ईरान के समर्थन में चीन, अमेरिका-इजराइल से युद्ध रोकने की मांग
मोहम्मद सफ़ा का इस्तीफा कोई मामूली घटना नहीं है। यह उस खूनी खेल की गवाही है जो ट्रंप और नेतन्याहू मिलकर खेल रहे हैं।

4pm न्यूज नेटवर्क: अमेरिका-ईरान जंग से पूरी दुनिया कराह उठी है। खासतौर से एशिया और यूरोप के हालात तो लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ऐसे में जहाँ एक तरफ दुनिया इस महाजंग के खत्म होने की उम्मीद कर रही थी, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की जोड़ी ने भयंकर तबाही का बटन दबाने की पूरी तैयारी कर ली है।
आज की सबसे सनसनीखेज और दहला देने वाली खबर यूनाइटेड नेशंस से आ रही है। यूएन के जाने-माने डिप्लोमेट और मानवाधिकारों के रक्षक मोहम्मद सफ़ा ने यह कहकर इस्तीफा दे दिया है कि वे इस ‘इंसानी कत्लेआम’ का हिस्सा नहीं बनना चाहते। बड़ी खबर यह है कि उन्होंने उस ‘टॉप सीक्रेट’ फाइल को लीक कर दिया है, जिसमें ट्रंप प्रशासन ने ईरान के तीन बड़े शहरों पर परमाणु हमले की मंजूरी दी है। सवाल बड़ा है कि क्या अपनी डूबती हुई साख बचाने के लिए ट्रंप पूरी दुनिया को राख के ढेर में बदल देंगे?
उधर, ईरान के होर्मुज प्रांत के गवर्नर ने भी एक ऐसा बयान दिया है जिससे पेंटागन में सन्नाटा पसर गया है। जिस अंदाज़ में होर्मुज के गवर्नर ने अमेरिका को ‘तोहफा’ देने की बात कही है, उससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ईरान पहले ही एटम बम तैयार कर चुका है?
मोहम्मद सफ़ा का इस्तीफा कोई मामूली घटना नहीं है। यह उस खूनी खेल की गवाही है जो ट्रंप और नेतन्याहू मिलकर खेल रहे हैं। लीक हुई रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के न्यूक्लियर प्लांट्स और घनी आबादी वाले इलाकों को ‘नॉन-कन्वेंशनल वेपन्स’ यानी परमाणु बमों से निशाना बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। नेतन्याहू साहब, क्या गाज़ा को कब्रिस्तान बनाकर आपका कलेजा ठंडा नहीं हुआ?
क्या हज़ारों मासूमों के खून से सनी आपकी सत्ता अब तेहरान की करोड़ों जिंदगियों को निगलना चाहती है? और ट्रंप साहब, आप तो दुनिया को ‘ग्रेट अमेरिका’ का ख्वाब दिखाते थे, लेकिन आज आपका चेहरा एक ‘एटमी दरिंदे’ जैसा नज़र आ रहा है। मोहम्मद सफ़ा का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि दुनिया अब आपके इस पागलपन के खिलाफ खड़ी हो गई है। अगर यह हमला हुआ, तो इसकी आग सिर्फ ईरान तक नहीं रहेगी, बल्कि वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क भी इसकी ज़द में आएंगे।
जहाँ एक तरफ अमेरिका परमाणु हमले की गीदड़भभकी दे रहा है, वहीं ईरान के होर्मुज प्रांत के गवर्नर ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने सुपरपावर की नींद उड़ा दी है। गवर्नर ने दो-टूक लफ्जों में कहा है कि— “ट्रंप साहब, अगर आप परमाणु हमले की हिमाकत कर रहे हैं, तो याद रखिएगा कि हमारे पास भी आपके लिए एक ऐसा तोहफा तैयार है जिसकी आपने ख्वाब में भी कल्पना नहीं की होगी।” इस बयान के बाद डिफेंस एक्सपर्ट्स के बीच यह चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या ईरान ने गुपचुप तरीके से अपना परमाणु हथियार मुकम्मल कर लिया है? अगर ईरान के पास परमाणु जवाब तैयार है, तो फिर ट्रंप की यह दादागिरी उनके अपने मुल्क के लिए ‘डेथ वारंट’ साबित होगी। क्या अमेरिका अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहा है?
एक ओर जहाँ होर्मुज के गवर्नर मोहम्मद आशूरी तज़ियानी अमेरिकी परमाणु बम के खिलाफ ‘बड़े तोहफे’ की बात कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर इस महाजंग में अब रूस और चीन खुलकर मैदान में आ चुके हैं। चीन ने अमेरिका और इज़राइल को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वे तुरंत इस पागलपन को रोकें। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद करने और तनाव कम करने की मांग करता है। चीन ने परमाणु सुविधाओं पर हमलों का पुरज़ोर विरोध करते हुए कहा कि ऐसे कदम बेहद खतरनाक हैं। साथ ही, युद्ध में ऐतिहासिक स्थलों को हुए नुकसान पर भी चिंता जताई गई। बीजिंग ने कहा कि वह शांति बहाल करने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। चीन ने यह भी बताया कि उसके तीन जहाज हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुज़रे, जिसके लिए उन्होंने संबंधित पक्षों का धन्यवाद किया।
लेकिन सबसे बड़ी हलचल रूस की तरफ से हुई है। चेचन्या के लड़ाकों ने ईरान के समर्थन में आधिकारिक तौर पर जंग का ऐलान कर दिया है। चेचन लड़ाकों ने साफ़ कर दिया है कि वे अमेरिका के हर सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने के लिए तैयार हैं। अब यह जंग सिर्फ दो मुल्कों की नहीं रही, बल्कि एक ‘ग्लोबल वॉर’ में तब्दील होती दिख रही है। ट्रंप साहब, क्या आप इतने मोर्चों पर एक साथ लड़ने की हैसियत रखते हैं?
हालांकि बड़ी खबर यह भी सामने आई है कि ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के पांचवें हफ्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपनी युद्ध रणनीति में बदलाव करते नज़र आ रहे हैं। संकेत मिल रहे हैं कि वह “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को जल्द समाप्त करने के इच्छुक हैं, भले ही अहम होर्मुज समुद्री रास्ता खुले या न खुले। अमेरिका का यह कदम न केवल युद्ध की दिशा बदल सकता है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि फिलहाल इस रणनीतिक जलमार्ग को दोबारा खोलना उनकी प्राथमिकता नहीं है। उनका मानना है कि ऐसा करने की कोशिश सैन्य अभियान को उनकी तय चार से छह सप्ताह की समयसीमा से आगे खींच सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इस अहम मार्ग पर नियंत्रण हासिल करना बेहद जटिल और समय लेने वाला काम होगा, जिससे अमेरिका की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
अगर यह रणनीति लागू होती है, तो इसका मतलब होगा कि तेहरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा। इस समुद्री रास्ते की आंशिक नाकेबंदी ने पहले ही पूरी दुनिया के बाज़ारों को झटका दिया है; तेल की आपूर्ति बाधित हुई है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। हालांकि भविष्य में इसे खोलने के लिए अभियान से इनकार नहीं किया गया है, लेकिन फिलहाल इसे टालकर युद्ध को जल्दी खत्म करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
हालांकि, तनाव कम करने की इस कोशिश के साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ती जा रही है। शनिवार को युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली 2,500 से अधिक मरीन सैनिकों के साथ पहुँचा, जबकि प्रशासन 10,000 अतिरिक्त ज़मीनी सैनिकों की तैनाती पर भी विचार कर रहा है। सबसे आक्रामक विकल्पों में ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्ज़ा करने का जटिल मिशन भी शामिल है, जो संघर्ष को और भड़का सकता है।
बंद दरवाजों के पीछे ट्रंप और उनके सलाहकार इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि होर्मुज समुद्री रास्ते को ज़बरन खोलने से उनकी रणनीति की समयसीमा बिगड़ जाएगी। इसके बजाय अब ध्यान ईरान की नौसैनिक क्षमता को कमज़ोर करने और उसकी मिसाइल ताकत को घटाने पर है, जिसके बाद कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ा जाएगा। इस रणनीति के तहत तेहरान पर दबाव बनाया जाएगा कि वह खुद ही व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बहाल करे, जबकि यूरोपीय और खाड़ी देशों को जलमार्ग की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी देने की योजना है। हाल ही में व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी इस रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन को खत्म करने के लिए होर्मुज को सुरक्षित बनाना ट्रंप प्रशासन के “मुख्य उद्देश्यों” में शामिल नहीं है। ऐसे में होर्मुज खुलने से पहले ही अमेरिका युद्ध छोड़कर भाग सकता है।
अंदरखाने की खबर तो यह है कि ट्रंप अब होर्मुज के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गए हैं। उन्हें समझ आ गया है कि ताकत के दम पर होर्मुज खुलवाना उनके बस की बात नहीं है। इसीलिए अब वे अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए होर्मुज छोड़कर भागने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। उनके सलाहकार उन्हें मशवरा दे रहे हैं कि बिना होर्मुज खुलवाए ही किसी तरह इस तबाही से बाहर निकला जाए। ट्रंप साहब, क्या इसे ही आपकी बहादुरी कहा जाए? पहले पूरी दुनिया में आग लगाई और अब जब आंच खुद तक पहुँची, तो पीछे हटने की तैयारी कर रहे हैं?



