बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को मिला नया बल, बांदा में संगठनों की संयुक्त बैठक

मंगलवार को बांदा में विभिन्न सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों की एक बड़ी बैठक में ‘राज्य दो, वोट लो’ अभियान को गांव-गांव और गली-गली तक पहुंचाने का ऐलान किया गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा में बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। मंगलवार को बांदा में विभिन्न सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों की एक बड़ी बैठक में ‘राज्य दो, वोट लो’ अभियान को गांव-गांव और गली-गली तक पहुंचाने का ऐलान किया गया।

इस दौरान बुंदेलखंड राज्य निर्माण मोर्चा के संयोजक एवं चार बार के पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत ने केंद्र और राज्य सरकारों पर क्षेत्रीय उपेक्षा के गंभीर आरोप लगाते हुए अलग राज्य की मांग को तेज करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का आयोजन जिला बार संघ कार्यालय में किया गया, जहां क्षेत्रीय समस्याओं, पलायन, बेरोजगारी और पर्यावरणीय संकट को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में कई सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं और समाजसेवियों ने हिस्सा लिया और आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

‘सत्ताएं वोट से डरती हैं, इसलिए जनआंदोलन जरूरी’

बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत ने कहा कि बुंदेलखंड की दशकों पुरानी मांग को अब निर्णायक मोड़ पर लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “सत्ताएं वोट से डरती हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि ‘राज्य दो, वोट लो’ का संदेश हर गांव तक पहुंचाया जाए।” उन्होंने इसे किसी के खिलाफ विद्रोह नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बताया और कहा कि यह आंदोलन जनता के वादों को याद दिलाने का माध्यम है।

प्रधानमंत्री के वादों और बड़े फैसलों का दिया उदाहरण

अपने संबोधन में गंगा चरण राजपूत ने कहा कि जब देश में पिछले 75 वर्षों में कई नए राज्य बनाए जा सकते हैं, तो बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने में देरी क्यों हो रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 हटाने जैसे बड़े फैसले संभव हुए हैं, तो बुंदेलखंड राज्य भी संभव है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2014 में झांसी की जनसभा में बुंदेलखंड राज्य के गठन का वादा किया गया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए।

बुंदेलखंड की जमीनी समस्याएं गिनाईं

पूर्व सांसद ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कई आंकड़े और मुद्दे सामने रखे—उन्होंने कहा कि 1947 में बुंदेलखंड में लगभग 30 प्रतिशत वन क्षेत्र था, जो अब घटकर मात्र 3 प्रतिशत रह गया है। अंधाधुंध खनन और पेड़ों की कटाई के कारण क्षेत्र का पर्यावरण गंभीर संकट में है। बांदा को अत्यधिक गर्म शहरों में गिना जाने लगा है।

नदियों और जल संकट

उन्होंने केन और बेतवा जैसी नदियों के प्राकृतिक स्वरूप के प्रभावित होने का आरोप लगाया और कहा कि खनन गतिविधियों के कारण जल स्रोत कमजोर हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र की लगभग 40 प्रतिशत आबादी रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों में पलायन कर चुकी है। बड़ी संख्या में लोग ईंट-भट्टों, सुरक्षा गार्ड और मजदूरी जैसे कार्यों में लगे हैं।

सरकारी योजनाओं पर सवाल

उन्होंने ‘जल जीवन मिशन’ सहित कई योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई गांवों में अब भी पानी की समस्या बनी हुई है और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की कमी है।

‘अब नेताओं से हिसाब मांगने का समय’

पूर्व सांसद ने जनता से अपील की कि वे अब केवल नेताओं का सम्मान करने तक सीमित न रहें, बल्कि विकास कार्यों और बजट का पूरा हिसाब मांगें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के पास अधिकारों की शक्ति है, जिसका सही उपयोग होना चाहिए। “अब समय आ गया है कि जनता अपने अधिकारों की ‘तलवार’ उठाए और जवाबदेही तय करे,” उन्होंने कहा।

आंदोलन की आगे की रणनीति

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आने वाले समय में पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बहुत सहा है, अब ना सहेंगे, बुंदेलखंड राज्य लेकर रहेंगे’ जैसे नारों के साथ व्यापक जन अभियान चलाया जाएगा। मांगों में शामिल है—बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा देना,अलग प्रशासनिक कैडर की व्यवस्था,क्षेत्र में हाईकोर्ट की स्थापना,स्थानीय युवाओं को 100% रोजगार में प्राथमिकता।

संगठनों ने दिया समर्थन

बैठक में कई संगठनों ने एकजुट होकर आंदोलन को समर्थन दिया। इसमें बुंदेलखंड राज्य निर्माण संघर्ष समिति, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति, और बुंदेलखंड नव निर्माण सेवा सहित कई संगठनों ने सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया। इसके अलावा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, बांदा ने भी इस आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों की भागीदारी

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार, अधिवक्ता और समाजसेवियों की बड़ी उपस्थिति रही। कई वक्ताओं ने बुंदेलखंड की समस्याओं पर अपने सुझाव दिए और आंदोलन को जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया। बैठक का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता रोहन सिन्हा ने किया।

बांदा में हुई यह बैठक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को एक बार फिर गति देती नजर आ रही है। विभिन्न संगठनों की एकजुटता और गांव-गांव अभियान की घोषणा से आने वाले समय में इस मुद्दे के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, राज्य निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह केंद्र सरकार और संवैधानिक प्रावधानों पर निर्भर करेगी, जिस पर आगे राजनीतिक निर्णय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

रिपोर्ट -इकबाल खान, बांदा

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