बजट 2026-27: किसान फिर खाली हाथ, राकेश टिकैत का तीखा वार

केंद्रीय बजट 2026-27 पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कड़ी निराशा जाहिर की है. उनका कहना है कि यह बजट किसान, मजदूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केंद्रीय बजट 2026-27 पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कड़ी निराशा जाहिर की है. उनका कहना है कि यह बजट किसान, मजदूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा. उन्होंने कहा कि बजट में बढ़ती महंगाई, खेती की लागत और कर्ज से जूझ रहे किसानों के लिए न तो कर्ज माफी का प्रावधान है और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (1 फरवरी) को लोकसभा में आम बजट 2026 पेश किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की सराहना करते हुए ऐतिहासिक बताया. हालांकि विपक्ष ने इसे लेकर निराशा जाहिर की है. इस बीच भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत का बयान सामने आया है. उनका कहना है कि बजट किसान-मजदूर और ग्रामीण भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा.

राकेश टिकैत ने केंद्रीय बजट 202627 को देश के किसान, मजदूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं का समाधान करने में असफल बताया है. उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, खेती की लागत में लगातार इजाफा, कर्ज़ के बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न तो कर्ज माफी पर कोई ठोस पहल की गई और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने का प्रावधान किया गया. उन्होंने कहा कि किसानों को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं.

राकेश टिकैत ने बजट पर उठाए सवाल
टिकैत ने कहा कि ग्रामीण रोजगार और बेरोजगारी के सवाल पर भी बजट निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं को मजबूत करने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बजट में कोई स्पष्ट दिशा दिखाई नहीं देती. उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या और गहरी होने की आशंका है.

‘बुनियादी मुद्दों को बजट में प्राथमिकता नहीं दी गई’
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के जल-जंगल-ज़मीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे बुनियादी मुद्दों को बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के बजाय बजट का झुकाव एक बार फिर शहरी और कॉरपोरेट (Corporate) हितों की ओर दिखाई देता है.

‘अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग की अनदेखी’
किसान संगठन का कहना है, कुल मिलाकर यह बजट ज़मीनी सच्चाइयों से दूर, आंकड़ों और घोषणाओं का बजट है, जिसमें देश के अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग की अपेक्षाओं की अनदेखी की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह किसान, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर अपनी नीतियों और बजटीय प्रावधानों पर पुनर्विचार करे.

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