सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान, मानसून सत्र में पेश हो सकता है न्यायाधिकरण सुधार बिल
केंद्र सरकार मानसून सत्र में नया न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पेश करने की तैयारी में है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केंद्र सरकार मानसून सत्र में नया न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पेश करने की तैयारी में है.
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों और कामकाज को लेकर केंद्र पर दबाव बनाया था, जिसके बाद अटॉर्नी जनरल ने यह जानकारी दी.
देश भर में न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एक नया विधेयक मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में है. संसद के मानसून सत्र में नए न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पेश किया जा सकता है.
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने CJI सूर्य कांत की बेंच में जानकारी दी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से देश भर में न्यायाधिकरणों के कामकाज पर एक समान प्रस्ताव तैयार करने को कहा था. इस बात पर जोर देते हुए कि इन निकायों को निष्क्रिय होने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले निरस्त किए गए प्रावधानों को केंद्र सरकार ने मामूली बदलावों के साथ फिर से लागू कर दिया है. तब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर एक राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग गठित करने का निर्देश दिया था.
हालांकि, जस्टिस बागची ने बताया कि बिल मानसून सेशन के एजेंडा में नहीं था. जवाब में, एजी ने कहा, “हम कोशिश करेंगे.” CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार से देश भर में ट्रिब्यूनल के कामकाज पर एक जैसा प्रस्ताव बनाने को कहा था, और इस बात पर जोर दिया था कि इन संस्थाओं को बंद नहीं होने दिया जा सकता.”
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का आश्वासन
नवंबर 2025 में, उस समय के सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के ट्रिब्यूनल मेंबर्स की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़े नियमों को इस मुद्दे पर अपने पहले के फैसलों का उल्लंघन करने के लिए रद्द कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले रद्द किए गए नियम केंद्र सरकार ने थोड़े-बहुत बदलावों के साथ इसे फिर से पेश किया. कोर्ट ने तब केंद्र सरकार को चार महीने के अंदर एक नेशनल ट्रिब्यूनल कमीशन बनाने का निर्देश दिया था.
न्यायाधिकरणों के कामकाज में बड़े बदलाव की तैयारी
कोर्ट ने कहा था, “ऐसा कमीशन बनाना एक जरूरी स्ट्रक्चरल सुरक्षा है जिसे देश भर में ट्रिब्यूनल की नियुक्ति, एडमिनिस्ट्रेशन और कामकाज में आजादी, ट्रांसपेरेंसी और एक जैसापन पक्का करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस बॉडी पर बार-बार कोर्ट का जोर देना यह दिखाता है कि कोर्ट इस बात को मानता है कि छोटे-छोटे सुधार उन सिस्टम की कमियों को ठीक नहीं कर सकते जो दशकों से बनी हुई हैं.”



