बीजेपी नेता के बिगड़े बोल, धार्मिक ग्रंथों पर गलत बयानबाजी पड़ी भारी

नेताओं का कहना है कि ऐसे बयान किसी नेता की व्यक्तिगत विचारधारा के तहत हो सकता हैं न की पार्टी के।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में एक तरफ जहां हिंदुत्व का खूब प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, हिंदुत्व के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकते हुए अपना उल्लू सीधा किया जा रहा है।

तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेता ही हिन्दू ग्रंथों को गालियां दे रहे हैं, अपमानजनक बातें बोलते हुए नजर आ रहे हैं। लेकिन भाजपा आलाकमान नेताओं के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।

वहीं सफाई में नेताओं का कहना है कि ऐसे बयान किसी नेता की व्यक्तिगत विचारधारा के तहत हो सकता हैं न की पार्टी के। खैर सियासी गलियारों में हो रही फजीहत को बचाने के लिए भले ही ऐसी दलीलें दी जा रही हों लेकिन असल तो ये है कि बीजेपी के लोग किसी के सगे नहीं हैं और न ही ये कभी किसी के सगे हो सकते हैं।

महोबा में बीजेपी के जिला पंचायत अध्यक्ष जयप्रकाश अनुरागी ने रामायण और गीता जैसे पवित्र ग्रंथों पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया है. संविधान की आड़ में कथावाचकों पर कटाक्ष करते उनके इस बयान ने तूल पकड़ लिया है. बीजेपी ने इसे व्यक्तिगत विचार बताकर पल्ला झाड़ लिया है और मामले की जानकारी शीर्ष नेतृत्व को भेज दी है.

महोबा जनपद के प्रथम नागरिक और जिला पंचायत अध्यक्ष जयप्रकाश अनुरागी अपने एक विवादित बयान को लेकर चौतरफा घिर गए हैं. कुलपहाड़ तहसील के सुगिरा गाँव में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में अनुरागी ने मंच से कुछ ऐसा कहा जिससे न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है, बल्कि अपनी ही पार्टी के अनुशासन को भी तार-तार कर दिया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में जयप्रकाश अनुरागी माथे पर तिलक लगाए हुए संविधान की बात कर रहे हैं, लेकिन इसी दौरान उन्होंने रामायण और गीता जैसे पवित्र ग्रंथों पर आपत्तिजनक बयान दिया. उन्होंने कहा कि रामायण और गीता को घर-घर पहुंचाने की बात तो करते हैं, लेकिन संविधान की पूजा की सलाह कोई नहीं देता.

अनुरागी ने कथावाचकों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे रामकथा और भागवत तो सुनाते हैं, लेकिन संविधान के बारे में चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं समाज जागरूक होकर अपने अधिकारों की मांग न करने लगे.

हालांकि इस बयान के वायरल होते ही भारतीय जनता पार्टी ने खुद को इससे पूरी तरह अलग कर लिया है. कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के महामंत्री संत विलास शिवहरे ने इसे मानसिक संकीर्णता करार देते हुए कहा कि आस्था और संविधान में भेद करना गलत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जयप्रकाश अनुरागी का व्यक्तिगत विचार है, पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है.

गौरतलब है की इस मामले के सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है और बीजेपी पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है जब भाजपा के नेताओं ने ऐसे बयान दिए हों और आलोचना न हुई हो.

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