2027 से पहले बड़ा सियासी संदेश, गुजरात में कांग्रेस जीरो, राज्यसभा की 4 सीटों पर BJP का कब्जा
गुजरात की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है... राज्यसभा की चारों सीटों पर बीजेपी ने उम्मीदवार उतार दिए हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात की चार राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है.. पार्टी ने राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जीतेन्द्र मेघजीभाई कंजारिया को इन सीटों से चुनाव लड़ने का टिकट दिया है.. इस घोषणा के साथ अब यह लगभग तय हो गया है कि.. 18 जून को होने वाले चुनाव में बीजेपी चारों सीटें जीत जाएगी..
वहीं इस फैसले का सबसे बड़ा असर कांग्रेस पार्टी पर पड़ा है.. गुजरात राज्य के गठन के बाद यह पहला मौका होगा.. जब राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस का कोई भी सदस्य नहीं होगा.. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल खत्म हो रहा है.. और उनके जाने के बाद कांग्रेस गुजरात में राज्यसभा स्तर पर पूरी तरह शून्य हो जाएगी.. बीजेपी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि केंद्रीय चुनाव समिति ने इन चारों नामों को मंजूरी दे दी है.. पार्टी के मुताबिक ये उम्मीदवार गुजरात की विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करते हैं.. और पार्टी को मजबूती प्रदान करेंगे..
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है.. नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को होगी.. उम्मीदवार 11 जून तक अपना नाम वापस ले सकते हैं.. मतदान 18 जून को होगा.. और उसी दिन मतगणना भी की जाएगी.. क्योंकि बीजेपी के पास विधानसभा में भारी बहुमत है, इसलिए उम्मीद है.. कि चारों उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा सकते हैं..
आपको बता दें कि गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं.. लेकिन एक सीट खाली होने के कारण फिलहाल 181 सदस्य हैं.. इनमें बीजेपी के 161 विधायक हैं.. कांग्रेस के पास सिर्फ 12 विधायक हैं.. आम आदमी पार्टी के पास 4 और दो निर्दलीय विधायक हैं.. कांग्रेस के पास इतने वोट नहीं हैं कि.. वह अपना उम्मीदवार जिता सके.. इसलिए कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का फैसला नहीं लिया है..
जीतेन्द्र मेघजीभाई कंजारिया युवा और जमीनी कार्यकर्ता हैं.. जो पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.. इन उम्मीदवारों के चयन से बीजेपी ने सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है.. पाटीदार, ओबीसी, आदिवासी और महिला वोट बैंक को ध्यान में रखकर पार्टी ने संतुलित फैसला लिया है..
कांग्रेस के लिए यह चुनाव बहुत निराशाजनक रहा.. शक्तिसिंह गोहिल लंबे समय से गुजरात का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में कर रहे थे.. उनका कार्यकाल खत्म होने के बाद कांग्रेस के पास कोई विकल्प नहीं बचा.. लोकसभा में कांग्रेस का सिर्फ एक सांसद, गेनीबेन ठाकोर, बनासकांठा से है.. राज्यसभा में अब गुजरात से कांग्रेस का खाता पूरी तरह बंद हो गया है.. कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि वे भविष्य के चुनावों में स्थिति सुधारने की कोशिश करेंगे.. लेकिन फिलहाल संख्या बल की कमी उनके हाथ बांध रही है..
जिन चार सीटों पर चुनाव हो रहे हैं.. उनमें बीजेपी के तीन मौजूदा सांसद नरहरि अमीन, रामभाई मोकरिया और रमीलाबेन बारा शामिल हैं.. इनका कार्यकाल भी खत्म हो रहा है.. पार्टी ने इनमें से किसी को दोबारा मौका नहीं दिया है.. इसके बजाय नए और जमीनी स्तर के नेताओं को तरजीह दी गई है.. पार्टी का मानना है कि 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे चेहरों को राज्यसभा भेजना बेहतर होगा.. जो संगठन को मजबूत कर सकें और जनता से सीधा जुड़ाव रखते हों..
आपको बता दें कि गुजरात लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रहा है.. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोनों गुजरात से जुड़े हैं.. यही वजह है कि पार्टी यहां हर चुनाव में मजबूत स्थिति में रहती है.. राज्यसभा चुनाव में भी बीजेपी को किसी तरह की चुनौती नहीं मिल रही है.. 161 विधायकों के बल पर बीजेपी आसानी से चारों उम्मीदवारों को जिता लेगी.. यहां तक कि अगर कोई उम्मीदवार चुनाव लड़ने आता भी है.. तो भी बीजेपी की जीत पक्की मानी जा रही है..
राज्यसभा देश का उच्च सदन है.. यहां चुने गए सांसद कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.. गुजरात से चुने जाने वाले ये चार सांसद अगले छह वर्षों तक राज्य के मुद्दों को संसद में उठाएंगे.. खासकर किसानों, युवाओं, महिलाओं, उद्योग और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज मजबूत होगी.. बीजेपी के नए उम्मीदवारों से उम्मीद की जा रही है कि वे केंद्र.. और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखेंगे..
आम आदमी पार्टी के पास भी सिर्फ 4 विधायक हैं.. इसलिए वह भी चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है.. निर्दलीय विधायकों के पास भी पर्याप्त ताकत नहीं है.. ऐसे में पूरा चुनाव बीजेपी के लिए एकतरफा होता दिख रहा है.. कांग्रेस और AAP दोनों ही गुजरात में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.. लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है.. 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों पार्टियां संगठन स्तर पर काम कर रही हैं..
बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन में जातीय और सामाजिक संतुलन का पूरा ध्यान रखा है.. गुजरात में पाटीदार, ओबीसी, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग बहुत महत्वपूर्ण हैं.. इन वर्गों को साथ लेकर ही पार्टी लंबे समय से सत्ता में बनी हुई है.. नए सांसद इन वर्गों की समस्याओं को बेहतर तरीके से उठा सकेंगे.. खासकर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस रहेगा..



