नशे के खिलाफ पंजाब सरकार की मुहिम तेज, इतने करोड़ की दवाएं जब्त
पंजाब सरकार ने ई-फार्मेसी के ज़रिए ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को कंट्रोल करने वाले नियमों की कमी के बारे में भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सामने चिंता जताई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को तेज करते हुए भगवंत मान सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाली दवा दुकानों और फर्मों पर शिकंजा कसा है।
फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के ड्रग विंग ने 1 अप्रैल 2025 से 30 सितंबर 2026 के बीच कुल 16,788 निरीक्षण किए। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली लाइसेंस प्राप्त और बिना लाइसेंस वाली फर्मों से ₹20.64 करोड़ की दवाएं जब्त की गईं। इसके अलावा, 520 केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 22 केमिस्टों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए।
सरकार की इस कार्रवाई को दवाओं की बिक्री में अनियमितताओं पर रोक लगाने और नशे के लिए दवाओं के संभावित दुरुपयोग को नियंत्रित करने की दिशा में उठाए गए कदमों के तौर पर देखा जा रहा है।
पंजाब के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के निर्देशों के तहत कानून का पालन मज़बूत करने और दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए नियमित तौर पर निरीक्षण किए जा रहे हैं. नशे की दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 13 मई 2026 के नोटिफिकेशन नंबर जी.एस.ए. 377(ई) के ज़रिए प्रीगैब्लिन को ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल एच1 में शामिल किया है. यह नियम 12 नवंबर, 2026 से लागू होगा.
सरकार ने की रेगुलेटरी दखल की मांग
इससे पहले प्रीगैब्लिन को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 या ड्रग्स रूल्स, 1945 के किसी भी शेड्यूल में शामिल नहीं किया गया था. पंजाब सरकार ने इसके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए रेगुलेटरी दखल की मांग करते हुए कई बार भारत सरकार के सामने अलग-अलग लेटर के ज़रिए यह मुद्दा उठाया था.
पंजाब सरकार ने ई-फार्मेसी के ज़रिए ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को कंट्रोल करने वाले नियमों की कमी के बारे में भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के सामने चिंता जताई है. राज्य सरकार के मुताबिक, नशे के तौर पर इस्तेमाल की जा सकने वाली दवाएं आसानी से ऑनलाइन मिल जाती हैं, जिससे नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने की कोशिशों को नुकसान पहुंच रहा है.
पंजाब सरकार ने राज्य में बिक्री के लिए आठ तरह के ड्रग फॉर्मूलेशन के स्टॉक पर बैन लगा दिया है. हालांकि, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के लिए कोई सही रेगुलेटरी फ्रेमवर्क न होने से अभी भी कानून को असरदार तरीके से लागू करने में रुकावट आ रही है.
दवाइयों की कीमतों में अंतर का मुद्दा
भगवंत मान सरकार ने दवाओं की आसमान छूती कीमतों और अलग-अलग कंपनियों की बनाई दवाओं, जिनमें उन दवाइयों की कीमतों में अंतर का मुद्दा भी उठाया है, जिनमें एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट या सॉल्ट एक जैसे होते हैं. सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया दखल और निर्देशों से पहले केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया था.
पंजाब सरकार ने जनता के हित में आगे काम करने और पब्लिक हेल्थ से जुड़े मुद्दों को हल करने और पूरे राज्य में ड्रग कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.



