अपनी ही सरकार में बेइज्जत हुए बीजेपी नेता? मंत्री दरबार की तस्वीर ने मचाया बवाल
मीरजापुर में बिजली समस्या लेकर कैबिनेट मंत्री के दरबार पहुंचे बीजेपी नेताओं और ब्लॉक प्रमुख को कथित तौर पर बैठने तक के लिए कुर्सी नहीं मिली। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सरकार और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मीरजापुर में इन दिनों एक तस्वीर और उससे जुड़ी चर्चा राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तेजी से फैल रही है। मामला किसी विपक्षी दल के विरोध का नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल के नेताओं की अपनी ही सरकार और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। बिजली संकट को लेकर कैबिनेट मंत्री के दरबार में पहुंचे बीजेपी नेताओं को जिस तरह का व्यवहार झेलना पड़ा, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी अक्सर बंद कमरों तक सीमित रह जाती है, लेकिन जब ऐसी तस्वीरें और चर्चाएं सार्वजनिक होने लगें तो यह सिर्फ व्यक्तिगत उपेक्षा नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के बीच बढ़ती दूरी का संकेत भी माना जाता है।

बिजली समस्या लेकर मंत्री दरबार पहुंचे थे बीजेपी नेता
जानकारी के मुताबिक, चुनार विधानसभा क्षेत्र के सीखड़ ब्लॉक प्रमुख सत्येंद्र कुमार सिंह उर्फ गुड्डी सिंह समेत भारतीय जनता पार्टी के कुछ स्थानीय नेता क्षेत्र में लगातार बनी बिजली समस्या को लेकर एक कैबिनेट मंत्री के आवास पहुंचे थे। नेताओं का उद्देश्य सीखड़ और मेड़िया फीडर से जुड़ी खराब बिजली व्यवस्था की शिकायत करना और समाधान की मांग उठाना था।
लेकिन वहां जो दृश्य देखने को मिला, वही अब चर्चा का केंद्र बन गया है। आरोप है कि मंत्री दरबार में पहुंचे बीजेपी नेताओं को बैठने तक के लिए कुर्सी नहीं दी गई और वे खड़े-खड़े ही अपना पत्रक सौंपते नजर आए। दूसरी ओर मंत्री जी बैठे हुए पत्रक लेते दिखाई दिए।
स्थानीय स्तर पर यह घटना तेजी से चर्चा में है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सत्ताधारी दल के ब्लॉक प्रमुख और पार्टी कार्यकर्ताओं को ऐसा व्यवहार झेलना पड़ रहा है, तो आम जनता के साथ कैसा रवैया अपनाया जाता होगा।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता बनी बिजली व्यवस्था
बताया जा रहा है कि सीखड़ और मेड़िया फीडर से जुड़े इलाकों में लंबे समय से बिजली आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। सीखड़ ब्लॉक क्षेत्र को मिर्च-मसाला समेत कई कृषि उत्पादों का बड़ा केंद्र माना जाता है, जहां खेती पूरी तरह सिंचाई और बिजली व्यवस्था पर निर्भर रहती है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि लगातार कटौती और खराब बिजली व्यवस्था के कारण खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। पानी की समस्या बढ़ने से फसल उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि समस्या लेकर मंत्री दरबार पहुंचे थे ताकि जल्द समाधान निकल सके।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चर्चा
घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई लोग इसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बता रहे हैं, तो कुछ इसे सत्ता और संगठन के बीच बढ़ती दूरी का संकेत मान रहे हैं। हालांकि मंत्री पक्ष की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में स्थानीय कार्यकर्ता ही किसी भी दल की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं। ऐसे में यदि जमीनी स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना बढ़ती है तो इसका असर संगठन की छवि और जनसंपर्क दोनों पर पड़ सकता है।
सवाल सिर्फ कुर्सी का नहीं, सम्मान का भी
यह पूरा मामला अब केवल कुर्सी मिलने या न मिलने तक सीमित नहीं रह गया है। स्थानीय स्तर पर इसे सम्मान और संवाद की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के दरबार में समस्या लेकर आने वालों को कम से कम सम्मानजनक व्यवहार मिलना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या पार्टी का कार्यकर्ता।
फिलहाल मीरजापुर का यह मामला जिले में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग अब यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि बिजली समस्या के समाधान के साथ-साथ इस पूरे विवाद पर संबंधित पक्ष की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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