पीएम संग बहस की चुनौती पर रार

कांगे्रस व भाजपा आई आमने-सामने

  • गृहमंत्री व नेता प्रतिपक्ष में वार-पलटवार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
संगरूर/नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर खुली बहस की चुनौती दी है। इसको लेकर सियासी तनाव बढ़ गया है। भाजपा ने कांग्रेस को इसको लेकर आड़े हाथों लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने संसद में हंगामा करने को ‘‘कांग्रेस की कार्यशैली’’ बना दिया। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि मोदी उनके साथ बहस करते हैं तो वह पांच मिनट में साबित कर देंगे कि प्रधानमंत्री देशद्रोही हैं और वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर काम करते हैं।
गांधी ने संगरूर में कांग्रेस की ‘इंसाफ रैली’ को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री चाहे तो बहस के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत या फिर उद्योगपति गौतम अदाणी को जज बना सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस नेताओं को देशद्रोही कहते हैं। मैंने उन्हें सीधी चुनौती दी कि आप मेरे साथ बहस करिये। जिसको आप जज बनाना चाहते हैं, बना दीजिए। मोहन भागवत को जज बना दीजिए, अदाणी को बनाना है तो उन्हें जज बना दीजिए।
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के करनाल में आयोजित पदयात्रा के बाद विपक्ष पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाने को भाजपा का संकल्प बताया।

मैं गारंटी देता हूं, मोदी मेरे सामने आकर बैठ नहीं सकते : राहुल

कोई फर्क नहीं पड़ता। आप बस मेरे सामने आकर बैठ जाइए।’’ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का कहना था, मैं देश को गारंटी देता हूं कि नरेन्द्र मोदी मेरे सामने आकर बैठ नहीं सकते। उनके सारे नेता कह रहे हैं कि संसद में चर्चा करिये, लेकिन संसद में आप लोग मेरा माइक बंद कर देते हैं और मुझे बोलने नहीं देते हैं। उन्होंने दावा किया, नरेन्द्र मोदी को मेरे सामने बैठने के लिए कहिए। मैं आपको गारंटी देता हूं कि पांच मिनट में साबित कर दूंगा कि मोदी देशद्रोही हैं और मोदी को डोनाल्ड ट्रंप नियंत्रित करते हैं।

संसद में हंगामा करने को कांग्रेस की कार्यशैली बनाया : अमित शाह

शाह ने हरियाणा के करनाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दोहराया कि केंद्र सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘राहुल गांधी ने संसद में हंगामा करने को कांग्रेस की कार्यशैली बना दिया है। हम एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं।’’ उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान कर मतदाता सूची से उनके नाम हटाना भाजपा का संकल्प है। शाह ने इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘इसकी रैली का मकसद मतों की रक्षा करना नहीं, बल्कि घुसपैठियों को बचाना है।’’ उन्होंने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का ब्योरा मांगते हुए कहा, ‘‘आप लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, लोगों को यह जानने का अधिकार है।’’ इससे पहले, शाह नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। पार्टी सूत्रों ने बताया कि यह पदयात्रा सेक्टर 12 से शुरू हुई और इसका समापन दयानंद चौक पर हुआ जहां अमित शाह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता एक जनसभा को संबोधित किया।

सपा नेता आजम खा को सुप्रीम कोर्ट से झटका

  • ईडी द्वारा दर्ज धनशोधन के एक नए मामले में सुनवाई करने से इनकार
  • केस को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में किया स्थानांतरित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नयी दिल्ली। पांच नवंबर उच्चतम न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज धनशोधन के एक नए मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने खान की याचिका को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया और मुख्य न्यायाधीश से 16 नवंबर को एक खंडपीठ के समक्ष इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया।
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से 16 नवंबर को ही खान की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने को भी कहा। खान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दुर्भावनावश ईडी की कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्हें रिहा किया जाने वाला था, तभी गिरफ्तार कर लिया गया। सिब्बल ने कहा, ‘‘वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि मैं (आजम खान) चुनाव के दौरान जेल में रहूं।’’ खान के वकील ने बताया था कि 78 वर्षीय सपा नेता को जौहर ट्रस्ट से जुड़े धनशोधन मामले के सिलसिले में एक नवंबर को गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेश किया गया था। कथित दोहरे पैन कार्ड मामले में रामपुर जेल से जमानत पर रिहा होने के तुरंत बाद ईडी ने 31 अक्टूबर को धनशोधन के इस मामले में आजम खान को गिरफ्तार कर लिया था।

धीरेंद्र को तो चौराहे पर लाकर ठोकना चाहिए : वडेट्टीवार

  • कांग्रेस नेता बोले- ये सरकारें धर्म की बात करती हैं पर अभी चुप हैं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। भगवान राम और भगवान कृष्ण को लेकर दिए बयान पर भले ही बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने माफी मांग ली हो लेकिन सियासी पारा हाई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने तो यहां तक कह दिया कि उसको तो चौराहे पर लाकर ठोकना चाहिए। ऐसी बातें कहने का अधिकार उसको किसने दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा, ये सरकारें धर्म की बात करती है और भगवान के प्रति आस्था बताते हैं। अब किस बिल में छुपे हो भाई? वो धीरेंद्र कृष्ण के बारे में जिस तरह से बात किया, भगवान राम के बारे में जिस तरह से बात किया, भगवान राम के पांच बाप थे करके बात किया। उसको तो चौराहे पर लाकर ठोकना चाहिए।
उसको हमारी आस्था और भक्ति के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसने दिया। विजय वडेट्टीवार ने आगे कहा, उसने हमारा भगवान ऐसा है, कृष्ण दूसरे का भगवान है, ऐसे बोला। भगवान को भी बांटने का काम चालू किया। उनका अपमान करने का काम चालू किया। हम कहते हैं धीरेंद्र जिस तरह से भगवान का अपमान कर रहा है, उसके कोई भी प्रवचन को सरकार को परमिशन नहीं देना चाहिए। उसके प्रवचन पर रोक लगाना चाहिए और पूरे हिंदू धर्म से माफी मांगनी चाहिए।

आरोपी को हिरासत में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की समयसीमा

  • जज के सामने आरोपी को पेश करने का वक्त को गिरफ्तारी नहीं मानी जाएगी : सुप्रीम कोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी की 24 घंटे समयसीमा पर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की समयसीमा हिरासत में लेने के समय से ही शुरू होगी। 24 घंटे में जज के सामने आरोपी को पेश करने का वक्त उसकी आधिकारिक गिरफ्तारी ने नहीं माना जाएग।
इसके लिए उसे हिरासत में लेने का वक्त ही माना जाएगा।शीर्ष अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी और हिरासत को अलग-अलग मानकर नहीं देखा जा सकता है। दोनों ही परिस्थितियों में व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई हाईकोर्ट के दृष्टिकोण की आलोचना की। उन्होंने गिरफ्तारी और हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर पैदा किया है। किसी व्यक्ति को वास्तव में कब हिरासत में लिया गया, यह महत्वपूर्ण है न कि पुलिस ने गिफ्तारी की औपचारिक कार्रवाई कब पूरी की, पीठ ने कहा कि आरोपी को 24 घंटे के भीतर न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की संवैधानिक समयसीमा उस समये से शुरू होगी जब पुलिस ने उसे वास्तव में हिरासत में लिया हो।

यूजीसी नियमों के खिलाफ याचिका पर सुनवाई टली

नई दिल्ली। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि नियमों पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है। एक कमिटी का भी गठन किया जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी। यह मामला अबेदा सलीम तडवी बनाम भारत संघ और इससे जुड़े अन्य मामलों से संबंधित है। 2019 में यह याचिका रोहित वेमुला और पायल तडवी की माताओं ने दायर की थी। इन दोनों छात्रों ने कैंपस में कथित तौर पर जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। याचिका में उच्च शिक्षा संस्थानों में इस तरह के भेदभाव के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की गई थी।

सीजेपी नेता रांका व दास पुलिस के दफ्तर पहुंचे

  • विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया गया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका गुरुवार को राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे। उन्हें अक्टूबर में जंतर-मंतर (जिसे अब प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है) पर हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर, जहां से विरोध प्रदर्शन हटा लिया गया था, वहां पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद इन दो नेताओं को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
पुलिस के अनुसार, ऐसा करके उन्होंने 11 अक्टूबर को हस्ताक्षरित शांति बांड (पीस बॉन्ड) का भी उल्लंघन किया था। 21 अक्टूबर को, 50,000-50,000 रुपये के निजी और ज़मानती बॉन्ड भरने के बाद उन्हें तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। बाद में सीजेपी नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए। क्राइम ब्रांच ने दास और रंका को अक्टूबर के अंत से पहले पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने और समय की मांग की।
ये मामले 14 अक्टूबर की एक घटना से जुड़े हैं, जिसमें दास, रंका और अजिंक्य शिंदे समेत 11 अन्य लोगों ने कथित तौर पर जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है। यह समूह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहा था और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए। इन सभी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
शिंदे को शांति बनाए रखने के एक मुचलके (पीस बॉन्ड) पर हस्ताक्षर करने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया, जबकि दास और रंका लगभग एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे।

जंतर-मंतर हिंसा मामले में पूर्व जज की कमेटी करेगी जांच

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने मामले से जुड़ी याचिकाएं, वीडियो और शिकायतें पूर्व न्यायाधीश आर सुब्बाश रेड्डी की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने कमेटी से नियमित अंतराल पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं होने के कारण हाई पावर इंक्वायरी कमेटी जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकी है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से संबंधित मामले की जांच अब हाई पावर कमेटी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़ी ट्रांसफर याचिकाएं, वीडियो फुटेज और शिकायतें कमेटी को उपलब्ध कराई जाएं। इस कमेटी की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश आर सुब्बाश रेड्डी कर रहे हैं। अदालत का निर्देश है कि कमेटी उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाए।

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