बांदा पुलिस की साइबर ठगों पर डिजिटल स्ट्राइक: दो पीड़ितों के खाते में लौटाई गई पूरी 1.44 लाख की रकम
बांदा पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पीड़ितों की ठगी गई ₹1.44 लाख की पूरी रकम वापस कराई। यूपीआई और फर्जी कॉल से हुई ठगी पर तेज जांच कर पुलिस ने बैंक समन्वय से पैसा होल्ड कराकर सफल रिकवरी की।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ऑनलाइन ठगी की बढ़ती घटनाओं के बीच जब आम लोगों का भरोसा डिजिटल लेन-देन पर डगमगाने लगता है, तब कानून व्यवस्था की तेज़ और तकनीकी कार्रवाई उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आती है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आया है, जहां साइबर क्राइम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो पीड़ितों के खाते में ठगी गई पूरी रकम वापस कराकर बड़ी सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई न सिर्फ पुलिस की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि समय पर शिकायत और सही दिशा में जांच से साइबर अपराधियों की चालाकी को नाकाम किया जा सकता है।
कैसे हुआ साइबर ठगी का खेल?
पहला मामला शहर के दिनेश मोहन सिंह से जुड़ा है। उनके बच्चे मोबाइल पर गेम खेल रहे थे, तभी साइबर ठगों ने फर्जी कॉल और डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए उनके खाते से ₹84,711 की राशि निकाल ली। दूसरे मामले में अलीगंज निवासी राजकुमार पटेल को यूपीआई ट्रांजैक्शन के माध्यम से निशाना बनाया गया। ठगों ने उनसे ₹60,000 की ठगी कर ली, जिससे कुछ ही मिनटों में उनके खाते से पैसे गायब हो गए। दोनों मामलों में तरीका अलग था, लेकिन उद्देश्य एक ही, लोगों की छोटी सी चूक का फायदा उठाकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेना।
पुलिस की तेज़ कार्रवाई ने बदला पूरा मामला
जैसे ही दोनों पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई, पुलिस टीम तुरंत सक्रिय हो गई। पलाश बंसल के निर्देशन में तकनीकी जांच शुरू की गई और बैंकिंग चैनलों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। डिजिटल ट्रैकिंग और फंड-फ्रीजिंग प्रक्रिया के जरिए दोनों मामलों में ठगी गई राशि को होल्ड कर लिया गया। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए ₹1,44,711 की पूरी रकम पीड़ितों के खातों में वापस भेज दी गई। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल पीड़ितों को राहत दी, बल्कि साइबर अपराधियों की योजना को भी पूरी तरह विफल कर दिया।
पीड़ितों को मिली राहत, पुलिस की सराहना
अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने के बाद दोनों पीड़ितों ने राहत की सांस ली। उन्होंने बांदा पुलिस की तेज़ कार्रवाई और तकनीकी दक्षता की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि यदि समय रहते शिकायत दर्ज की जाए, तो साइबर ठगी के मामलों में पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
जांच टीम की अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में शामिल रहे:
- प्रभारी निरीक्षक राममोहन राय
- उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार सिंह
- कांस्टेबल धर्मेन्द्र कुमार
- हिमांशु वर्मा
- ललित कुमार
- महिला कांस्टेबल ज्योति उपाध्याय
इन सभी अधिकारियों की तकनीकी समझ और समन्वय के चलते यह सफल रिकवरी संभव हो सकी।
पुलिस का संदेश: सतर्क रहें, तुरंत शिकायत करें
बांदा पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सतर्कता है। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या यूपीआई ट्रांजैक्शन के मामले में तुरंत सतर्क हो जाएं और देरी किए बिना शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि समय पर सूचना मिलने पर बैंकिंग सिस्टम के जरिए रकम को फ्रीज कर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
रिपोर्ट – इक़बाल खान



