अब टीचर से ज्यादा AI से सीख रहे छात्र, OECD रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे
AI ट्यूटर की मदद से छात्र मुश्किल विषयों को आसानी से समझ पा रहे हैं और अपनी जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कर रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अब AI सिर्फ सवालों के जवाब देने या जानकारी खोजने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह छात्रों की पढ़ाई में भी अहम भूमिका निभा रहा है।
AI ट्यूटर की मदद से छात्र मुश्किल विषयों को आसानी से समझ पा रहे हैं और अपनी जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कर रहे हैं। इसी बीच आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की डिजिटल एजुकेशन आउटलुक 2026 रिपोर्ट में एक स्टडी के नतीजे सामने आए हैं।
इसके मुताबिक, AI ट्यूटर की मदद से पढ़ने वाले छात्रों ने पारंपरिक क्लासरूम लेक्चर की तुलना में कम समय में ज्यादा सीख हासिल की। इतना ही नहीं, इन छात्रों में पढ़ाई को लेकर उत्साह और भागीदारी भी अधिक देखने को मिली।
क्लासरूम लेक्चर के मुकाबले AI ट्यूटर से ज्यादा सीख रहे छात्र
रिपोर्ट में सामने आए स्टडी के नतीजे बताते हैं कि पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों के साथ AI का इस्तेमाल छात्रों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आमतौर पर क्लासरूम में शिक्षक एक ही समय पर पूरी कक्षा को पढ़ाते हैं। ऐसे में हर छात्र की सीखने की क्षमता और समझने की गति अलग-अलग होने के बावजूद सभी को एक ही तरीके से पढ़ाया जाता है।
वहीं, AI ट्यूटर छात्रों की जरूरत और सीखने की गति के हिसाब से जानकारी दे सकता है। अगर किसी छात्र को कोई विषय समझने में परेशानी होती है, तो वह AI से उसी सवाल को अलग-अलग तरीकों से समझ सकता है। इससे छात्रों को अपनी कमजोरियों को पहचानने और उन्हें दूर करने में मदद मिलती है।
स्टडी के अनुसार, AI ट्यूटर से पढ़ने वाले छात्रों ने कम समय में बेहतर सीख हासिल की। इससे यह संकेत मिलता है कि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो AI शिक्षा को ज्यादा आसान और प्रभावी बना सकता है।
OECD की रिपोर्ट में अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के 316 छात्रों पर की गई रिसर्च का जिक्र है. ये सभी स्टूडेंट फिजिक्स के शुरुआती स्तर के कोर्स में पढ़ रहे थे. रिसर्च के दौरान छात्रों को दो समूहों में बांटा गया. पहले समूह को पारंपरिक क्लासरूम में एक्टिव लर्निंग के जरिए पढ़ाया गया, जबकि दूसरे समूह ने ऑनलाइन AI ट्यूटर की मदद से पढ़ाई की.
सीखने की क्षमता बढ़ाना है उद्देश्य
इस AI ट्यूटर को खासतौर पर छात्रों को सब्जेक्ट समझाने और उनकी सीखने की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था. स्टडी में सामने आया कि AI ट्यूटर से पढ़ने वाले छात्रों ने कम समय में ज्यादा सीख हासिल की. उनका मोटिवेशन और पढ़ाई में जुड़ाव भी बेहतर रहा. रिसर्च में 0.63 का इफेक्ट साइज दर्ज किया गया जिसे OECD ने बड़ा प्रभाव माना है.
AI से ट्यूटर्स को भी मिल रही मदद
रिपोर्ट में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स द्वारा तैयार किए गए ‘ट्यूटर कोपायलट’ का भी उदाहरण दिया गया है. यह AI टूल ऑनलाइन पढ़ाने वाले ट्यूटर्स की सहायता के लिए बनाया गया है. अमेरिका में करीब 900 ट्यूटर्स ने 1,800 जरूरतमंद छात्रों को पढ़ाने के दौरान इसका इस्तेमाल किया.
इसके रिजल्ट में छात्रों के पास होने की दर में औसतन 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, कम एक्सपीरियंस वाले ट्यूटर्स के छात्रों की सफलता दर में 9 प्रतिशत और पहले कम क्वालिटी वाली रेटिंग पाने वाले ट्यूटर्स के छात्रों की सफलता दर में 7 प्रतिशत सुधार देखा गया.
AI का सही डिजाइन होना जरूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य चैटबॉट और पढ़ाई के लिए तैयार किए गए AI ट्यूटर में अंतर है. सामान्य चैटबॉट सवालों के जवाब दे सकते हैं, लेकिन विशेष रूप से तैयार AI ट्यूटर छात्रों को उनकी जरूरत के अनुसार जानकारी, उदाहरण और फीडबैक दे सकते हैं. हालांकि, इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि AI टीचर की जगह ले सकता है.
रिपोर्ट के उदाहरण बताते हैं कि AI का इस्तेमाल टीचर्स और ट्यूटर्स की मदद करने के लिए भी किया जा सकता है. इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे सीखने और समझने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए किस तरह तैयार किया गया है.



