सूरत में E20 पेट्रोल पर AAP का टाउन हॉल, माइलेज घटने से परेशान जनता
सूरत में E20 पेट्रोल को लेकर AAP ने टाउन हॉल आयोजित किया... कार्यक्रम में एक्सपर्ट्स ने E20 पेट्रोल से जुड़े मुद्दों और लोगों की बताई...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सूरत में E20 पेट्रोल को लेकर आम आदमी पार्टी यानी AAP ने एक टाउन हॉल आयोजित किया.. इस कार्यक्रम में एक्सपर्ट्स, मैकेनिक, गाड़ी मालिक, डिलीवरी राइडर्स, टैक्सी चालक.. और आम नागरिक शामिल हुए.. मंच खुला था और लोगों को अपनी समस्याएं सीधे सामने रखने का मौका दिया गया.. चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा था—E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद गाड़ियों के माइलेज में कमी, इंजन.. और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ता मेंटेनेंस खर्च और पेट्रोल के विकल्प को लेकर लोगों की मांग..
टाउन हॉल में मौजूद कई लोगों ने अपने निजी अनुभव साझा किए.. कुछ गाड़ी मालिकों ने दावा किया कि उनकी गाड़ियां पहले जहां 15 से 18 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती थीं.. वहीं अब 10 से 12 किलोमीटर प्रति लीटर के आसपास रह गई हैं.. कुछ लोगों ने माइलेज में 20 प्रतिशत तक की कमी महसूस होने की बात कही.. हालांकि माइलेज में कमी का वास्तविक स्तर गाड़ी के मॉडल, इंजन, ड्राइविंग कंडीशन और ईंधन की गुणवत्ता जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है..
E20 पेट्रोल आखिर है क्या? E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल जिसमें लगभग 20 प्रतिशत इथेनॉल.. और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है.. इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अनाज जैसी फसलों से तैयार किया जाता है.. सरकार की ओर से इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के पीछे कई उद्देश्य बताए गए हैं.. इनमें कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना, किसानों को बाजार उपलब्ध कराना और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना शामिल हैं..
भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया था.. और सरकार के अनुसार निर्धारित लक्ष्य समय से पहले हासिल किया गया.. अप्रैल 2025 के आसपास देश में E20 मानक के व्यापक इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया.. सरकार का कहना है कि इथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से तेल आयात में कमी आई है.. और किसानों, खासकर गन्ना उत्पादकों को भी इसका फायदा मिला है.. टाउन हॉल में लोगों का कहना था कि अगर ईंधन में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जा रही है.. तो पुराने वाहनों के मालिकों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.. खासकर उन गाड़ियों को लेकर चिंता जताई गई जो E20 के लिए डिजाइन नहीं की गई थी..
एक्सपर्ट्स ने समझाया कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होती है.. इसका सीधा असर ईंधन की खपत पर पड़ सकता है.. यानी समान मात्रा में E20 से किसी वाहन को पेट्रोल की तुलना में कुछ कम दूरी मिल सकती है.. आधिकारिक और तकनीकी आकलनों में यह कमी आमतौर पर सीमित बताई जाती है.. लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में वाहन के मॉडल.. और इस्तेमाल के तरीके के अनुसार अंतर अलग-अलग हो सकता है..
मैकेनिकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि कुछ पुराने वाहनों में फ्यूल फिल्टर, इंजेक्टर, फ्यूल पंप, रबर सील.. और अन्य फ्यूल सिस्टम पार्ट्स को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं.. कुछ मैकेनिकों ने दावा किया कि जिन फ्यूल फिल्टर को पहले ज्यादा दूरी पर बदला जाता था.. उन्हें अब कम दूरी पर बदलने की जरूरत पड़ रही है.. इसके अलावा इंजेक्टर चोक होने, पिकअप कम होने, इंजन में कंपन.. और कभी-कभी स्टार्टिंग से जुड़ी परेशानियों का भी जिक्र किया गया..
हालांकि, इन समस्याओं को केवल E20 की वजह से होने वाला निश्चित परिणाम मानना सही नहीं होगा.. वाहन की उम्र, रखरखाव, फ्यूल सिस्टम की स्थिति, ईंधन की गुणवत्ता.. और इस्तेमाल का तरीका भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.. फिर भी, टाउन हॉल में मैकेनिकों के अनुभव ने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि पुराने वाहनों के लिए E20 के संक्रमण को किस तरह आसान बनाया जाए..
गाड़ी मालिकों ने भी अपनी परेशानियां खुलकर बताईं.. एक वाहन मालिक ने दावा किया कि उनकी 2021 मॉडल की कार का माइलेज 14 किलोमीटर प्रति लीटर से घटकर.. लगभग 8 से 9 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया.. वहीं, दूसरे व्यक्ति ने बताया कि हर महीने उनके पेट्रोल खर्च में लगभग 2 से 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी महसूस हुई.. डिलीवरी राइडर्स और टैक्सी चालकों की चिंता इससे भी ज्यादा सीधी है.. उनके लिए वाहन सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि कमाई का जरिया है.. अगर माइलेज कम होता है, तो रोजाना ईंधन पर होने वाला खर्च बढ़ता है.. और इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ सकता है.. यही वजह है कि टाउन हॉल में यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी चर्चा तक सीमित नहीं रहा.. लोगों ने इसे अपनी जेब से जुड़ा मुद्दा बताया.



