आतंकवाद मुद्दे पर आर्मी चीफ सख्त, पाकिस्तान को दी चेतावनी

सेना प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो उसे ये तय करना होगा कि वो भूगोल का हिस्सा बनकर रहना चाहता है या फिर इतिहास बनने में रुचि है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने आतंकी गतिविधियों को बढ़ा दिया है, ऐसे में जनरल उपेंद्र द्विवेदी की तरफ से उसे दो विकल्प दिए गए हैं. सेना प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है तो उसे ये तय करना होगा कि वो भूगोल का हिस्सा बनकर रहना चाहता है या फिर इतिहास बनने में रुचि है.

सेना संवाद कार्यक्रम के दौरान सिविल-मिलिट्री इंटरैक्शन में बोलते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि अगर पाकिस्तान लगातार आतंकवादियों को पनाह देता रहा और भारत के खिलाफ गतिविधियां जारी रखता है, तो उसे ये तय करना होगा कि वो भूगोल का हिस्सा बनकर रहना चाहता है या फिर इतिहास का. उन्होंने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. सेना प्रमुख का ये बयान ऐसे समय आया है जब सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ को लेकर भारत लगातार पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है.

‘सेना संवाद कार्यक्रम के दौरान सिविल-मिलिट्री इंटरैक्शन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रह गया है. अब साइबर, स्पेस और कॉग्निटिव डोमेन भी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने 2026-27 को ‘ईयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी’ के रूप में घोषित किया है. सेना अब नई तकनीक और डेटा आधारित युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर फोकस कर रही है.

सेना युवा पीढ़ी की मदद चाहती है
सेना प्रमुख ने कहा कि जटिल समस्याओं के आसान समाधान खोजने के लिए सेना युवा पीढ़ी की मदद चाहती है. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में हुए सिविल डिफेंस अभ्यास में राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी NCC कैडेट्स ने अहम भूमिका निभाई.

सेना संवाद कार्यक्रम देश और भारतीय सेना द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ मनाए जाने के कुछ ही दिनों बाद आयोजित किया गया. सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे. बाद में पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले शुरू कर दिए और भारत की तरफ से किए गए सभी जवाबी हमले भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत ही हुए. दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच लगभग 88 घंटे तक चला. ये सैन्य संघर्ष, 10 मई की शाम को दोनों पक्षों के बीच एक सहमति बनने के बाद खत्म हो गया.

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