एआई सम्मिट बना तमाशा पूरी दुनिया में कटवा दी भारत की नाक

27 देशों के करोड़ों लोगों ने लाइव देखी घनघोर बेईज्जती

  • एआई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को गंभीरता से लेने के बजाय बीजेपी ने इसे सर्कस बना दिया : कांग्रेस

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारत को एआई सुपरपॉवर बनाने के दावे जिस मंच से किए जा रहे थे। उसी मंच पर अव्यवस्था अविश्वसनीयता और अविश्वास का ऐसा मंजर दिखा कि पूरी दुनिया देखती रह गई। जिस इंडिया एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026 को भारत की तकनीकी ताकत का प्रतीक बताया जा रहा है वह धीरे धीरे एक ऐसे तमाशे में बदल गया जहां नवाचार से ज्यादा प्रचार तकनीक से ज्यादा तामझाम और क्षमता से ज्यादा कैमरों की चमक दिखाई दी। यह वही मंच था जहां भारत को भविष्य की डिजिटल महाशक्ति घोषित किया जाना था। लेकिन हकीकत यह रही कि यहां न तो व्यवस्था दिखी न ही तैयारी और न ही वह तकनीकी आत्मनिर्भरता जिसका दावा किया जा रहा था। एंट्री के लिए लंबी कतारें पंजीकरण के बाद भी अंदर न जा पाने वाले प्रतिभागी वाई-फाई तक का अभाव और सबसे बड़ा सवाल भारतीय नवाचार कहां था? कुल मिलाकर मौजूदा सम्मिट को देखकर तो यही लगता है कि भारत का एआई सपना केवल भाषणों और बैनरों तक सीमित है?

रोबोटिक डॉग और चीनी कनेक्शन आत्मनिर्भरता पर सवाल?

सम्मिट में गल्गोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित रोबोटिक डॉग चर्चा का केंद्र बन गया। दावा किया गया कि यह भारत की तकनीकी क्षमता का उदाहरण है। लेकिन जब इस मॉडल की वास्तविकता सामने आयी तो पता चला कि यह पूरी तरह भारतीय नवाचार नहीं था। इसमें विदेशी तकनीक का उपयोग किया गया था और इसे केवल प्रदर्शन के लिए लाया गया था। इससे सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर भारत एआई में आत्मनिर्भर बन रहा है तो विदेशी उत्पादों पर निर्भरता क्यों?

रोबोटिक डॉग ने कटवा दी नाक

सम्मिट में प्रदर्शित रोबोटिक डॉग ने भी सवाल खड़े कर दिए। यह दावा किया गया कि यह भारत की तकनीकी क्षमता का उदाहरण है लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि यह मॉडल चीन की यूनिट पर आधारित था जिसे केवल प्रदर्शन के लिए लाया गया था। अगर भारत एआई में इतना आगे है तो उसके अपने खुद के उत्पाद कहां हैं? यह केवल एक आयोजन की विफलता नहीं यह उस सोच की विफलता है जो तकनीक को विकास का माध्यम नहीं बल्कि प्रचार का हथियार बना रही है। जब तकनीक का मंच केवल फोटो आप में बदल जाए तो यह केवल तकनीक का नहीं बल्कि देश के भविष्य का अपमान होता है।

बेहद शर्मनाक स्थिति

सम्मिट में शामिल लोगों के मुताबकि आयोजन में भारी अव्यवस्था रही। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर तो जबर्दस्त रायता फैला हुआ है। हर कोई आयोजन को लेकर सवाल उठा रहा है। पत्रकार, कलमकार से लेकर भविष्य के होनहार छात्र हर कोई यही कह रहा है कि पहले तैयारियों करनी चाहिए थी फिर इस तरह का आयोजन यह स्थिति एक ऐसे आयोजन के लिए बेहद शर्मनाक थी जिसे भारत की तकनीकी ताकत का प्रतीक बताया जा रहा था।

  • रजिस्ट्रेशन के बावजूद लोगों को एंट्री नहीं मिला
  • एंट्री के लिए घंटों लंबी कतारें लगीं
  • कई प्रतिभागी अपने ही स्टाल तक नहीं पहुंच पाए
  • आयोजन स्थल पर वाई-फाई जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी

27 देशों के लोगों ने लाइव देखी घनघोर बेईज्जती

सम्मिट में वीआईपी मेहमानों को विशेष सुविधाएं दी गयी जबकि आम प्रतिभागियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इससे यह स्पष्ट हो गया कि आयोजन का फोकस तकनीक नहीं बल्कि वीआईपी उपस्थिति और मीडिया कवरेज पर था। जब तकनीकी आयोजन में तकनीक से ज्यादा वीआईपी कल्चर हावी हो जाए तो यह आयोजन अपने उद्देश्य से भटक जाता है। इस पूरे विवाद पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब अभी तक नहीं आया है। पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार एआई को भारत के भविष्य का आधार बता रही है लेकिन इस आयोजन ने इन दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने एआई मिशन के लिए हजारों करोड़ रुपये की घोषणा की है लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी तैयारी कमजोर दिखाई दे रही है। इस आयोजन को 27 से अधिक देशों ने लाइव देखा। यह भारत के लिए अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने का अवसर था। लेकिन अव्यवस्था और विवाद ने भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया। जब दुनिया देख रही हो और उसी समय आयोजन अव्यवस्थित हो जाए तो यह केवल आयोजन की विफलता नहीं बल्कि राष्ट्रीय छवि पर भी आघात होता है।

राहुल गांधी का अटैक ‘एआई नहीं पीआर का आयोजन’

इस पूरे विवाद को राजनीतिक धार तब मिली जब राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सम्मिट भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देने के बजाय केवल सरकारी छवि सुधारने का प्रयास था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग देश को मजबूत बनाने के बजाय केवल प्रचार के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार यह आयोजन भारत के नवाचार को बढ़ावा देने के बजाय विदेशी तकनीक को प्रदर्शित करने का मंच बन गया। कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि सरकार ने एआई जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को गंभीरता से लेने के बजाय इसे मजाक बना दिया।

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