बृजेश पाठक और अखिलेश यादव के बीच संघर्ष, सपा ने सरकार पर किया हमला

यूपी में विधनसभा चुनाव में भले ही वक़्त हो लेकिन अभी से ही प्रदेश में सियासी बवाल मचा हुआ है। नेताओं के एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगते हुए नजर आ रहे हैं।

4pm न्यूज नेटवर्क: यूपी में विधनसभा चुनाव में भले ही वक़्त हो लेकिन अभी से ही प्रदेश में सियासी बवाल मचा हुआ है। नेताओं के एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगते हुए नजर आ रहे हैं।

इसी बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जो की चर्चा में आ गया। Brijesh Pathak मीडिया से बात कर रहे थे। वीडियो में वे महिलाओं के अधिकार, बिल पास करने, स्पेशल सेशन आदि पर बोल रहे थे। अखिलेश ने इसमें “बोली” पर तंज कसा — मतलब Brijesh Pathak के मुंह से कुछ ऐसा निकला जो “चोरी” से जुड़ा लग रहा था। ये Freudian slip यानी अनजाने में सच्चाई उगल देना का आरोप लगाते हुए शेयर किया गया। अखिलेश का इशारा था कि BJP नेता के शब्दों से उनकी सरकार पर चोरी और भ्रष्टाचार का आरोप छुप नहीं पा रहा।

हलांकि जिस वीडियो पर इतना बवाल मचा हुआ है उसे शेयर करते हुए सपा ने भी लिखा कि- मंत्री पद गंवाने का डर खौफ चेहरे से स्पष्ट दिखाई दे रहा है, हताशा में उलूल जुलूल बक रहे हैं महोदय। वो कहावत है खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे, लेकिन यहां तो खिसियाना बंदर माइक पे झूठ बोले चल रहा है। ये मंत्री महोदय जो खुद 3 दलों से होकर गुजरे हैं और कुछ वर्ष पहले ही नवागत भाजपाई बने हैं वे चाल चरित्र चेहरा और संस्कार की बातें कर रहे हैं। वहीँ इस बयान के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में जमकर बवाल मचा हुआ है। नेताओं के लगातार बयान सामने आ रहे हैं।

इसके बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पेट में दर्द है। उनका मतलब था कि अखिलेश को BJP सरकार की सफलताओं से जलन हो रही है। ब्रजेश पाठक ने आगे कहा कि अखिलेश यादव को भारतीय संस्कृति से, अवध, भोजपुरी और उत्तर प्रदेश की अन्य स्थानीय भाषाओं से दिक्कत है। उन्होंने अखिलेश को विदेश में पढ़ने वाला बताया और कहा कि उन्हें अपनी मिट्टी की भाषाओं और संस्कृति से कोई लगाव नहीं है।

ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव पर जो बयान दिया है, वह साफ दिखाता है कि बीजेपी अब विकास की बात छोड़कर सिर्फ व्यक्तिगत हमले कर रही है। पाठक जी ने कहा कि अखिलेश यादव के पेट में दर्द है, उन्हें भारतीय संस्कृति, अवध, भोजपुरी जैसी स्थानीय भाषाओं से दिक्कत है क्योंकि वे विदेश में पढ़े हैं। यह बयान सुनकर लगता है कि बीजेपी वाले विपक्ष को नीचा दिखाने के लिए कुछ भी कहने को तैयार हैं। लेकिन असल में यह उनकी अपनी कमजोरी को छिपाने का तरीका है।

बीजेपी के नेता अक्सर कहते हैं कि वे भारतीय संस्कृति के रक्षक हैं, लेकिन जब बात आती है तो वे खुद विकास के वादे भूल जाते हैं। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी बहुत ज्यादा है, युवा नौकरी नहीं पा रहे, किसान परेशान हैं, महंगाई ने आम आदमी को तंग कर रखा है। इन सच्ची समस्याओं पर बीजेपी क्यों नहीं बोलती? इसके बजाय वे अखिलेश यादव जैसे नेता पर तंज कसते हैं कि वे विदेशी पढ़े हैं तो स्थानीय भाषा से क्या लेना-देना। यह बात हास्यास्पद है क्योंकि अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के ही हैं, यहां की मिट्टी से जुड़े हैं और लोगों की भाषा-बोली को अच्छी तरह समझते हैं। वे पूरे प्रदेश में घूमते हैं, अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड की समस्याएं सुनते हैं। बीजेपी वाले खुद दिल्ली-लखनऊ के एसी कमरों में बैठकर फैसले करते हैं और फिर संस्कृति का ढोंग रचते हैं।

यह बयान बीजेपी की सियासत की सच्चाई उजागर करता है। वे जानते हैं कि समाजवादी पार्टी का समर्थन बढ़ रहा है। अखिलेश यादव युवाओं को जोड़ रहे हैं, महिलाओं और पिछड़ों के लिए काम कर रहे हैं। इसलिए बीजेपी डर गई है और ऐसे बयान देकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। पाठक जी जैसे नेता भूल जाते हैं कि विदेश में पढ़ना गुनाह नहीं है। कई बड़े नेता विदेश जाते हैं ज्ञान लेने, लेकिन वापस आकर देश की सेवा करते हैं। अखिलेश यादव ने भी यही किया। वे भारतीय संस्कृति को नकार नहीं रहे, बल्कि उसे आधुनिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन बीजेपी को यह पसंद नहीं क्योंकि उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं है।

बीजेपी की यह रणनीति लंबे समय तक नहीं चलेगी। लोग अब बयानों से नहीं, काम से प्रभावित होते हैं। अखिलेश यादव जैसे नेता जो गरीब, किसान और युवा के साथ खड़े हैं, उन्हें विदेशी कहकर बदनाम नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश की जनता समझदार है। वे देख रहे हैं कि बीजेपी सत्ता में रहते हुए भी विपक्ष पर हमला करके अपनी नाकामी छिपा रही है। अगर बीजेपी सच में संस्कृति और भाषा की चिंता करती तो पहले प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों में स्थानीय भाषाओं को जगह देती। लेकिन वे नहीं देती क्योंकि उनका मकसद सिर्फ सत्ता बचाना है। गौरतलब है की इन्ही सभी बयानों को लेकर प्रदेश का सियासी पारा हाई है।

Related Articles

Back to top button