अमित चावड़ा का सरकार पर बड़ा हमला, किसके आदेश पर हुई तोड़फोड़?
100 से अधिक गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने सरकार को घेरा है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बार फिर विवाद की आंधी चल रही है.. सूरत शहर में गरीबों के 100 से ज्यादा घरों को बिना किसी नोटिस के तोड़ दिया गया.. इस घटना पर कांग्रेस पार्टी के नेता.. और विपक्ष के नेता अमित चावड़ा ने भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला है.. और उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई पुलिस की सुरक्षा में बिल्डरों.. और जमीन माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए प्रशासन.. और सरकार की मिलीभगत से की गई.. 29 तारीख को हुई इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है..
अमित चावड़ा ने कहा कि म्युनिसिपल कमिश्नर.. और पुलिस कमिश्नर, दोनों के पास इस गैर-कानूनी तोड़फोड़ का कोई जवाब नहीं है.. लगातार 10 दिनों से विरोध-प्रदर्शन.. और प्रतिनिधिमंडल भेजने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.. अगर अगले तीन दिनों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई.. और पीड़ित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई.. तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल सूरत पहुंचेगा.. और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर जोरदार आंदोलन शुरू करेगा.. सूरत के कतारगाम इलाके के नासिर नगर में यह घटना घटी.. 3 जून 2026 की सुबह अचानक भारी-भरकम बुलडोजर और मशीनें पहुंचीं.. पुलिस की मौजूदगी में 100 से ज्यादा गरीब परिवारों की झोपड़ियां.. और छोटे-छोटे घर तोड़ दिए गए.. देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे के ढेर में तब्दील हो गया.. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोते-चिल्लाते रह गए.. उनके सारे सामान, कपड़े, बर्तन और जरूरी चीजें मलबे के नीचे दब गईं..
वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई के दौरान सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारी और पुलिस, दोनों मौजूद थे.. लेकिन जब पूछा गया कि यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई.. तो किसी ने जवाब नहीं दिया.. म्युनिसिपल कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.. यह स्थिति देखकर लोग हैरान हैं कि.. इतनी बड़ी कार्रवाई बिना किसी की जानकारी के कैसे हो गई.. कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने इस घटना को साजिश बताया.. और उन्होंने कहा कि यह तोड़फोड़ बिल्डरों और जमीन माफिया के इशारे पर की गई है.. सरकार और प्रशासन में बैठे लोग इन माफिया के साथ मिले हुए हैं.. गरीबों की जमीन हड़पकर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट और अपार्टमेंट बनाने की प्लानिंग चल रही है..
चावड़ा ने कहा कि सूरत जैसे शहर में गरीब मजदूर, रिक्शा चालक, छोटे दुकानदार और कामगार रहते हैं.. इन लोगों के पास न कोई पक्का घर है, न कोई दस्तावेज.. वे सालों से यहां रह रहे थे.. अचानक बिना नोटिस दिए घर तोड़ देना पूरी तरह गैर-कानूनी है.. कानून कहता है कि किसी भी संपत्ति को तोड़ने से पहले नोटिस देना जरूरी है.. सुनवाई का मौका देना जरूरी है.. लेकिन यहां कुछ भी नहीं किया गया.. घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया.. वे लगातार SMC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.. अमित चावड़ा और अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी कई बार कमिश्नर से मुलाकात की, ज्ञापन सौंपे.. लेकिन 10 दिन बीत गए, कोई कार्रवाई नहीं हुई.. कोई जिम्मेदार व्यक्ति गिरफ्तार नहीं हुआ.. पीड़ित परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं.. बारिश का मौसम आने वाला है.. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.. और महिलाओं को बहुत परेशानी हो रही है..
अमित चावड़ा ने साफ चेतावनी दी है.. उन्होंने कहा कि अगर तीन दिन के अंदर जिम्मेदार अधिकारियों और माफिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई.. पीड़ितों को तुरंत वैकल्पिक जगह और मुआवजा नहीं दिया गया.. तो पूरे गुजरात कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल सूरत पहुंचेगा.. वहां स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा.. कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार गरीबों की रक्षा करने के बजाय माफिया की मदद कर रही है.. सूरत में पिछले कई सालों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं.. जहां गरीबों की जमीन पर कब्जा करके बड़े प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं.. नासिर नगर के रहने वाले कई परिवारों ने अपनी दर्दभरी कहानियां सुनाईं.. एक गरीब मजदूर ने बताया कि वह 20 साल से यहां रह रहा था.. उसने अपनी मेहनत से छोटा-सा घर बनाया था.. अब सब कुछ खत्म हो गया.. उसके बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं.. परिवार रात में भी डर के मारे सो नहीं पाता..
जानकारी के मुताबिक एक महिला ने रोते हुए कहा कि बर्तन-भांडे, कपड़े, सब मलबे में मिल गए.. खाना बनाने के लिए चूल्हा भी नहीं बचा.. बच्चे भूखे रह जाते हैं.. बुजुर्ग बीमार पड़ गए हैं.. ऐसे सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए हैं.. कांग्रेस ने इन परिवारों की मदद के लिए राहत सामग्री भी पहुंचाई है.. लेकिन स्थायी समाधान की जरूरत है.. भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.. कुछ स्थानीय नेता कह रहे हैं कि यह अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई थी.. लेकिन जब पूछा जाता है कि नोटिस क्यों नहीं दिया गया.. और यह कार्रवाई किसके आदेश पर हुई, तो जवाब नहीं मिलता.. विपक्ष इसे चुप्पी बता रहा है.. अमित चावड़ा कहते हैं कि अगर सरकार सही है.. तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही.. उनका कहना है कि यह साफ है कि बिल्डर लॉबी का दबाव है..



