गुजरात में ये क्या हो गया, 10,00,000 मजदूरों का पलायन, कंपनियों की दादागिरी खत्म!

सूरत के टेक्सटाइल और एम्ब्रॉयडरी उद्योग में मजदूर और मिल… दुकान मालिक मुख्य रूप से काम के घंटे, साप्ताहिक छुट्टी और बकाए वेतन... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सूरत की चमकती मिलों में अब मशीनें तो पूरी रफ्तार से चल रही हैं.. लेकिन उनको चलाने वाले मजदूरों के पांव अब गांव की तरफ लौट रहे हैं.. बता दें कि गांव चलो अभियान ने तूल पकड़ लिया है.. सूरत में शुरू हुआ यह आंदोलन अब अपने चरम पर पहुंच चुका है.. उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लाखों मजदूर अब शहर छोड़कर अपने घरों की राह पकड़ रहे हैं.. 12 घंटे की खट्टी मेहनत, छुट्टी मांगने पर काटी जाने वाली सैलरी.. और नौकरी से निकाल दिए जाने का डर अब उन्हें बर्दाश्त नहीं हो रहा.. गुजरात में करीब 10 लाख मजदूरों ने इस मोर्चे को खोला है.. सूरत के टेक्सटाइल और एम्ब्रॉयडरी उद्योग में मजदूर और मिल-दुकान मालिक काम के घंटे, साप्ताहिक छुट्टी.. और बकाए वेतन को लेकर आमने-सामने खड़े हो गए हैं..

आपको बता दें कि इस तनाव के चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के बड़ी संख्या में मजदूर गांव चलो आंदोलन के तहत अपने घर लौट रहे हैं.. मजदूरों का साफ आरोप है कि उनसे रोजाना 12 घंटे काम कराया जाता है.. जबकि श्रम कानूनों के अनुसार आठ घंटे की ड्यूटी तय होनी चाहिए.. और उसी के हिसाब से वेतन मिलना चाहिए.. हकीकत में ओवरटाइम का पैसा भी सही से नहीं मिलता.. कई जगह तो वीकली ऑफ तक नहीं दिया जाता.. जब कोई मजदूर बीमार पड़कर या परिवार की मजबूरी में छुट्टी मांगता है.. तो उसकी सैलरी काट ली जाती है.. कई बार तो सीधा नौकरी से निकाल दिया जाता है.. वहीं यह प्रताड़ना अब असहनीय हो चुकी है.. सूरत की चमकदार मिलों की चमक के पीछे मजदूरों की थकी हुई आंखें और टूटे हुए सपने छिपे हैं..

गुजरात के सूरत में यूपी और बिहार के लाखों मजदूरों ने गांव चलो आंदोलन शुरू कर दिया है.. 12-12 घंटे काम कराने के बावजूद वीकली ऑफ न मिलना.. छुट्टियां मांगने पर सैलरी काटना.. और नौकरी से निकालने जैसी प्रताड़ना से तंग आकर मजदूर अपने गांवों की तरफ लौट रहे हैं.. लेबर यूनियन भी मजदूरों के समर्थन में उतर आई है.. यूनियन के नेताओं का कहना है कि अगर स्थितियां नहीं सुधरीं तो सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भारी संकट आ सकता है.. शहर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इन मिलों पर टिका है.. अगर मजदूर चले गए तो उत्पादन ठप पड़ जाएगा.. मालिकों को भी अब सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा.. मजदूर सिर्फ मशीन नहीं हैं.. वे इंसान हैं जिन्हें सम्मान और कानूनी अधिकार चाहिए..

आपको बता दें कि सूरत का टेक्सटाइल हब देशभर में मशहूर है.. यहां कपड़े और एम्ब्रॉयडरी का काम बड़े पैमाने पर होता है.. देश-विदेश के बाजारों में सूरत का सामान पहुंचता है.. लेकिन इस चमक के पीछे मजदूरों का खून-पसीना है.. ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए हैं.. वे अपने परिवार के लिए बेहतर कमाई की उम्मीद लेकर शहर पहुंचे थे.. लेकिन यहां उन्हें लंबे काम के घंटे, कम वेतन.. और अपमान का सामना करना पड़ रहा है.. कई मजदूर बताते हैं कि सुबह आठ बजे मिल में प्रवेश करते हैं.. और रात आठ बजे बाहर निकलते हैं.. बीच में खाने का समय भी ठीक से नहीं मिलता.. थकान इतनी होती है कि घर लौटकर सिर्फ सोना ही संभव हो पाता है..

जिसको लेकर मजदूरों का कहना है कि श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.. आठ घंटे की ड्यूटी के बाद ओवरटाइम का दोगुना वेतन मिलना चाहिए.. लेकिन यहां तो मूल वेतन भी समय पर नहीं मिलता.. कई मिलों में बकाया वेतन महीनों से अटका पड़ा है.. जब मजदूर अपना हक मांगते हैं तो मालिक धमकी देते हैं.. कुछ जगहों पर तो पुलिस तक बुला ली जाती है.. वहीं इस पूरे माहौल ने मजदूरों को मजबूर कर दिया है कि वे शहर छोड़कर गांव लौट जाएं.. गांव में खेती-बाड़ी या छोटे-मोटे काम से ही गुजारा करेंगे.. लेकिन इज्जत से रहेंगे.. सूरत की मिलें अब खाली पड़ने लगी हैं.. कई मालिक चिंतित हैं कि उत्पादन कैसे चलेगा..

 

Related Articles

Back to top button