बांदा में किसानों की जमीन पर ‘जबरन रास्ता’ और अवैध खनन का आरोप, मंडलायुक्त से शिकायत

बांदा में किसानों की जमीन पर जबरन रास्ता बनाने और अवैध खनन के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने मंडलायुक्त से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, नहीं तो आंदोलन की चेतावनी दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  बांदा में मौरम खनन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। इस बार मामला सीधे किसानों की जमीन से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनकी निजी जमीनों पर जबरन रास्ता बनाया जा रहा है और खनन का काम बिना नियमों के चल रहा है। परेशान ग्रामीण अब प्रशासन के दरवाजे पर पहुंचे हैं।

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार को समाजसेवी ऊषा निषाद के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक समूह मंडलायुक्त अजीत कुमार से मिला और उन्हें एक लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में बताया गया कि सांडी खादर मौरम खंड-1 में खनन के नाम पर किसानों की जमीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पैलानी तहसील के ग्राम अलोना में रहने वाले किसान छोटा सिंह की जमीन और खड़ी फसल को मौरम ढोने वाले वाहनों ने रौंद दिया। आरोप है कि बिना अनुमति खेतों से रास्ता निकाल दिया गया और जब किसान ने इसका विरोध किया तो उसे धमकियां दी जाने लगीं।

किसान की शिकायत में क्या सामने आया?

पीड़ित किसान छोटा सिंह, पुत्र फकीरे सिंह ने बताया कि उसकी गाटा संख्या 1131 और 1141 की जमीन से रास्ता निकालने के लिए 90 हजार रुपये में समझौता तय हुआ था। लेकिन उसे सिर्फ 10 हजार रुपये ही दिए गए। बाकी रकम मांगने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। इस पूरे मामले से किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

खनन को लेकर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि सांडी खादर मौरम खंड-1 में दिन-रात भारी मशीनों से खनन किया जा रहा है, जो नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि कई किसानों की जमीनों के साथ-साथ वन विभाग की भूमि का भी बिना अनुमति इस्तेमाल हो रहा है। इससे इलाके की प्राकृतिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों को यह भी डर है कि इस खनन की वजह से केन कैनाल पंप की जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे आने वाले समय में सिंचाई संकट गहरा सकता है।

प्रशासन से क्या उम्मीद है?

समाजसेवी ऊषा निषाद ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसानों की जमीनों की पैमाइश कराकर सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस काम में दोषी हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी किसानों के अधिकारों के साथ इस तरह का खिलवाड़ न कर सके। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो वे बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। इससे यह साफ है कि मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

रिपोर्ट -इक़बाल खान

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