बदायूं में नकली पोटाश बनाने के कथित धंधे का पर्दाफाश, 9 लोग हिरासत में
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में कृषि विभाग की टीम ने नकली उर्वरक तैयार किए जाने की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई की है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में कृषि विभाग की टीम ने नकली उर्वरक तैयार किए जाने की शिकायत पर बड़ी कार्रवाई की है।
बिल्सी कोतवाली क्षेत्र के खैरी गांव के पास एक बंद पड़े मैरिज लॉन में शनिवार शाम की गई छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नमक, कथित तैयार नकली पोटाश, खाली उर्वरक कट्टे और पैकिंग से संबंधित सामान बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक समेत नौ लोगों को पकड़े जाने की बात भी सामने आई है।
कृषि विभाग की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। टीम ने पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर परिसर की जांच की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यहां नमक और गेरू को मिलाकर पोटाश जैसा पदार्थ तैयार किए जाने का कथित काम चल रहा था। तैयार सामग्री को उर्वरक के कट्टों में भरकर पैक करने की प्रक्रिया भी किए जाने की बात सामने आई है।
बंद पड़े मैरिज लॉन में चल रहा था कथित कारोबार
बताया जा रहा है कि खैरी गांव के पास लंबे समय से बंद पड़े एक मैरिज लॉन को कथित तौर पर इस गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। बाहर से सामान्य दिखाई देने वाले परिसर के अंदर उर्वरक जैसी सामग्री तैयार करने और उसकी पैकिंग का काम किए जाने की जानकारी कृषि विभाग की टीम को मिली थी।
सूचना के आधार पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर छापेमारी की। टीम के पहुंचते ही परिसर में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सामग्री और उपकरणों की जांच शुरू की।
नमक और गेरू मिलाकर तैयार किया जा रहा था पोटाश जैसा पदार्थ
छापेमारी के दौरान मौके पर बड़ी मात्रा में नमक और गेरू समेत अन्य सामग्री मिलने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन्हीं पदार्थों को मिलाकर पोटाश जैसा पदार्थ तैयार किए जाने का कथित मामला सामने आया।
हालांकि, बरामद सामग्री वास्तव में किस प्रकार की है और उसमें कौन-कौन से रासायनिक तत्व मौजूद हैं, इसकी अंतिम पुष्टि जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल कृषि विभाग और पुलिस की कार्रवाई में इसे कथित नकली पोटाश तैयार करने से जोड़कर जांच की जा रही है।
करीब 300 बोरी नमक और 300 कट्टे तैयार सामग्री बरामद
कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी है। रिपोर्ट के अनुसार मौके से करीब 300 बोरी नमक, लगभग 300 कट्टे कथित तैयार नकली पोटाश और करीब 400 खाली उर्वरक कट्टे मिले हैं।
इसके अलावा पैकिंग और सिलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद किए गए। इनमें दो सिलाई मशीन, धागा, जनरेटर और गेरू सहित अन्य सामान शामिल बताया जा रहा है।
इतनी बड़ी मात्रा में कच्चा माल, तैयार सामग्री और खाली उर्वरक कट्टे मिलने के बाद जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी और तैयार सामग्री को कहां-कहां भेजा जाता था।
IPL के नाम वाले खाली कट्टे मिलने से बढ़े सवाल
छापेमारी के दौरान इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के नाम वाले खाली उर्वरक कट्टे मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इन कट्टों का कथित तौर पर इस्तेमाल तैयार सामग्री की पैकिंग के लिए किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
यदि जांच में यह बात प्रमाणित होती है कि किसी ब्रांड के नाम या पैकेजिंग का इस्तेमाल कर घटिया अथवा नकली सामग्री को असली उर्वरक के रूप में बाजार में भेजने की कोशिश की गई, तो मामला और गंभीर हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति पुलिस और कृषि विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फैक्ट्री संचालक समेत नौ लोग पकड़े गए
मौके पर कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालक समेत कुल नौ लोगों को पकड़े जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि परिसर में मौजूद लोगों की भूमिका क्या थी। पुलिस और संबंधित विभाग यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कथित तौर पर तैयार की जा रही सामग्री की सप्लाई किन स्थानों पर की गई और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
कहां-कहां हुई कथित सप्लाई, इसकी भी होगी जांच
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तैयार सामग्री को उर्वरक के रूप में बाजार में भेजा गया था, तो उसकी सप्लाई कहां-कहां हुई।
इसके लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे कट्टों, पैकिंग सामग्री, मौके से मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि सामग्री की खरीद कहां से की जाती थी और तैयार माल को किस माध्यम से आगे भेजा जाता था।
अगर पहले से तैयार सामग्री बाजार में भेजे जाने की पुष्टि होती है, तो उन दुकानदारों, सप्लायरों और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है, जिनके माध्यम से इसकी बिक्री या वितरण हुआ हो।
किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका
नकली या मानक के अनुरूप नहीं होने वाले उर्वरक की बिक्री किसानों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। किसान फसल की बेहतर पैदावार के लिए उर्वरक पर पैसा खर्च करते हैं। यदि किसी उत्पाद को पोटाश बताकर बेचा जाए, लेकिन उसमें निर्धारित पोषक तत्व मौजूद न हों, तो किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और फसल की गुणवत्ता या उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
हालांकि, इस मामले में बरामद सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति अभी जांच का विषय है। प्रयोगशाला परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद पदार्थ उर्वरक मानकों के अनुरूप था या नहीं।
कृषि विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप
खैरी गांव में कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की खबर फैलते ही आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद होने के बाद अब संबंधित विभाग पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं।
अधिकारियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित तौर पर यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी, इसमें कितने लोग शामिल थे और तैयार सामग्री को किस बाजार या क्षेत्र में पहुंचाया जा रहा था।
बरामद सामग्री की होगी जांच
इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई बरामद सामग्री की जांच रिपोर्ट पर भी निर्भर करेगी। नमक, गेरू और कथित तैयार पोटाश के नमूने लिए जाने के बाद उनकी रासायनिक जांच कराई जा सकती है। जांच रिपोर्ट से यह पता चल सकेगा कि तैयार पदार्थ में पोटाश के आवश्यक पोषक तत्व मौजूद हैं या नहीं और वह निर्धारित उर्वरक मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
जब तक प्रयोगशाला जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, बरामद सामग्री को कथित नकली पोटाश के तौर पर ही देखा जा रहा है।
पुलिस जांच में सामने आएगा पूरा नेटवर्क
फिलहाल पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और पकड़े गए लोगों से पूछताछ के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में यह सामने आना बाकी है कि इस कथित कारोबार का मुख्य संचालक कौन था, कच्चा माल कहां से आता था, तैयार सामग्री की पैकिंग और बिक्री कैसे की जाती थी तथा इसे किन इलाकों में पहुंचाया जाता था।
कृषि विभाग की छापेमारी के बाद सामने आए इस मामले ने उर्वरक की गुणवत्ता और किसानों तक पहुंचने वाले कृषि उत्पादों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर है।
रिपोर्ट:- संतुलित पाठक,बदायूं



