चप्पे-चप्पे पर CAPF जवान, बंगाल-तमिलनाडु में हाई अलर्ट के बीच मतदान
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज विधानसभा चुनाव का मतदान होना है. शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज विधानसभा चुनाव का मतदान होना है. शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है.
खासकर पश्चिम बंगाल में हिंसा के इतिहास देखते हुए चुनाव आयोग ने भारी मात्रा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनती की है. जिस पर सियासत भी खूब हो रही है.
पश्चिम बंगाल में आज पहले चरण की वोटिंग है, जिसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इस बार पुलिस के साथ केंद्रीय बल भी भारी-भरकम संख्या में मौजूद हैं. तमिलनाडु में आज होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सुरक्षा की तैयारी की गई है. लोकतंत्र के इस बड़े त्योहार में 5.73 करोड़ मतदाता हिस्सा लेंगे. इस चुनाव में राजनीतिक दलों और निर्दलीयों सहित कुल 4,618 उम्मीदवार मैदान में हैं.
बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान के लिए आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कुल 2,407 टीमें तैनात की गई हैं. सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है. आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं के मतदान केन्द्रों तक पहुंचने में बाधाएं उत्पन्न करने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सभी उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाही की जाएगी.
चुनाव का सबसे निर्णायक हिस्सा
कई सीटों पर करीबी मुकाबलों की वजह से पहले चरण को चुनाव का सबसे निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है. यह चरण मतदाता सूची में संशोधन (एसआईआर) को लेकर विवाद के बीच भी हो रहा है. पहले चरण की महत्वपूर्ण सीटों की बात करें, तो सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, उत्तर कूच बिहार, दक्षिण कूच बिहार, रायगंज, इस्लामपुर, बालूरघाट, मालदा और मुर्शिदाबाद की कई सीटें हैं. साथ ही, आसनसोल, बांकुड़ा, पुरुलिया और बहरामपुर जैसी अहम सीटें भी शामिल हैं.
पहले चरण की चर्चित सीटें
चर्चित सीटों में नंदीग्राम में वोटिंग भी पहले चरण में ही होने वाली है. नंदीग्राम पिछले साल तो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सीट बन गई थी. क्योंकि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के साथ दो-दो हाथ कर रही थीं. दोनों में मुकाबला तो इस बार भी हो रहा है, लेकिन भवानीपुर में. शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं. इसी तरह बहरामपुर में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, खड़गपुर सदर में बीजेपी नेता दिलीप घोष और दोमकल सीट पर आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर की किस्मत का फैसला भी पहले फेज में ही होना है.
केंद्रीय बलों की तैनाती पर सियासत
बंगाल से आ रहे केंद्रीय बल के वीडियो वायरल हो रहे हैं. इन्हीं में एक वीडियो ये भी है जिसमें CRPF की बख्तरबंद गाड़ियां सड़कों पर दिख रही हैं. अगर कोई पत्थर मारे या पेट्रोल बम फेंक दे तो वैसी स्थिति में ये गाड़ियां जवानों के लिए कवच की तरह काम करती हैं. बंगाल में चुनाव के वक्त केंद्रीय बल की इतनी मजबूत तैनाती राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं.
CAPF की 2407 कंपनियां तैनात
बीजेपी कह रही है कि टीएमसी के गुंडों से सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल को चुनाव आयोग ने तैनात किया. जबकि टीएमसी इतनी बड़ी संख्या में सेंट्रल फोर्स की तैनाती पर सवाल उठा रही है. पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान है, जिसके लिए चुनाव आयोग ने CAPF की 2407 कंपनियां तैनात की हैं. यानी 152 सीटों पर लगभग ढाई लाख अर्धसैनिक बल के जवान मौजूद रहेंगे.
फेज वन में 3.4 करोड़ वोटर हैं और CAPF जवान लगभग ढाई लाख, मोटा मोटी अंदाजा लगाएं तो 100 से 130 वोटर पर एक जवान तैनात होगा. इलाके के हिसाब से बात करें तो सबसे ज्यादा कंपनियां कोलकाता पुलिस क्षेत्र में तैनात हैं. इसके बाद पूर्वी बर्धमान, हुगली, बैरकपुर, कृष्णानगर और हावड़ा का नंबर आता है.
सूत्रों ने बताया कि मतदान समाप्त होने के बाद भी लगभग 500 कंपनियां राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के तहत तैनात रहेंगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन सेंट्रल फोर्स आती हैं. इनमें CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB, NSG और असम रायफल्स शामिल हैं. शायद इसलिए बंगाल में इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बल की तैनाती को लेकर राजनीति भी खूब हो रही है.
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है. शायद इसलिए चुनाव आयोग के निर्देश पर तैनात सुरक्षाबल ने ऐसी बख्तरबंद गाड़ियां उतार दी हैं.
2016 के चुनाव में बूथ लूटने और लोकल स्तर पर हिंसा की खबरें आई थीं. जिसमें 5 से 7 लोगों के मारे जाने की खबर थी.2021 में चुनाव के दौरान 1520 लोगों की मौत हुई थी और पोस्ट पोल यानी चुनावी नतीजों के बाद हुए हिंसा में 40 से 50 लोग मारे गए थे. इस बार चुनाव के बाद भी सुरक्षाबल की 500 कंपनियां अगले 6 महीने तक पश्चिम बंगाल में रहेंगी.
तमिलनाडु की प्रमुख सीटें
तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें प्रमुख सीटों में कोलाथुर (एमके स्टालिन), डॉ. राधाकृष्णन नगर, मदुरवोयल और अंबत्तूर शामिल हैं. ये सीटें चेन्नई के शहरी क्षेत्रों और प्रमुख राजनीतिक गढ़ों का प्रतिनिधित्व करती हैं. यहां की मुख्य राजनीति द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (AIADMK) के बीच है.
तमिलनाडु में 5,938 मतदान केंद्र संवेदनशील
पूरे तमिलनाडु में लगभग 75,032 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इनमें से 3,022 स्थानों पर स्थित 5,938 मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है. इन केंद्रों पर किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हथियारबंद अर्धसैनिक बलों और तमिलनाडु विशेष पुलिस बल की तैनाती की गई है.
मतदान के दिन राज्य भर में पुलिस, अर्धसैनिक बल, अग्निशमन विभाग, जेल विभाग, वन विभाग, होमगार्ड और सेवानिवृत्त सैनिकों सहित लगभग 1.47 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. इसके अलावा, केंद्रीय सुरक्षा बलों की लगभग 295 कंपनियों से करीब 23,000 अर्धसैनिक जवान तमिलनाडु पहुंचे हैं. इसमें 26,203 इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, विशेष सब-इंस्पेक्टर और 94,598 हेड कांस्टेबल व पुलिसकर्मी शामिल हैं.
विशेष बल की तैनाती
इसी तरह, विशेष कमांडो/अतिरिक्त बल के 12,150 जवान भी सुरक्षा ड्यूटी में लगे हैं. राजधानी चेन्नई जिले में अवडी और तांबरम शहर पुलिस को छोड़कर 38 जिलों और 7 महानगरीय पुलिस क्षेत्रों में 1.17 लाख पुलिसकर्मी सुरक्षा में तैनात रहेंगे. इसके अलावा, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के अलावा लगभग 20,000 सेवानिवृत्त सैनिक, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी और सेवानिवृत्त वन रक्षक भी चुनाव ड्यूटी के लिए लगाए गए हैं.
गश्त में अर्धसैनिक बल
मतदान के दिन 514 वाहनों में विशेष बल के जवान पूरे राज्य में गश्त करेंगे. अगर किसी मतदान केंद्र पर कोई समस्या होती है, तो ये तुरंत वहां पहुंचकर कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे. इसके अलावा, डीएसपी, एडीएसपी, एसपी, डीआईजी, आईजी और पुलिस आयुक्तों के नेतृत्व में 1,100 वाहनों में त्वरित प्रतिक्रिया दल भी सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात रहेंगे.



