटे छूट गए हैं, जिनकी परवरिश और पढ़ाई की जिम्मेदारी अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए संदीप ने करीब एक साल पहले दूसरे नंबर के बेटे के इलाज के लिए ग्रामीण बैंक से तीन लाख रुपये का कर्ज लेकर केसीसी कार्ड बनवाया था। बच्चों का भविष्य संवारने और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद लेकर वह परदेस गया था, लेकिन अब कभी लौटकर नहीं आएगा। जिन बच्चों के लिए वह दिन-रात मेहनत करता था, उन्हीं के सिर से पिता का साया उठ गया।

पांच महीने पहले हुई थी शादी, उजड़ गया कुलदीप का सुहाग

22 वर्षीय कुलदीप की शादी महज पांच महीने पहले हुई थी। अभी पत्नी का गौना भी नहीं आया था। नई जिंदगी के सपने देख रही पत्नी पर पति की मौत की खबर ने दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। जिस घर में कुछ महीने पहले शादी की खुशियां गूंजी थीं, वहां अब मातम पसरा है। कुलदीप की मौत से परिवार की खुशियां पलभर में बिखर गईं।

बेटी के हाथ पीले करने का सपना अधूरा छोड़ गया देशराज

खनेवा निवासी देशराज परिवार का सहारा था। उसके दो बेटे और एक बेटी है। बेटी की शादी की उम्र हो गई थी। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने और बेटी के हाथ पीले करने के लिए वह गुजरात में मजदूरी कर रहा था। लेकिन हादसे ने उसका यह सपना अधूरा छोड़ दिया। अब परिवार के सामने बेटी की शादी और घर चलाने की जिम्मेदारी का सवाल खड़ा है।

वीरेश के परिवार पर फिर टूटा दुखों का पहाड़

दहला धौरहरा निवासी 35 वर्षीय वीरेश की शादी करीब एक साल पहले हुई थी। वह भी परिवार की जरूरतों के लिए बाहर मजदूरी करने गया था। परिजनों के मुताबिक, उसके अभी बच्चे नहीं थे। परिवार पहले ही दो भाइयों को खो चुका था। अब वीरेश की मौत से परिवार को एक और बड़ा सदमा लगा है।

अनिल की मौत, भाई ने भी गंवाए दोनों पैर

26 वर्षीय अनिल की मौत ने उसके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। परिवार के मुताबिक, अनिल की एक बेटी जन्म के कुछ समय बाद ही चल बसी थी। इस हादसे में अनिल की जान चली गई, जबकि उसका भाई सुनील भी दुर्घटना में अपने दोनों पैर गंवा बैठा। एक तरफ परिवार को अनिल की मौत का दुख झेलना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ घायल सुनील के इलाज और भविष्य की चिंता भी सामने है।

क्लेम के कागजों पर हस्ताक्षर कराने को लेकर नाराज हुए विधायक

शव गांव पहुंचने के बाद गुजरात से आए कंपनी के प्रतिनिधि परिजनों से गुजराती भाषा में लिखे कुछ फॉर्म पर हस्ताक्षर कराने लगे। सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने कागजों के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि ये क्लेम से संबंधित हैं। इस पर विधायक ने अंतिम संस्कार से पहले परिजनों से ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर कराने पर आपत्ति जताई और कार्रवाई की चेतावनी दी।

विधायक ने संबंधित लोगों का बैग लेकर प्रभारी निरीक्षक मुकेश वर्मा को सौंप दिया। उन्होंने पूरे मामले की जांच-पड़ताल और कागजों की जानकारी जुटाने के बाद ही संबंधित लोगों को जाने देने के निर्देश दिए। हादसे से टूट चुके परिवारों के बीच इस घटनाक्रम से कुछ देर के लिए तनाव भी पैदा हो गया।

बच्चों की पढ़ाई, आवास और आर्थिक मदद का भरोसा

शव पहुंचने के बाद सेवता विधायक ज्ञान तिवारी, एसडीएम महमूदाबाद सुधीर कुमार और तहसीलदार उमाशंकर त्रिपाठी बिंद्रा पुरवा पहुंचे। उन्होंने संदीप और कुलदीप के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

विधायक ने संदीप के बच्चों को मुख्यमंत्री बाल कल्याण योजना के तहत प्रतिमाह 2,500 रुपये दिलाने और परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रयास करने की बात कही। देशराज की बेटी की शादी में सहायता का भरोसा भी दिया।

विधायक ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूरों के परिवारों को सरकार की ओर से पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। वीरेश और अनिल के परिजनों को भी सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।

अंतिम संस्कार में पहुंचे पूर्व विधायक महेंद्र सिंह झीन बाबू ने भी पीड़ित परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और परिवारों की जरूरतों में मदद की बात कही। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अवधेश चौहान और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि शिवकुमार गुप्ता ने भी शोकाकुल परिवारों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।

पांच घरों में रह गईं यादें और अधूरी जिम्मेदारियां

रोजी-रोटी की तलाश में गुजरात गए पांचों मजदूर अपने परिवारों के सपने पूरे करना चाहते थे। किसी को बच्चों की पढ़ाई की चिंता थी, किसी को बेटी की शादी करनी थी, तो किसी ने अभी वैवाहिक जीवन की शुरुआत ही की थी। सड़क हादसे ने पांच परिवारों का सहारा छीन लिया।

रविवार सुबह गांव पहुंचीं पांच अर्थियों के साथ परिवारों की खुशियां भी जैसे विदा हो गईं। पीछे रह गए मासूम बच्चों, शोकाकुल पत्नियों और बुजुर्ग परिजनों के सामने अब जिंदगी नए सिरे से संभालने की चुनौती है।

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