नारायण साई को बड़ा झटका | सजा पर रोक नहीं | कोर्ट ने याचिका ठुकराई

रेप मामले में दोषी नारायण साई की मुश्किलें और बढ़ गई हैं... कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की न्याय व्यवस्था में आसाराम बापू के बेटे नारायण साई को एक बड़ा झटका लगा है.. गुजरात हाईकोर्ट ने नारायण साई की उस याचिका को खारिज कर दिया.. जिसमें उन्होंने 2019 में सूरत कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने की मांग की थी.. जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वच्छानी की डिवीजन बेंच ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए.. उन्हें प्रथम दृष्टया यह नहीं लगता कि नारायण साई को अपील में बरी होने का उचित मौका मिल सकता है.. अदालत ने साफ कहा कि गुण-दोष के आधार पर सजा निलंबित करने या जमानत देने के लिए कोई पर्याप्त आधार नहीं मिलता.. यह फैसला नारायण साई और उनके समर्थकों के लिए बड़ा झटका है.. वहीं अब उन्हें जेल में ही रहना पड़ेगा क्योंकि उनकी अपील अभी लंबित है..

वर्ष 2013 में सूरत की एक पूर्व महिला भक्त ने नारायण साई पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था.. महिला ने दावा किया कि नारायण साई ने 2001 के आसपास उनके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए.. और उन्हें धमकाया और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया.. अप्रैल 2019 में सूरत की विशेष अदालत ने नारायण साई को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक यौनाचार), 323 (मारपीट), 506-2 (आपराधिक धमकी).. और 120-B (षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया.. और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई.. अदालत ने उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.. इसके बाद नारायण साई ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील दायर की.. जो अभी तक लंबित है.. इस दौरान उन्होंने कई बार जमानत या सजा निलंबन की याचिका दायर की.. लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी..

हाईकोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की.. अदालत ने कहा कि नारायण साई ने 11 साल से ज्यादा जेल की सजा काट ली है.. लेकिन वे अपनी अपील की शीघ्र सुनवाई में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे.. बल्कि उन्होंने बार-बार अस्थायी या स्थायी जमानत की याचिकाएं दायर करके कार्यवाही में देरी की रणनीति अपनाई.. कोर्ट ने इसे देरी की चाल बताया.. और कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है.. पीठ ने कहा कि हमारे लिए प्रथम दृष्टया इस निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है कि.. आवेदक-दोषी को बरी होने का उचित मौका है.. अदालत ने अपराध की गंभीर प्रकृति को भी ध्यान में रखा..

वहीं यह फैसला सिर्फ सजा निलंबन की याचिका पर है.. मुख्य अपील की सुनवाई बाद में होगी। नारायण साई स्वयंभू संत आसाराम बापू के बेटे हैं.. आसाराम पर भी कई महिलाओं से बलात्कार और अन्य गंभीर आरोपों के मामले चल रहे हैं.. या सजा हो चुकी है.. पिता-पुत्र दोनों जेल में हैं.. नारायण साई को उनके अनुयायी पूज्य नारायण साई कहकर पुकारते थे.. उन्होंने गुजरात और अन्य राज्यों में आश्रम चलाए.. आरोप है कि आश्रमों में महिलाओं.. और भक्तों का शोषण होता था.. 2013 का यह केस उनके खिलाफ कई मामलों में से एक है.. सूरत केस में दो बहनों ने भी आरोप लगाए थे..

 

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