BJP मंत्री ने बिगाड़ा खेल, शिंदे गुट ने छेड़ी बगावत, मेयर चुनाव से पहले मची हलचल
बीजेपी के मंत्री ने कुछ ऐसा कह दिया जिससे राज्य में एनडीए सरकार और और देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एक तरफ बीएमसी मेयर चुनाव का सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी और शिंदे गुट वाली शिवसेना के बीच खींचतान ने दोनों दलों के बीच ऐसी खाई पैदा कर दी जिससे एनडीए गठबंधन पूरी तरह से बिखरता हुआ दिखाई देने लगा है।
इसी बीच बीजेपी नेता का एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने पूरी महाराष्ट्र की राजनीति को हिला कर रख दिया है। दरअसल, बीजेपी के मंत्री ने कुछ ऐसा कह दिया जिससे राज्य में एनडीए सरकार और और देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। इसी बीच शिवसेना की तरफ से भी बीजेपी को अल्टीमेटम दे दिया गया है। वहीं मेयर चुनाव को लेकर भी अब एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तो बीजेपी मंत्री ने अपने सहयोगी दल के लिए क्या हयान दिया है और इसको लेकर शिवसेना का क्या कहना है और क्यों अब मयर चुनावों को टाले जाने की बात कही जा रही है।
बीजेपी अपने सहयोगी दलों को जड़ से खत्म करने की राजनीति के लिए जानी जाती है। मोदी और शाह के दौर की राजनीति को देखें तो पार्टी अपने साथ खड़े दलों को इतना मजबूत नहीं होने देती कि वे भविष्य में चुनौती बन सकें। BJP या तो उनके नेताओं को तोड़ लेती है या फिर एजेंसियों को पीछे लगा देती है। हमारे सामने आरजेडी, टीडीपी, एनसीपी जैसी पार्टियां उदाहरण हैं। और अब लगता है शिंदे का अगला नंबर लगने वाला है। आप हिंदुस्तान में छपी इस रिपोर्ट की हेडलाइन देखिए जो कहती है- “बीजेपी नेता ने शिंदे का वजूद खत्म करने की बात कही, शिवसेना ने दिया अल्टीमेटम।”
इस खबर के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी के नेता और महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक की टिप्पणी के बाद राज्य में सियासी बवाल शुरू हो गया है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कथित तौर पर निशाना बनाकर कहा था कि ‘हम उनका अस्तित्व खत्म कर सकते हैं’। नाइक ने रविवार को यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर भाजपा अनुमति देती है, तो ‘हम उनका अस्तित्व खत्म कर सकते हैं।’ देवेन्द्र फडणवीस के मंत्री गणेश नाइक की टिप्पणी के बाद राज्य में सियासी बवाल शुरू हो गया है। क्योंकि उनका बयान ऐसे समय आया है जब महायुति गठबंधन पहले से ही अंदरूनी खींचतान से गुजर रहा है। नाइक का यह रुख सहयोगी दल के लिए सीधी चुनौती के रूप में लिया गया है और इससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
अब फडणवीस के मंत्री ऐसे बयान दें और शिंदे गुट चुप बैठा रहे हैं ऐसा हो नहीं सकता है। शिंदे गुट ने तो बीजेपी को जवाब में ऐसा अल्टीमेटम दे दिया है कि मुंबई से लेकर दिल्ली तक सियासी भूचाल आ गया है। नेता जी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शिवसेना नेता और राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि भाजपा आज सत्ता में सिर्फ इसलिए है क्योंकि शिंदे ने 2022 में अविभाजित शिवसेना के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था। उन्होंने यह भी कहा कि कौन शिंदे को खत्म करने की बात कर रहा है, वह नवी मुंबई की पहाड़ियां या रेत नहीं हैं जिन्हें खत्म किया जा सके। हम वो हैं जो साहस के साथ खड़े हैं और शिंदे को कम नहीं आंका जा सकता। यह बयान साफ दिखाता है कि शिवसेना इस टिप्पणी को राजनीतिक अपमान के रूप में ले रही है। शिरसाट ने आगे कहा कि हमारी कुर्बानियों की बदौलत ही आज भाजपा सत्ता में है और एक तरफ उनसे महायुति धर्म निभाने की बात कही जाती है जबकि दूसरी तरफ भाजपा नेता ऐसे बयान देते हैं।
उन्होंने साफ किया कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वो इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर नाइक खुद को इतना शक्तिशाली मानते हैं तो उन्हें फडणवीस से बात करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर चुनौती दी गई तो उसे स्वीकार किया जाएगा। यह बयान गठबंधन के भीतर उभरती कड़वाहट को उजागर करता है। उधर शिंदे गुट की प्रवक्ता शाइना एनसी ने तो नाइक के बयान पर प्रतिक्रिया दते हुए पूरा भाजपा के नेतृत्व पर सवाल खड़ा कर दिया है।
महायुति गठबंधन में भाजपा, शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं। ऐसे में एक घटक दल के वरिष्ठ नेता द्वारा दूसरे घटक दल के शीर्ष चेहरे पर इस तरह का बयान देना राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला माना जा रहा है। शिवसेना नेता और पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई ने सतारा में कहा कि अगर उनकी पार्टी अनुमति देती है तो उनका रुख वही रहेगा और जब उनकी पार्टी कोई रुख अपनाएगी तो वो भी उचित जवाब देंगे। परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाइक ने भी कहा कि शिंदे ऐसे बयानों का जवाब देने में सक्षम हैं। इससे यह साफ है कि शिवसेना नेतृत्व इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
गणेश नाइक और एकनाथ शिंदे के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी कहीं म कहीं इस पूरे फसाद की जड़ है। अविभाजित ठाणे जिले की राजनीति में दोनों का प्रभाव रहा है। नवी मुंबई लंबे समय से नाइक का गढ़ रहा है और ढाई दशकों से अधिक समय तक नगर निकाय पर उनका नियंत्रण रहा है। नाइक वर्तमान में पालघर जिले के संरक्षक मंत्री हैं और यह जिला ठाणे से अलग करके बनाया गया था। दूसरी तरफ यह इलाका शिंदे की राजनीतिक पकड़ वाला क्षेत्र माना जाता है। हाल ही में सीट बंटवारे की बातचीत विफल होने के बाद शिवसेना और भाजपा ने नवी मुंबई महानगर पालिका का चुनाव अलग अलग लड़ा था, जिससे पहले ही रिश्तों में तनाव दिखने लगा था।
वहीं एक दूसरी खबर हैं जिसने बीजेपी की टेंशन को बढ़ा दिया है। इस राजनीतिक खींचतान के बीच मुंबई महानगरपालिका के महापौर पद का चुनाव टाल दिया गया है। दरअसल, आरक्षण घोषित होने के बाद 31 जनवरी को मतदान की तैयारी थी लेकिन बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना के नगरसेवकों के गुट का पंजीकरण अभी पूरा नहीं हो पाया है। इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। यह देरी अब केवल तकनीकी नहीं मानी जा रही बल्कि इसे सियासी असहमति से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार उद्धव शिवसेना और एमएनएस दोनों दलों के 65 नगरसेवकों की गुट पंजीकरण प्रक्रिया तो हो चुकी है लेकिन उनके प्रमाणपत्र अब तक महानगरपालिका सचिव कार्यालय में जमा नहीं किए गए हैं।
जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक महापौर चुनाव कराना संभव नहीं है। इससे बीएमसी की सत्ता को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है। अब संभावना जताई जा रही है कि मुंबई महापौर का चुनाव फरवरी महीने के पहले हफ्ते में कराया जा सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी और शिंदे शिवसेना संयुक्त रूप से गुट बनाकर पंजीकरण कराएंगे या अलग अलग। यह स्थिति गठबंधन के भीतर चल रही असमंजस को दिखाती है। अगर दोनों अलग राह चुनते हैं तो यह राजनीतिक दूरी का स्पष्ट संकेत होगा।
साल 2017 के मुंबई महानगरपालिका चुनावों में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी जबकि बीजेपी बहुत करीबी अंतर से दूसरे स्थान पर रही थी। बाद में राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव हुए और शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई। अब 2026 में हुए बीएमसी चुनाव में बीजेपी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 89 सीटें जीतीं। शिवसेना यूबीटी ने 65 वार्डों पर जीत दर्ज की। एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 24 वार्ड जीते।एआईएमआईएम ने 8 वार्डों में जीत हासिल की। मनसे को 6 सीटें मिलीं। अजित पवार की एनसीपी को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और शरद पवार की एनसीपी गुट को 1 सीट मिली।
इन नतीजों ने तीन दशक पुराने राजनीतिक वर्चस्व को तोड़ दिया। पूरी स्थिति यह संकेत दे रही है कि गठबंधन की राजनीति के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर खींचतान तेज हो चुकी है। एक तरफ साथ चलने की बात है तो दूसरी तरफ बयानबाजी टकराव को हवा दे रही है। गणेश नाइक का बयान और उस पर शिवसेना की कड़ी प्रतिक्रिया दिखाती है कि महायुति के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। वहीं बीएमसी मेयर चुनाव का टलना इस राजनीतिक अस्थिरता को और उजागर कर रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले समय में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।



