ट्रंप ने फिर भारत पर फोड़ा बम, भारत के विदेश नीति की उड़ी धज्जियां, कांग्रेस ने घेरा
डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने ये एलान कर दिया है कि भारत अब ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। मतलब अब ट्रंप के इशारे पर भारत ईरान से तेल खरीदने के बजाय वहां से तेल खरीदेगा जहां से अमेरिका को फायदो हो।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या हमारे देश की विदेश नीति दिल्ली के बजाय वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में तय हो रही है? क्या पीएम मोदी ने अमेरिका के आगे खुद को पूरी तरह से सरेंडर कर दिया है?
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर फिर से ऐसा दावा किया है, जिसे लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कहा जाने लगा है कि भारत की विदेश नीति अब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के दफ्तर में नहीं बल्कि सात समुंदर पार ट्रंप के दफ्तर में तैयार की जा रही है। अब अमेरिका भारत को बता रहा है कि कब क्या करो, किससे व्यापार करना है, किससे बंद करना है ये सब ट्रंप भारत को बता रहे हैं और मोदी जी उसको चुपचाप मान भी रहे हैं। तो अपने हालिया बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या दावा किया है जिससे ये बातें सामने आई है और विपक्षी पार्टी कांग्रेस की तरफ से इसको लेकर क्या प्रतिक्रिया सामने आई है।
न जाने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अपने पूर्व बेस्टफ्रेंड मोदी जी का ऐसा कौन सा राज़ हाथ लग गया है कि मोदी वही करके हैं जो ट्रंप भारत को करने को कहते हैं। पहले ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया। फिर ट्रंप के दबाव में मोदी सरकार ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया, फिर साहेब चाबहार पोर्ट से पीछे हट गए, कई आयातों पर टैरिफ घटा दिए और अब तो हद ही हो गई है। अब हालात ये हो गए हैं कि ट्रंप भारत को बता रहा है कि ईरान के बजाय उसके बताए हुए देश से तेल खरीदो। डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने ये एलान कर दिया है कि भारत अब ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। मतलब अब ट्रंप के इशारे पर भारत ईरान से तेल खरीदने के बजाय वहां से तेल खरीदेगा जहां से अमेरिका को फायदो हो।
तो देखिए मतलब अब साफ है कि अगर ट्रंप ने बोल दिया है कि भारत अब ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा तो मजाल है कि हमारे प्रधानमंत्री जी अपने पुराने दोस्त की बात को टाल दें। वहीं एक सवाल ये भी उठता है कि क्या अब भारत की विदेश नीति भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के दफ्तर में नहीं बल्कि ट्रंप के दफ्तर में तैयार की जा रही है? क्योंकि अब भारत की विदेश नीति की जानकारी एस जयशंकर से नहीं बल्कि डोनाल्ड ट्रंप बताते हैं। अगर जानकारी झूठी होती है मंत्रालय खंडन करने चला आता है और अगर थोड़ी भी सच्चाई होती है तो सरकार चुप्पी साध लेती है। वहीं अब ट्रंप के इस नए दावे के बाद कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेट ने ट्रंप के बयान को साझा करते हुए लिखा है कि, ‘ट्रंप ने अनाउंस किया – भारत अब ईरान की जगह वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।
ट्रंप तय कर रहे हैं कि भारत क्या करेगा, कहां से तेल खरीदेगा, कहां से नहीं।’ उन्होंने पूछा कि, ‘यह सरकार मोदी चला रहे हैं या ट्रम्प? मोदी जी, कौन सा वो राज़ है आपका जिसकी वजह से आप ट्रम्प के सामने चुप हैं?’ वहीं जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में ट्रंप के दावों पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमें लगातार यह जानकारी दे रहे हैं कि हमारी अपनी सरकार ने क्या किया है या क्या करने वाली है। उन्होंने व्हाइट हाउस की ओर से जारी ट्रंप के बयान का ऑडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने हमें बताया कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। उन्होंने हमें बताया कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। और अब यह। जयराम रमेश ने आगे लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमें लगातार यह जानकारी दे रहे हैं कि हमारी अपनी सरकार ने क्या किया है या क्या करने वाली है।
अब देखिए ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत के कूटनीतिक फैसलों को लेकर टिप्पणी की है। याद कीजिये पिछले साल मई में जब भारत-पाकिस्तान का संघर्ष हुआ था तो उस दौरान ट्रंप ने खुद को सीजफायर कराने का क्रेडिट दिया था। तब से लेकर अब तक करीब 50 बार ट्रंप ये पब्लिक में यो दावा कर चुके हैं। लेकिन हमारे मोदी जी आज तक उनकी बात को नकार नहीं पाए हैं। लेकिन उसके बाद से ट्रंप और मोदी के बीच रिश्तों में खटास आ गई। एक दूसरे को जन्मदिन की बधाई तो दी गई लेकिन दोनों फिर कभी साथ नहीं दिखे। मोदी जी तो हर उस ईवेंट में जाने से बचते रहे जहां प्रेसिडेंट ट्रंप आ सकते थे। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही भारत पर डील करने का दबाव डालते रहे। और ये डील कहीं न कहीं तेल के इर्द गिर्द ही घूमती रही। पहले ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर कहा कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन पर हमले की मदद कर रहा है। ये कहते हुए ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले से ही प्रिडिक्शन कर दी थी कि ट्रंप ये सब ट्रेड डील करने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है। अब देखना कैसी ट्रेड डील बनती है।
इसके बाद ट्रंप ने भारत को लेकर एक और बड़ा दावा किया जिसने मोदी सरकार की भयंकर फजीहत कराई। ट्रंप ने दावा किया कि मोदी उन्हें खुश करने में लगे हैं और भारत ने अब रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। ट्रंप के इस दाने पर मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठे लेकिन सरकार ने चुप्पी साधे रखी। इसके बाद ट्रंप का अब ये दावा कि भारत ईरान के बजाय अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा बेहद चौंकाने वाली बात है। एक तरह से देखा जाए तो ये भारत के लिए बदनामी की बात है कि अब भारत अमेरिका के इशारे पर चल रहा है।
अब देखिए हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के प्रेसीडेंट को रात के अंधेरे मेम घर से उठवाकर उसके तेल के कुओं पर कब्जा जमा लिया था। और अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं। तो ऐसे में अमेरिका चाहेगा कि भारत अब ईरान से तेल न खरीदकर वेनेजुएला से खरीदे। इससे अमेरिका का डबल फायदा होगा। पहला, वेनेजुएला का तेल कच्चा और भारी किस्म का होता है, जिसे साफ कर इस्तेमाल लायक बनाने के लिए खास रिफाइनरियों की जरूरत होती है, और भारत के पास ऐसी क्षमता मौजूद है, जबकि अमेरिका में यह सुविधा सीमित मानी जाती है। इस व्यवस्था से भारत को लगातार तेल की सप्लाई मिल सकती है और भुगतान डॉलर में होने से अमेरिका को आर्थिक फायदा भी होता रहेगा। दूसरा, ये कि भारत ईरान से तेल खरीदना बंद कर देगा तो अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बना सकेगा। मतलब हर हाल में अमेरिका का फायदा और भारत का नुकसान। लीजिए हो गई ट्रेड डील।
आख़िर में सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकत कहे जाने वाले भारत की विदेश नीति अब पारदर्शी तरीके से देश के हितों के आधार पर बन रही है, या फिर परदे के पीछे किसी और की प्राथमिकताएँ काम कर रही हैं। जब किसी दूसरे देश का नेता बार-बार भारत के फैसलों की घोषणा करे और अपनी ही सरकार खामोश दिखाई दे, तो शक पैदा होना स्वाभाविक है। तेल, व्यापार, टैरिफ और रणनीतिक रिश्ते कि ये सब सिर्फ आर्थिक मुद्दे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े फैसले होते हैं। अगर वाकई फैसले दबाव में लिए जा रहे हैं तो यह सिर्फ विपक्ष का मुद्दा नहीं, हर नागरिक की चिंता का विषय होना चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह साफ-साफ देश को बताए कि सच्चाई क्या है, किस आधार पर फैसले हो रहे हैं और भारत का हित कहाँ सुरक्षित है। वरना ये धारणा मजबूत होती जाएगी कि दोस्ती और कूटनीति के नाम पर कहीं देश की स्वतंत्र नीति ही दांव पर तो नहीं लग गई।



