Iran ने America को फिर दिखाई आंख, मांगा युद्ध का हर्जाना, मुश्किल में Israel
अमेरिका चाहता है कि ये टोल खत्म किया जाए और ट्रंप ने इसे डील की अहम शर्त बना दिया है...दूसरी ओर, ईरान ने पश्चिम एशिया के उन देशों से मुआवजा मांगा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमेरिका और ईरान के बीच जैसे ही सीजफायर की स्थिति बनी…हालात ने एक नया मोड़ ले लिया है और इस बार दबाव सीधे इजराइल पर बढ़ता नजर आ रहा है…डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अब जंग का दौर पीछे छूट चुका है और अमेरिका सीधे ईरान के साथ समझौते की दिशा में आगे बढ़ेगा…
कहा तो ये तक जा रहा है कि इस डील का ऐलान खुद ट्रंप कर सकते हैं…लेकिन इस संभावित समझौते से पहले कई पेच सामने आ रहे हैं…सबसे बड़ा मुद्दा है…युद्ध के दौरान हुए नुकसान का हर्जाना…ईरान साफ तौर पर कह चुका है कि उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और वो इसकी भरपाई चाहता है…इसी के तहत उसने रणनीतिक रास्तों और व्यापारिक मार्गों पर टोल लगाकर वसूली शुरू कर दी है…
वहीं अमेरिका चाहता है कि ये टोल खत्म किया जाए और ट्रंप ने इसे डील की अहम शर्त बना दिया है…दूसरी ओर, ईरान ने पश्चिम एशिया के उन देशों से मुआवजा मांगा है…जो इस युद्ध में शामिल रहे…जिसमें सबसे ज्यादा दबाव इजराइल पर है…क्योंकि ईरान इस जंग की जड़ उसे ही मानता है…अब ट्रंप के सामने बड़ी मुश्किल हैं…
ऐसे में सवाल उठा कि क्या इजराइल से ईरान को हर्जाना दिलवाया जाए या फिर ईरान की टोल वसूली को मान्यता दी जाए?…दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका खुद भी इस वसूली में हिस्सेदारी चाहता है…जिसने इस पूरे विवाद को नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है…..तो आखिर ईरान ने पश्चिम एशिया के किन देशों से मुआवजा मांगा है…और उस मुआवजे की कीमत क्या है?…जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं…
मिडिल ईस्ट में हालात भले ही ऊपर से शांत दिख रहे हों…लेकिन अंदर ही अंदर एक बड़ा खेल चल रहा है…अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई रुकने की बात जरूर कही जा रही है…लेकिन इससे तनाव खत्म नहीं हुआ है…बल्कि अब इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा दबाव जिस देश पर दिख रहा है…वो है इजराइल…दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि अब जंग पुरानी बात हो गई है और अमेरिका ईरान के साथ सीधी डील करना चाहता है…उनका कहना है कि ईरान खुद बातचीत करना चाहता है…इसलिए अब लड़ाई की जरूरत नहीं है…लेकिन दूसरी तरफ ईरान का रुख बिल्कुल अलग है…
ईरान साफ कह चुका है कि वो किसी दबाव में नहीं आएगा और जो भी बात होगी…उसकी अपनी शर्तों पर ही होगी…ईरान का कहना है कि जंग अमेरिका ने शुरू की थी…इसलिए अब उसका हिसाब भी वही करेगा….सबसे बड़ी बात तो ये है कि ईरान ने अब खुलकर हर्जाने की मांग कर दी है…ईरान का दावा है कि इस जंग में उसे बहुत बड़ा नुकसान हुआ है…शुरुआती तौर पर ये नुकसान करीब 270 अरब डॉलर बताया गया है…लेकिन ईरान ये भी कह रहा है कि ये सिर्फ शुरुआत है…असली नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है…
ईरान ने अपने नुकसान को आसान तरीके से समझाया है…पहला नुकसान…इमारतों और ढांचे का…यानी पुल, सड़कें, फैक्ट्रियां, बिजलीघर, बंदरगाह सब पर हमले हुए और बहुत कुछ बर्बाद हो गया…दूसरा नुकसान…कारखाने बंद हो गए, काम रुक गया, जिससे सरकार की कमाई कम हो गई…तीसरा और सबसे बड़ा नुकसान….आम लोगों का…लोगों के घर टूटे, जिंदगी बर्बाद हुई और आने वाले समय पर भी असर पड़ा…ईरान का कहना है कि ये सिर्फ पैसों का मामला नहीं है…बल्कि पूरे देश की तबाही का हिसाब है…इसलिए वो बिना हर्जाना लिए पीछे नहीं हटेगा…अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है…स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर……बता दें ये वो समुद्री रास्ता है…जहां से दुनिया का बहुत सारा तेल गुजरता है…इस रास्ते पर पकड़ बनाकर ईरान ने अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है…
ईरान ने यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगा दिया है…यानी अब कोई भी जहाज बिना ईरान की इजाजत के यहां से नहीं जा सकता…अगर कोई जाने की कोशिश करेगा…तो उसे रोका जा सकता है…ईरान ने पश्चिमी देशों के जहाजों के लिए करीब 20 लाख डॉलर प्रति जहाज का टोल तय किया है…कुछ देशों को इसमें छूट दी जा सकती है…खासकर एशिया और अफ्रीका के देशों को…वहीं जो देश ईरान के दोस्त माने जाते हैं…उन्हें पूरी छूट भी मिल सकती है…ईरान इस टोल को रिकंस्ट्रक्शन टैक्स कह रहा है…यानी जो नुकसान हुआ है…उसकी भरपाई के लिए यह पैसा लिया जाएगा…
अब अमेरिका इस बात से खुश नहीं है…अमेरिका चाहता है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज खुला रहे और वहां कोई टोल न लगे…ताकि दुनिया का व्यापार चलता रहे…लेकिन यहां भी एक दिलचस्प बात सामने आ रही है…कहा जा रहा है कि अमेरिका चाहता है कि अगर टोल लिया भी जाए…तो उसमें उसका भी हिस्सा हो…यानी ईरान पैसा वसूले…लेकिन उसका कुछ हिस्सा अमेरिका को दे…अगर ऐसा प्रस्ताव सामने आता है…तो ये देखना होगा कि ईरान इसे मानता है या नहीं…क्योंकि फिलहाल ईरान का रुख काफी सख्त है…अब बात सबसे अहम….यानी इजराइल की…ईरान ने जो 270 अरब डॉलर का हर्जाना मांगा है…उसमें सबसे बड़ा हिस्सा इजराइल से मांगा गया है…
ईरान का मानना है कि इस पूरी लड़ाई की जड़ में इजराइल ही था…इसलिए सबसे ज्यादा जिम्मेदारी भी उसी की है…यही वजह है कि अब इजराइल सीधे ईरान के निशाने पर आ गया है…इजराइल के लिए यह स्थिति आसान नहीं है…अगर ईरान का दबाव बढ़ता है…तो उसे आर्थिक और सैन्य दोनों तरह की चुनौती मिल सकती है……सिर्फ इजराइल ही नहीं, ईरान ने कई और देशों को भी जिम्मेदार ठहराया है…इनमें बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं….ईरान का कहना है कि इन देशों ने सीधे लड़ाई नहीं लड़ी…लेकिन उन्होंने अमेरिका और इजराइल को अपनी जमीन इस्तेमाल करने दी…इसलिए वो भी इस नुकसान के जिम्मेदार हैं…
ईरान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया है…उसने संयुक्त राष्ट्र को पत्र भेजकर इन सभी देशों से मुआवजे की मांग की है…अब सबकी नजरें उस बातचीत पर हैं…जो पाकिस्तान में होने की बात कही जा रही है…पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो सकती है…हालांकि अभी इसकी तारीख तय नहीं हुई है…लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही दोनों देश आमने-सामने बैठ सकते हैं…इस बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा होगा….स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और हर्जाना…अमेरिका चाहेगा कि टोल खत्म हो और रास्ता खुला रहे…वहीं ईरान चाहेगा कि उसे उसका पैसा मिले या फिर उसे टोल वसूलने दिया जाए…यही असली टकराव है…
अगर ईरान अपनी बात पर अड़ा रहता है…तो इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा…पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ सकता है…तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं…व्यापार महंगा हो सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है…अमेरिका के लिए भी यह आसान फैसला नहीं है…अगर वो ईरान की बात मानता है…तो उसकी ताकत पर सवाल उठ सकते हैं और अगर नहीं मानता…तो तनाव फिर से बढ़ सकता है…इजराइल की हालत सबसे ज्यादा मुश्किल दिख रही है…एक तरफ ईरान का सीधा दबाव है…दूसरी तरफ अमेरिका पर उसकी निर्भरता…अगर अमेरिका कोई समझौता करता है…तो उसका असर इजराइल पर भी पड़ेगा…
कुल मिलाकर, ये मामला अब सिर्फ जंग तक सीमित नहीं रह गया है…ये अब पैसे, ताकत और दबाव की लड़ाई बन गया है…हर देश अपनी-अपनी शर्तों पर खेल खेल रहा है…आने वाले समय में क्या होगा…ये इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कैसी होती है…लेकिन फिलहाल जो तस्वीर दिख रही है…उसमें साफ है कि हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं और इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा मुश्किल में अगर कोई है…तो वो है इजराइल………..



