SIR के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, CJP नेताओं पर क्राइम ब्रांच का शिकंजा
देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है।
SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 23 अक्टूबर, शुक्रवार को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया गया है।
इस आंदोलन को ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ नाम दिया गया है। इसके बैनर तले सिविक सोसाइटी संगठनों, छात्र संघों, किसान संगठनों और अल्पसंख्यक संगठनों से जुड़े लोगों के एक साझा गठबंधन ने विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
वहीं, दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की मुश्किलें भी कम होती नजर नहीं आ रही हैं। जमानत मिलने के बाद भी इन नेताओं को राहत नहीं मिली है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच आज उनसे पूछताछ करने वाली है। ऐसे में देशव्यापी आंदोलन से ठीक पहले CJP नेताओं से होने वाली पूछताछ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या CJP के नेता भी SIR के खिलाफ होने वाले इस आंदोलन में शामिल होंगे?
देशव्यापी आंदोलन के आयोजकों का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के संवैधानिक पद का इस्तेमाल ‘बेधड़क’ होकर केवल अपने निजी स्वार्थों को साधने के लिए किया है.
आयोजकों का कहना है कि विरोध मार्च निकालने का फैसला 14 अक्टूबर को हुई एक संयुक्त बैठक के बाद लिया गया. ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने ‘इंडिया’ ब्लॉक से भी अपील की है कि वे 23 अक्टूबर को अपना समर्थन दें, ताकि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकें.
‘हर हाथ में तिरंगा, हर सड़क जंतर-मंतर’
दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगह के रूप में मान्यता देने वाली अधिसूचना रद्द कर दी है. इसके विरोध में और सविनय अवज्ञा के तहत जंतर-मंतर पर भारतीय तिरंगा लहराने के कारण आशुतोष रंका और सौरव दास समेत CJP नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया.
इन घटनाओं के मद्देनजर, मार्च के आयोजकों ने खुद को देशभक्त मानने वाले लोगों से अपील की है कि वे आगे आएं, पूरे देश में पैदल मार्च निकालें और अपने हाथों में तिरंगा थामें. साथ ही, वे हर भारतीय सड़क को जंतर-मंतर जैसा रूप दें.
देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की मुख्य मांगें
CEC ज्ञानेंद्र कुमार को हटाना और उन पर मुकदमा चलाना.
SIR वोटर लिस्ट को रद्द करना.
वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को वापस जोड़ना.
‘चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023’ को निरस्त करना (जिसके तहत चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा मिली हुई है).
निष्पक्ष तरीके से नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करना.
बैलेट पेपर के जरिए मतदान की व्यवस्था लागू करना.
दास और रांका से पूछताछ करेगी दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच
इधर, दिल्ली में एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ने सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा कर दिया. दोनों ने हलफनामे में कहा है कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर अधिसूचित धरना स्थल नहीं है, तब तक वहां विरोध-प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे.
दास और रांका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया गया है. वे तिहाड़ जेल से बाहर आ गए है, लेकिन उनकी परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है.
सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे ही तिहाड़ जेल के बाहर निकले वैसे ही दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उन्हें जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दे दिया और उन्हें 22 अक्टूबर यानी आज क्राइम ब्रांच के सामने पेश होना है.
क्राइम ब्रांच ने अजिंक्य शिंदे को भी जांच में शामिल होने के लिए अपने ऑफिस बुलाया है. क्राइम ब्रांच ने 188 सरकारी आदेश का पालन न करना और किसी दूसरे की प्रॉपर्टी में घुसकर जंतर-मंतर पहुंचने के मामले में जांच में शामिल होने के लिए बुलाया है.
क्या सौरव दास और आशुतोष रांका प्रदर्शन में होंगे शामिल?
अब सवाल उठ रहा है कि क्या जेल से बाहर आने के बाद सीजेपी नेता देशव्यापी आंदोलन में शामिल होंगे? इस संबंध में अभी तक सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
दरअसल, बुधवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने कहा था कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल निवारक उपायों की जरूरत दोनों नेताओं से मुचलके भरवाकर और उनके लिखित हलफनामे लेकर पर्याप्त रूप से पूरी की जा सकती है.
उन्होंने विशेष रूप से आश्वासन दिया कि जब तक कानून के अनुसार जंतर-मंतर अधिसूचित धरना स्थल नहीं है, तब तक वे वहां विरोध-प्रदर्शन की अपील नहीं करेंगे. दोनों ने कहा कि उनकी ओर से किया जाने वाला कोई भी विरोध-प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में रहेगा.



