Bollywood एक्टर का अवार्ड फंक्शन में हो गया था निधन, बैठे-बैठे अचानक आया हार्ट अटैक।
बॉलीवुड की दुनिया देखने में बेहद ही ग्लैमरस लगती है..लेकिन, पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही होती है। आखिर, यहां काम करने वाले सितारे बिग स्क्रीन पर जितने खुशहाल नजर आते हैं..तो, इनकी निजी ज़िंदगी उससे एकदम उलट होती है। यहां कब क्या हो जाए..?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बॉलीवुड की दुनिया देखने में बेहद ही ग्लैमरस लगती है..लेकिन, पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही होती है। आखिर, यहां काम करने वाले सितारे बिग स्क्रीन पर जितने खुशहाल नजर आते हैं..तो, इनकी निजी ज़िंदगी उससे एकदम उलट होती है।
यहां कब क्या हो जाए..? इसे लेकर कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। अब, इस बात का सबूत आप इसी से ले लीजिये कि, बी टाउन के एक मशहूर एक्टर की मौत अवार्ड शो में बैठे-बैठे ही हो गई। स्थिति कुछ यूं बिगड़ी कि, इस एक्टर को बचाने तक का मौका उनके परिवार और आस-पास के लोगों को नहीं मिला। अवार्ड फंक्शन देखने के समय ही इस हीरो को अचानक ‘दिल का दौरा’ पड़ा और वो हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर चला गया।
हम किस एक्टर की बात कर रहे हैं..? तो, ये वो मशहूर हीरो रहे..जो कि दिग्गज एक्ट्रेस मुमताज़ के भाई भी थे। जी हां, रिश्ते में एक्ट्रेस मुमताज के कजिन और दिवंगत दिलीप कुमार के समधी ये एक्टर रूपेश कुमार थे। जिनकी मौत से इंडस्ट्री को गहरा सदमा लगा था। दरअसल, दो दिन पहले ही 29 जनवरी को रुपेश कुमार की 31वीं डेथ एनिवर्सरी थी। तो, रूपेश कुमार का 60 के दशक में बॉलीवुड में खूब नाम हुआ करता था। वो एक ‘खलनायक’ के तौर पर पहचाने जाते थे। साल 1965 से 1995 तक उन्होंने अपने करियर में 100 से भी ज्यादा फिल्मों में विलेन का रोल प्ले किया और आइकॉनिक विलेन्स की फेहरिस्त में शुमार हो गए। उन्होंने अपने करियर में कॉमिक और सपोर्टिव किरदार भी निभाए। रूपेश को ‘द ग्रेट गैंबलर’ और ‘सीता और गीता’ जैसी फिल्मों में खूब पसंद किया गया था।
रूपेश का असली नाम अब्बास फराशाही था। और, उनका परिवार रेस्टोरेंट और बेकरी के बिजनेस में था, पर उन्होंने खुद एक्टिंग में करियर बनाने का फैसला किया था। रूपेश को बचपन से ही फिल्मों में दिलचस्पी थी। इसलिए उन्होंने क्लास 9 के बाद पढ़ाई छोड़ दी। पिता के कहने पर रेस्टोरेंट में काम भी करने लगे, पर वहां उनका मन नहीं लगा। तब घर का बिजनेस छोड़ रूपेश कुमार ने एक्टर बनने का फैसला किया। उनकी कजिन मुमताज फिल्मों की टॉप एक्ट्रेस थीं और उनका भी रूपेश पर अच्छा-खासा असर था।
इसी से इंस्पिरेशन लेकर उन्होंने साल 1965 में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। हालांकि, रूपेश के पिता इसके खिलाफ थे, पर उनकी मां ने उनका साथ दिया और बाद में मां ने उनके पिता को भी मना लिया। वो भी इसके लिए राजी हो गए। फिर, रूपेश कुमार मुंबई एक्टर बनने तो आ गए, पर यहां उन्हें स्ट्रगल का सामना करना पड़ा। शुरुआत में उन्हें किसी फिल्म में काम नहीं मिला, और जो पैसे घर से मां ने दिए थे, वो भी मायानगरी आकर खत्म हो गए। तब रूपेश भट्ट एक रेस्टोरेंट में वेटर का काम करने लगे। उसी रेस्टोरेंट में उन्हें खाना मिल जाता और रहने का भी इंतजाम हो गया। लेकिन, रुपेश का मन फिल्मों में ही लगा हुआ था। ऐसे में रूपेश कुमार वक्त निकालकर फिल्मों में काम करने वाले बड़े-बड़े लोगों के ऑफिस के चक्कर काटते ताकि कहीं ना कहीं से एक्टर बनने का मौका मिल जाए।
फिर, आखिरकर रूपेश कुमार की मेहनत एक दिन रंग लाई। उन्हें हीरो के रोल तो नहीं मिले, पर सपोर्टिंग और विलेन के किरदार जरूर मिलने लगे और इस तरह 1965 में फिल्मों में उनकी एंट्री हो गई। रूपेश कुमार की साल 1965 में दो फिल्में आई थीं- ‘टार्जन’ और ‘किंग कॉन्ग’, और इसके बाद उन्होंने ज्यादातर फिल्मों में सपोर्टिंग किरदार ही निभाए। विलेन के रोल में रूपेश कुमार को खासा पसंद किया गया। उन्हें आज भी ‘सीता और गीता’, ‘अंदाज’, ‘द ग्रेट गैंबलर’, ‘जानी दुश्मन’, ‘बड़े दिलवाला’ और ‘हम पांच’ जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है।
निजी ज़िंदगी की बात करें तो, रूपेश कुमार ने शादी की थी और उनके बच्चे भी थे। उनकी पत्नी और बच्चों के बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि उनकी बड़ी बेटी की शादी दिलीप कुमार के भांजे जाहिद खान के साथ हुई थी। इस लिहाज से दिलीप कुमार उनके समधी लगते थे। तो, फ़िल्मी दुनिया में अच्छा-खासा नाम कमा रहे रुपेश के लिए फिर एक समय ऐसा आया..जब मौत उन्हें सबसे दूर लेकर चली गई। साल 1995 में रूपेश कुमार के लिए काल बनकर आया। उस साल रूपेश कुमार की मौत हो गई और उसी साल उनकी आखिरी फिल्म ‘पापी देवता’ भी रिलीज हुई।
हुआ यूं कि, साल 1995 में रुपेश कुमार एक पॉपुलर अवॉर्ड फंक्शन में हिस्सा लेने गए थे। उस फंक्शन में राजेंद्र कुमार और सुनील दत्त समते कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी। सबसे आगे की सीट पर सुनील दत्त बैठे थे। उनके एक तरफ राजेंद्र कुमार और दूसरी तरफ रूपेश कुमार बैठे थे। सबकुछ अच्छा चल रहा था और हर कोई फंक्शन इंजॉय करने में व्यस्त था।
तो, बताया जाता है कि तभी रूपेश कुमार को अचानक से ही बेचैनी होने लगी। उन्होंने छाती में दर्द की शिकायत की। सुनील दत्त बिना देर किये तुरंत ही रूपेश कुमार को अस्पताल ले गए, पर इससे पहले की इलाज शुरू होता उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। रूपेश कुमार को हार्ट अटैक पड़ा था और वही उनकी जान ले गया। इस तरह वो इस 49 साल की उम्र में दुनिया को छोड़कर हमेशा के लिए चले गए। बहरहाल, ये कहना गलत नहीं होगा कि, जैसी दुखद मौत रुपेश कुमार को मिली, वैसी किसी दुश्मन को भी न मिले। अवॉर्ड लेने एक फंक्शन में गए रुपेश ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वो वहां से जिंदा नहीं लौट पाएंगे। सैंकड़ों लोगों के बीच उनकी सांसें सबके हाथों से फिसल गईं और लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया ना जा सका।



