Bollywood एक्ट्रेस ने 18 साल में की शादी, 26 में हो गई विधवा। पति के निधन ने दे दिया गहरा सदमा !
शादी करने के बाद एक अच्छी ज़िन्दगी जीना। आम लोगों की तरह बॉलीवुड एक्ट्रेसेस के लिए भी शादी वही एक एहसास है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मायानगरी की दुनिया में काम करने वाली हसीनाएं पर्दे पर देखने में बेहद ग्लैमरस लगती हैं।
आखिर, अपने हुस्न और एक्टिंग के जलवे के चलते वो ऑडियंस के दिलों पर राज जो करती हैं। हां बस वो बात अलग है कि, इन अदाकाराओं की प्रोफेशनल लाइफ से एकदम उलटी उनकी पर्सनल लाइफ होती है। आखिर, स्क्रीन पर खूब सक्सेस हासिल करने वालीं एक्ट्रेसेस को निजी ज़िंदगी में बेइंतहा दर्द को जो झेलना पड़ता है।
अब, जैसा कि, हर लड़की का सपना होता है..शादी करने के बाद एक अच्छी ज़िन्दगी जीना। आम लोगों की तरह बॉलीवुड एक्ट्रेसेस के लिए भी शादी वही एक एहसास है। लेकिन जरा सोचिए, तब क्या हो? जब किसी लड़की के लिए शादी ही सबसे बड़ा दुख बन जाये। तो, ठीक कुछ ऐसा ही हुआ..बॉलीवुड की दुनिया की एक पॉपुलर एक्ट्रेस के साथ।
आखिर, इस हसीना का पति भरी जवानी में इनका साथ जो छोड़ गया..और, महज़ 26 साल की उम्र में उनकी मांग का सिंदूर उजड़ गया। तो, जिस एक्ट्रेस की हम यहां बात कर रहे हैं..वो, आज हमारे बीच इस दुनिया में तो मौजूद नहीं है। लेकिन, उनका काम, एक्टिंग और ज़िंदगी की चर्चा जरूर लोगों के बीच होती है।
ये एक्ट्रेस वही हैं..जिन्होंने दिवंगत सुपरस्टार दिलीप कुमार और मधुबाला की साल 1960 में आई एपिक ड्रामा हिस्टोरिकल फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में काम किया था। एक ऐसी फिल्म, जिसने हिंदी सिनेमा को एक अलग ही पहचान दिलाई थी। हां, वो बात अलग है कि, इसे रिलीज करने में डायरेक्टर के.आसिफ को 16 साल लग गए थे। तो, इस फिल्म में सलीम की मां जोधाबाई का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस ने अपनी एक्टिंग से तो लोगों का दिल जीता था। लेकिन, उन्होंने पर्सनल लाइफ में काफी कुछ सहा था। जीते-जी इन्होंने बेहद गम झेले।
4pmbollywood की सिनेमा थ्रोबैक रिपोर्ट में हम बात कर रहे हैं..दिवंगत एक्ट्रेस दुर्गा खोटे की। वही, दुर्गा खोटे, जिनका जन्म 14 जनवरी 1905 को एक ब्राह्मण परिवार में गोवा में हुआ था। बचपन में उनका नाम वीटा लाड था। उनके पिता का नाम पांडुरंग शामराव लाड और माता का नाम मंजुलाबाई था। उनके पिता उस जमाने के जाने माने वकील थे।
बाद में गोवा से उनका परिवार मुंबई (बॉम्बे) शिफ्ट हो गया। वो एक अमीर खानदान से ताल्लुक रखती थीं। साथ ही जिस समय औरतों को पढ़ने नहीं दिया जाता था उस समय उन्होंने मुंबई के ‘कैथेड्रल हाई स्कूल’ से शुरुआती पढाई और फिर ‘सेंट जेवियर्स कॉलेज’ से ग्रेजुएशन भी किया।
तो, पढ़ाई के दौरान टीनएज में ही उनकी शादी तय कर दी गई। उन्होंने विश्वनाथ खोटे के साथ घर बसा लिया। शादी के बाद वो दो बच्चों- बकुल और हरिन की मां बनीं। लेकिन, शायद किस्मत कुछ और ही मंजूर था। आखिर, दुर्गा 26 साल की उम्र में ही विधवा जो हो गईं। पति की मौत के बाद परिस्थितियों ने उन्हें बच्चों की परवरिश और घर चलाने के लिए काम करने पर मजबूर किया।
दुर्गा खोटे ने अच्छी-खासी पढ़ाई की हुई थी..ऐसे में, पैसे कमाने के लिए उन्होंने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद दुर्गा खोटे की बहन शालिनी के एक पहचान वाले JVH वाडिया अपनी फिल्म में एक रोल के लिए किसी नए चेहरे की तलाश कर रहे थे, तो उन्होंने अपनी बहन दुर्गा का नाम सुझाया। इसके बाद ऑडिशन में दुर्गा पास हो गईं और उन्होंने पहली बार साल 1931 में मूक फिल्म ‘फरेबी जाल’ से अपने बॉलीवुड करियर की शुरआत की।
दुर्गा की पहली फिल्म की एक्टिंग से V शांताराम बहुत इम्प्रेस हुए और उन्होंने अपनी फिल्म ‘आयोध्याचा राजा’ में ‘तारामती” का किरदार उन्हें दे दिया। इस फिल्म के बाद दुर्गा खोटे स्टार बन गई। फिर उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में काम किया। मराठी सिनेमा की पहली बोलती फिल्म थी। फिल्म मराठी और हिंदी भाषा में बनाई गई थी, उस समय भारत की पहली दो भाषाओं में बनी ये पहली फिल्म थी।
इसके बाद, साल 1936 में रिलीज हुई फिल्म ‘अमर ज्योति’ में दुर्गा खोटे ने समुद्री डाकू ‘सौदामिनी’ का यादगार किरदार निभाया। यही वह पहली इंडियन फिल्म थी जिसका प्रीमियर ‘वेनिस फिल्म फेस्टिवल’ में हुआ। इसके बाद उन्होंने साल 1937 में फिल्म ‘साथी’ को प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया, और इस तरह वो एक साथ प्रोड्यूसर और डायरेक्टर बनने वाली पहली इंडियन एक्ट्रेस बनीं। इससे उन्होंने ये भी साबित कर दिया कि, फीमेल हीरोइन भी अपने दम पर अपनी राह बना सकती हैं। उनके इस कदम ने न सिर्फ उन्हें अलग पहचान दी बल्कि आने वाली पीढ़ियों की एक्ट्रेसेस के लिए रास्ता भी आसान किया।
तो, दुर्गा खोटे ने कई फिल्मों में काम किया। लेकिन फिर, एक्ट्रेस की जिंदगी में एक भूचाल और आया, उनके बड़े बेटे हरिन की 40 की उम्र में मौत हो गई। इस घटना ने एक्ट्रेस को सदमे में लाकर रख दिया था। पति के जाने के बाद उनके दूसरे बेटे का भी निधन हो गया और इस दुख में वो इस तरह डूबीं कि बुरी तरह टूट गईं। इस घटना के बाद, उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्मों से ब्रेक लिया। ढलती उम्र और चेहरे की झुर्रियों के साथ उन्होंने सिनेमाई पर्दे पर बुजुर्ग बनकर वापसी करने का मन बनाया।
साल 1960 में आई फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में सलीम खान की मां जोधा बाई का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने ‘बॉबी’, ‘अभिमान’ और ‘बिदाई’ जैसी कई फिल्मों में मां, दादी और आंटी का रोल किया। इसने उन्हें मां के किरदार में काफी फेम दिलाया। उन्होंने शॉर्ट फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और शोज भी प्रोड्यूस किये। इतना ही नहीं, दूरदर्शन के फेमस शो ‘वागले की दुनिया’ को भी उन्होंने ही बनाया।
अपने काम से उन्होंने ऑडियंस के दिलों में छाप छोड़ने के अलावा कई अवार्ड्स भी जीते। 1942 और 1943 में उन्हें बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन (बीएफजेए) द्वारा ‘बेस्ट एक्ट्रेस’ का अवॉर्ड मिला। 1958 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 1968 में ‘पद्मश्री’ और 1983 में ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ से उन्हें सम्मानित किया गया। खास बात ये है कि, ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ जीतने वाली चौथी फीमेल आर्टिस्ट दुर्गा खोटे ही थीं।
गौरतलब है कि, दुर्गा खोटे ने अपने करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। उनका करियर पांच दशक तक जारी रहा। लेकिन फिर, 22 सितंबर 1991 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। हालांकि, उनका परिवार भी बॉलीवुड से जुड़ा है।
दिवंगत दुर्गा खोटे के पोते-पोतियों में उनके पोते रवि, जो एक फिल्म प्रोड्यूसर हैं। पोती अंजलि खोटे एक एक्ट्रेस हैं और पोते देवेन खोटे, जो एक सक्सेसफुल प्रोड्यूसर हैं और UTV के सह-संस्थापकों में से एक हैं। दुर्गा खोटे के बहनोई, नंदू खोटे एक एक्टर थे। नंदू के दो बच्चे भी एक्टर ही बने। उनके बेटे और दुर्गा के भतीजे विजू खोटे, उन्हें ‘शोले’ फिल्म में कालिया की भूमिका के लिए जाना जाता था।



