झारखंड में छात्र-पुलिस संघर्ष के बाद केस दर्ज, 2 जिलों में 900 अज्ञात आरोपी
छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार उन्हें परेशान कर रही है. कई सदस्यों के नाम रांची-हजारीबाग दोनों जगह दर्ज एफआईआर में हैं और सवाल उठाया कि वे एक ही समय दोनों स्थानों पर कैसे मौजूद हो सकते हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार उन्हें परेशान कर रही है. कई सदस्यों के नाम रांची-हजारीबाग दोनों जगह दर्ज एफआईआर में हैं और सवाल उठाया कि वे एक ही समय दोनों स्थानों पर कैसे मौजूद हो सकते हैं.
झारखंड के गिरिडीह और हजारीबाग में नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ झड़प के मामले में 39 नामजद और 900 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ 3 एफआईआर दर्ज की गई हैं.
अधिकारियों ने कल रविवार को बताया कि गिरिडीह में शुक्रवार और शनिवार को हुई झड़पों के संबंध में टाउन पुलिस थाने में 2 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि एक एफआईआर हजारीबाग में सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के आरोप में दर्ज हुई.
राज्य में नई एफआईआर ऐसे समय दर्ज की गई जब सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस के साथ झड़प करने के आरोप में रांची के कोतवाली थाने में 14 नामजद और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ 2 दिन पहले शनिवार को 3 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर बीजेपी ने सरकार की आलोचना की है.
हजारीबाग सदर के पुलिस उपाधीक्षक रूपक कुमार सिंह ने बताया कि 21 अगस्त को सीएम सोरेन का पुतला फूंकने की कोशिश और सरकारी काम में बाधा डालने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के आरोप में कोर्रा पुलिस थाने में 18 नामजद और 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की गई. उन्होंने कहा, “हमने सदर क्षेत्राधिकारी आशुतोष कुमार की अर्जी के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की है.”
‘केस में कोई गिरफ्तार या हिरासत में नहीं’
हालांकि कोर्रा थाना प्रभारी नेमधारी रजक का कहना है कि अभी तक इस केस में किसी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया है. पुलिस उपद्रव करने वालों की पहचान के लिए सीसीटीवी और वीडियो फुटेज की जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि इस संघर्ष में कुल 8 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें 4 उपनिरीक्षक शामिल हैं.
इसी तरह गिरिडीह में पहली एफआईआर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता अनीश राय के आवेदन पर दर्ज की गई, जबकि दूसरी एफआईआर सदर क्षेत्र निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार सिंह की अर्जी पर दर्ज हुई.
गिरिडीह टाउन थाना प्रभारी ने बताया कि पहली एफआईआर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई है. इसमें पार्टी के जिलाध्यक्ष संजय सिंह समेत 11 लोगों को नामजद किया गया तो जबकि 20 लोग अज्ञात हैं. दूसरी एफआईआर में करीब 10 लोगों को नामजद और 200 लोगों को अज्ञात आरोपी बनाया गया है.
FIR के नाम पर परेशान किया जा रहाः छात्र संगठन
अधिकारी का कहना है कि आरोपियों पर 5 स्थानों पर यातायात रोकने की कोशिश करने, मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने से रोकने पर पुलिस से भिड़ने और उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप हैं.
दूसरी ओर, जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से उन्हें परेशान किया जा रहा है. कई सदस्यों के नाम रांची और हजारीबाग दोनों जगह दर्ज एफआईआर में हैं और सवाल उठाया कि वे एक ही समय में दोनों स्थानों पर कैसे मौजूद हो सकते हैं.
पीयूष कुमार सिंह ने कहा, “रांची और हजारीबाग की एफआईआर में कुणाल पी. सिंह, रवींद्र प्रसाद और मेरा नाम है. हम एक ही समय में दोनों जगह कैसे मौजूद हो सकते हैं?”
सरकार को वापस लेनी चाहिए एफआईआरः मरांडी
हालांकि एफआईआर को लेकर राजनीति शुरू हो गई है. झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार से छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा, “अगर सरकार एफआईआर वापस नहीं लेती है तो युवाओं को जेल जाने से भी डरना नहीं चाहिए. जेलें भर दो.”
जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आइशी घोष ने भी झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की निंदा की. उन्होंने कहा, “हम झारखंड में छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की बर्बरता और अत्याचार की निंदा करते हैं.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगें जायज हैं और सरकार को उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उनकी बात सुननी चाहिए. संवाद की हमेशा गुंजाइश होती है. छात्र समुदाय के खिलाफ एफआईआर और डराने-धमकाने की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.”
इस बीच, राज्य पुलिस ने कल रविवार को एडवाइजरी जारी कर कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर धरना, प्रदर्शन, जुलूस, रैली और जनसभाएं आयोजित करने के लिए आयोजकों को पहले अनुमति लेनी होगी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. साथ ही पुलिस ने छात्रों और आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील भी की.



