केरल में सियासी भूचाल, विस की वैधता पर सवाल

  • सीईसी के खिलाफ प्रस्ताव पर भाजपा और कांग्रेस आमने – सामने
  • केरल विधानसभा के 140 सदस्यों में से 137 सदस्यों के समर्थन से पारित किया गया प्रस्ताव

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। केरल में सीईसी के खिलाफ प्रस्ताव पर राज्य सियासी तनाव जारी हो गया। भाजपा और कांग्रेस में एक दूसरे पर वार-पलटवार जारी हो गया है। बता दें एक तरफ जहां केरल की यूडीएफ सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त -सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है, वहीं दूसरी तरफ इस कदम ने राज्य की राजनीति में नया बवंडर खड़ा कर दिया है। महज पांच महीने पहले चुनाव जीतने वाली कांग्रेस पर अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उसी चुनावी जनादेश और विधानसभा की वैधता को लेकर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। हालांकि, इस कदम की भाजपा ने आलोचना की है।
भाजपा ने सवाल उठाया है कि एसआईआर पाँच महीने बाद राज्य में सत्ता में आने के बाद कांग्रेस इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर कैसे सवाल उठा सकती है और पार्टी पर धोखाधड़ी वाली राजनीति करने का आरोप लगाया है। यह सब तब हो रहा है जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से माना था कि एसआईआर से पार्टी को मार्च में हुए विधानसभा चुनाव जीतने में मदद मिली होगी। सोमवार को केरल विधानसभा में पास किया गया यह प्रस्ताव भारत में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव है। केरल के मुख्यमंत्री (विपक्ष के नेता) वीडी सतीसन के अनुसार, इस प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने, एसआई प्रक्रिया के तहत हटाए गए योग्य मतदाताओं को वापस जोडऩे और चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बड़े बदलाव की मांग की गई है। सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को केरल विधानसभा के 140 सदस्यों में से 137 सदस्यों के समर्थन से पारित किया गया। जैसा कि उम्मीद थी, इसके खिलाफ केवल तीन वोट बीजेपी विधायकों के थे, जो मार्च में हुए विधानसभा चुनावों में अपनी-अपनी सीटों से चुने गए थे। लेकिन, इस कदम ने केरल में कांग्रेस सरकार को राजनीतिक रूप से मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।

धोखाधड़ी की राजनीति कर रही कांग्रेस : राजीव चंद्रशेखर

बीजेपी ने इस साफ विरोधाभास को लेकर कांग्रेस की आलोचना की है। उसने उस चुनावी प्रक्रिया पर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया है जिससे उसे हाल ही में राज्य-स्तरीय जीत मिली थी, राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने पार्टी पर धोखाधड़ी की राजनीति करने का आरोप लगाया है। केरल के अलावा, कांग्रेस तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश में सरकार चला रही है और तमिलनाडु, झारखंड व जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है।

चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी से कोई समझौता नहीं : सतीसन

सीएम सतीसन ने एक्स पर प्रस्ताव की ज़रूरत बताते हुए लिखा, हमारी चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। वोटर लिस्ट में बदलाव, योग्य वोटरों का वोट देने का अधिकार छिनना और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर चिंताओं को नजऱअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा, वोट देने का अधिकार हमारे लोकतंत्र की नींव है। किसी भी संस्था को हमारे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। हमारा रुख़ साफ़ है। वोट देने के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए। संविधान का सम्मान होना चाहिए। लोकतंत्र बना रहना चाहिए।

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