AAP ने LNJP के बाहर किया मौन प्रदर्शन, CM रेखा गुप्ता पर साधा निशाना

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर 650 करोड़ रुपए के दवा घोटाले का आरोप लगाते हुए एलएनजेपी अस्पताल के बाहर मौन सांकेतिक प्रदर्शन किया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सारा का सारा षड्यंत्र तो रेखा गुप्ता की सरकार ने रचा और खुद वत्सला अग्रवाल को उस पद पर बैठाया और अब कह रही हैं कि उन्होंने 650 करोड़ रुपए का घोटाला कर दिया. एसीबी की एफआईआर में मुख्य मास्टरमाइंड राजीव रंगीला जर्मनी भाग गया. क्या एसीबी और दिल्ली सरकार सो रही थी?

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार पर 650 करोड़ रुपए के दवा घोटाले का आरोप लगाते हुए एलएनजेपी अस्पताल के बाहर मौन सांकेतिक प्रदर्शन किया. आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने लंबी मानव शृंखला बनाई और सबके हाथ में सीएम रेखा गुप्ता और पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल का फोटो लगे प्लेकार्ड थे. इसके जरिए आप ने भाजपा से पूछा कि यह रिश्ता क्या कहलाता है?

प्रदर्शन के दौरान सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा कह रही है कि डॉ. वत्सला अग्रवाल ने डीजीएचएस में 650 करोड़ रुपए का घोटाला किया है. लेकिन डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस किसने नियुक्त किया? रेखा गुप्ता सरकार ने ही सारे नियमों को ताक पर रखकर और सीनियर्स की अनदेखी कर उन्हें नियुक्त किया था. उनके खिलाफ विजिलेंस की जांच चलने के बावजूद उनकी नियुक्ति की गई.

रेखा गुप्ता की सरकार ने नियम बदले-आप
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रेखा गुप्ता की सरकार ने नियम बदले और कहा कि कोई भी अस्पताल सीधे खरीदारी नहीं करेगा, बल्कि सारी खरीद वत्सला अग्रवाल की सीपीए के जरिए होगी. यह फैसला रेखा गुप्ता सरकार ने ही किया था. इसलिए अब रेखा गुप्ता सरकार को यह जवाब देना चाहिए कि वत्सला अग्रवाल के साथ उनका आखिर क्या रिश्ता है जो उन पर इतनी मेहरबानी की गई?

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि दिल्ली में 650 करोड़ रुपए का यह बड़ा स्वास्थ्य घोटाला हुआ है. लेकिन एसीबी ने जानबूझकर इसके मास्टरमाइंड को एक महीने तक गिरफ्तार नहीं किया और उसे आसानी से जर्मनी भागने दिया गया. हम लगातार यह बात कहते रहे और प्रेस वार्ता करके राजीव रंगीला की गिरफ्तारी की मांग भी करते रहे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उसे गिरफ्तार नहीं किया.

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हमारी मांग है कि राजीव रंगीला को जर्मनी से पकड़कर लाया जाए ताकि वह बताए कि 650 करोड़ रुपए की बंदरबांट में किन-किन राजनेताओं को हिस्सा दिया गया है. हर्ष मल्होत्रा कहते हैं कि जांच पूरी नहीं हुई है, लेकिन अगर जांच पूरी नहीं हुई, तो उन्होंने मुख्य आरोपी को जर्मनी क्यों भागने दिया? अब जांच कभी पूरी नहीं होगी. हर्ष मल्होत्रा यही कहते रहेंगे कि जांच चल रही है, क्योंकि जिससे जांच करनी थी उसे तो हर्ष मल्होत्रा की सरकार की एसीबी ने जर्मनी भगा दिया.

कॉन्ट्रैक्टर राजीव रंगीला क्यों नहीं पकड़ा गया?-AAP
उधर, बुराड़ी विधायक संजीव झा ने कहा कि एसीबी ने खुद माना है कि 650 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है. 400 करोड़ की दवाइयां 100 करोड़ में खरीदी जानी चाहिए थीं, यानी 300 करोड़ लूट लिए गए. 2.5 लाख की मशीन 17 लाख में खरीदी गई. बाजार का रेट क्या है और इन्होंने किस रेट में खरीदा, यह सब सामने है. लेकिन एफआईआर होने के बाद भी कॉन्ट्रैक्टर राजीव रंगीला क्यों नहीं पकड़ा गया? क्या उसे भी विजय माल्या और नीरव मोदी की तरह भगा दिया गया?

वहीं, कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि भाजपा सरकार के 650 करोड़ रुपए वाले स्वास्थ्य घोटाले में 2.5 रुपए का ओआरएस का पैकेट 15 रुपए में खरीदा गया और जो चादर एम्स ने 150 रुपए में खरीदी, उसे दिल्ली सरकार ने 450 रुपए में खरीदा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को बताना चाहिए कि उन्होंने इतने जूनियर ऑफिसर डॉ. वत्सला अग्रवाल को डीजीएचएस की कमान क्यों दी और यह किसकी सिफारिश पर हुआ?

मॉडल टाउन के पूर्व विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी ने कहा कि वह 15 डॉक्टरों से जूनियर थीं, फिर भी उन्हें डीजीएचएस बनाया गया. अस्पतालों की खरीद करने की पावर छीनकर डीजीएचएस को दे दी गई और सारे नियम-कानून बदलकर घोटाला करने का माहौल तैयार किया गया.

जब घोटाला सामने आया, तो छोटे-छोटे लोगों पर कार्रवाई करके मास्टरमाइंड राजीव रंगीला को देश से भगा दिया गया ताकि बड़े राजनेताओं, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का राज न खुल जाए. जिस तरह अयोध्या में लूट के मामले में छोटे लोगों पर कार्रवाई कर लीपापोती की गई, वैसा ही यहां भी किया जा रहा है.

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