साइकिल खरीद में कथित घोटाला? AAP नेताओं ने सरकार से मांगा जवाब
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि रेखा गुप्ता की सरकार ने साइकिल खरीद में बड़ा घोटाला किया है. उन्होंने बताया कि लाल रंग की साइकिल हमने खुद रिटेल में खरीदी है जबकि भगवा रंग की साइकिल सरकारी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि रेखा गुप्ता की सरकार ने साइकिल खरीद में बड़ा घोटाला किया है. उन्होंने बताया कि लाल रंग की साइकिल हमने खुद रिटेल में खरीदी है जबकि भगवा रंग की साइकिल सरकारी है.
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की भाजपा सरकार के साइकिल घोटाले की पोल खोलने का दावा किया है. दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सरकारी और रिटेल साइकिल को पार्टी मुख्यालय पर मीडिया के सामने पेश किया, जो हूबहू एक ही हैं. उन्होंने बताया कि भाजपा की सात हजार वाली घोटाला साइकिल से 4200 वाली साइकिल बेहतर है. हमने यही साइकिल 4200 में खरीदी है, जबकि सरकार ने 6957 रुपए के रेट पर थोक में 1.30 लाख साइकिलें खरीदी है.
उन्होंने कहा कि सरकारी साइकिल पर स्काइलर का नकली स्टीकर लगा है, क्योंकि एक साल पहले ही कंपनी ने यह मॉडल बनाना बंद कर दिया है. हमारी साइकिल के टायर, रिम और ब्रेक ब्रांडेड हैं, लेकिन सरकारी साइकिल के लोकल व सस्ते हैं. हम दोनों साइकिलें लेकर सीएम और शिक्षा मंत्री के पास जाएंगे, ताकि वे खुद बताएं कि कौन साइकिल असली है.
लाल रंग की साइकिल की कीमत 4,000 रुपए
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि लाल रंग की साइकिल की रसीद मेरे नाम पर कटी है. इस साइकिल की कीमत 4,000 रुपए है और 200 रुपए का टैक्स लगाकर यह 4,200 रुपए में मिली है. भाजपा की सरकार ने 6,957 रुपए में साइकिल खरीदी और ऐसी 1 लाख 30 हजार साइकिलें खरीदी गईं. इन दोनों साइकिलों में हूबहू समानता है, लेकिन फर्क सिर्फ नीयत का है. हमने जो लाल रंग की साइकिल खरीदी है, वह एमटीबी (माउंटेन टेरेन बाइक) साइकिल है, जिसकी स्पेसिफिकेशन सरकार ने टेंडर में दी थी.
लाल साइकिल के टायर चौड़े और मजबूत हैं, जो मेट्रो कंपनी के ब्रांडेड टायर हैं. वहीं, भाजपा ने भगवा को बदनाम करने के लिए जो साइकिल दी है, उसके टायर और रिम लोकल व सस्ते हैं. हमने जो साइकिल खरीदी है, उसका टायर 350 से 500 रुपए का आता है, जबकि भाजपा द्वारा दी गई साइकिल का टायर 150 रुपए का आता है. लाल साइकिल में एल्युमिनियम के ब्रेक लगे हैं, जबकि सरकारी साइकिल में प्लास्टिक के ब्रेक हैं.
दिल्ली में स्काइलर साइकिल नहीं मिलती
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर कोई गूगल करेगा या हीरो साइकिल्स को फोन करेगा, तो वे बताएंगे कि असली स्काइलर का मॉडल वे एक साल पहले ही बंद कर चुके हैं. कोई दिल्ली में कहीं भी चला जाए, उसे स्काइलर साइकिल नहीं मिलेगी. झंडेवालान की होलसेल मार्केट में भी यह साइकिल नहीं मिलेगी, क्योंकि हीरो साइकिल्स इसे बंद कर चुकी है. इस मॉडल का जो ट्रेडमार्क था, वह एक्सपायर हो चुका है, कोई भी ट्रेडमार्क की वेबसाइट पर जाकर देख सकता है. फिर यह स्काइलर साइकिल कहां से लाई गई?
संजीव झा ने कहा कि हमारे इतना हंगामा करने के बावजूद अगर चर्चा नहीं करने दी जा रही है या मंत्री चर्चा में भाग नहीं ले रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें पता है कि अगर चर्चा होगी तो सारे भेद खुल जाएंगे. हम उम्मीद करते हैं कि रेखा गुप्ता कार्रवाई करें, अन्यथा अब हम सब लोग इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो और सीबीआई में भी करेंगे. इस तरह से दिल्ली के बच्चों की साइकिल में तो हम लूट नहीं होने देंगे. हम उम्मीद करते हैं कि जब हम शिकायत करेंगे, तो एंटी करप्शन ब्यूरो इसकी ठीक से जांच करेगा और कार्रवाई करेगा.
साइकिल मिस्त्री ने बताया अंतर
इस दौरान सौरभ भारद्वाज ने एक साइकिल मिस्त्री को बुलाकर उससे साइकिलों का अंतर बताने को कहा. मिस्त्री ने बताया कि लाल साइकिल में एल्युमिनियम की क्लच है और टायर मेट्रो कंपनी का है, जिसकी कीमत 350 रुपए है. वहीं, सरकारी साइकिल में क्लच प्लास्टिक की है और लोकल टायर लगा है, जिसकी कीमत 150 रुपए है. सरकारी साइकिल की रिम भी हल्की है और पेडल वाली क्रैंक भी हल्की है. मिस्त्री ने बताया कि उनकी दुकान पर सरकारी वाली ऐसी 2-4 साइकिलें रोज आती हैं, जिनमें कुछ न कुछ ढीला रहता है.



