अमित चावड़ा का मोदी सरकार पर निशाना, चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल

गुजरात की राजनीति में हलचल तेज हो गई है... कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने राज्य में डुप्लीकेट वोटर... और कथित वोट चोरी को...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.. राज्य में कथित तौर पर वोट चोरी या डुप्लीकेट वोटर आईडी से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं.. कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने इन आरोपों को लेकर केंद्र सरकार.. और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठाए हैं.. उनका कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है.. बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक व्यवस्थित गड़बड़ी है.. आपको बता दें कि अमित चावड़ा का दावा है कि.. गुजरात में बड़ी संख्या में डुप्लीकेट मतदाता मौजूद हैं.. उनका आरोप है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वोटर आईडी कार्ड बनाए गए हैं.. कुछ मामलों में तो एक ही व्यक्ति, एक ही फोटो और एक ही नाम के साथ 5 अलग-अलग वोटर आईडी नंबर होने की बात कही जा रही है..

जानकारी के मुताबिक यह मामला खासतौर पर सूरत और नवसारी जैसे क्षेत्रों में ज्यादा सामने आया है.. नवसारी जिले की चौर्यासी विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए चावड़ा ने कहा कि यहां करीब 30,000 डुप्लीकेट मतदाता होने के प्रमाण पहले भी दिए जा चुके हैं.. उनका यह भी दावा है कि अगर पूरे गुजरात में इस तरह की जांच की जाए.. तो यह संख्या 62 लाख से 70 लाख तक पहुंच सकती है.. चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए समय-समय पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन किया जाता है.. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि.. मतदाता सूची में कोई फर्जी नाम, डुप्लीकेट एंट्री या मृत व्यक्तियों के नाम शामिल न हों..

लेकिन आरोप यह है कि SIR जैसी प्रक्रिया के बावजूद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है.. चावड़ा का कहना है कि SIR से पहले भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था.. और अब भी हालात जस के तस बने हुए हैं.. आपको बता दें कि इन आरोपों के बाद सबसे बड़ा सवाल चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उठ रहा है.. विपक्ष का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में डुप्लीकेट वोटर मौजूद हैं.. तो यह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है.. अमित चावड़ा ने यह भी सवाल किया कि आखिर चुनाव आयोग किसके इशारे पर काम कर रहा है.. और किसे इसका लाभ मिल रहा है.. उनका आरोप है कि यह सब एक सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है.. ताकि चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके..

हालांकि इन आरोपों पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी या केंद्र सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.. आमतौर पर इस तरह के मामलों में सरकार का पक्ष होता है कि.. चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है.. और वह पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर लगाए गए इन आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है.. बीजेपी के समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक रणनीति और चुनावी माहौल बनाने की कोशिश बता सकते हैं..

 

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